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देशभर में लाखों डॉक्टर हड़ताल पर, स्वास्थ्य सेवाएं ठप- जानिए क्या है पूरा मामला

भारतीय चिकित्सा परिषद को भंग कर राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग बिल के गठन के प्रस्ताव का देशभर के डॅाक्टरों ने विरोध किया

देशभर में लाखों डॉक्टर हड़ताल पर, स्वास्थ्य सेवाएं ठप- जानिए क्या है पूरा मामला

राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग बिल के विरोध में देशभर में लाखों डॅाक्टर हड़ताल पर चले गये हैं, जिसके कारण अस्पतालें में भर्ती लाखों मरीज परेशान हैं|

डॅाक्टरों के संगठन इंडियन मेडीकल एसोसिएशन (आइएमए) व दिल्ली मेडीकल एसोसिएशन (डीएमए) राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग बिल के विरोध में खुलकर सामने आयें हैं| दोनों संगठनों ने राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) के गठन के प्रस्ताव को मेडिकल शिक्षा व मरीजों के हित के खिलाफ बताया है।
राष्ट्रीय चिकित्सा परिषद को भंग कर इस बिल के गठन का प्रस्ताव रखा गया है। इसके विरोध में आज आइएमए देश भर के अस्पतालों में हड़ताल कर रही है, वहीं दूसरी ओर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने राज्यसभा में कहा कि ' हमने इंडियन मेडीकल एसोसिएशन से कल बातचीत की ' उनकी बात सुनी और अपना पक्ष भी बताया'।
इसको लेकर डीएमए ने दिल्ली के सभी अस्पतालों व नर्सिंग होम में ओपीडी सेवा बंद रखने की घोषणा की है और साथ ही सरकारी अस्पतालों से भी विरोध में शामिल होने की अपील की है| सुबह 6 बजे से शाम के 6 बजे तक निजी अस्पतालों व नर्सिंग होम में ओपीडी सेवा बंद रहेगी|
हालांकि सामान्य सेवाओं को जारी रखा जायेगा। आइएमए के महासचिव डॅा. आरएन टंडन ने राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के गठन को आम नागरिकों व गरीबों के हित के खिलाफ बताया है। उन्होनें कहा कि इससे मेडीकल शिक्षा में निजीकरण को बढ़वा मिलेगा।
जिससे मध्यमवर्गीय व गरीब परिवारों के छात्र-छात्राएं मेडीकल शिक्षा से वंचित रह सकते हैं। इस बिल के प्रावधानों के तहत सरकार निजी मेडिकल कॉलेजों में सिर्फ 40 फीसद सीटों पर शिक्षा शुल्क लागू कर पाएगी।
60 फीसद सीटों पर सरकार का नियंत्रण नहीं रहेगा। उन सीटों पर निजी अस्पताल अपनी मर्जी के मुताबिक शिक्षा शुळ्क ळागू करेंगे| गौरतलब है कि एनएमसी के गठन के बाद मेडिकल कॉलेज खोलने के लिए किसी के निरीक्षण की जरूरत नहीं पड़ेगी।
सुविधाओं के निरीक्षण के बगैर मेडिकल कॉलेज खोले जा सकेंगे। स्नातकोत्तर की सीटें बढ़ाने व नया विभाग शुरू करने के लिए भी स्वीकृति की जरूरत नहीं होगी।
डॉक्टरों का कहना है कि कॉलेज खोलने के पांच साल बाद उनमें सुविधाओं का निरीक्षण होगा। तब कमियां पाए जाने पर उन कॉलेजों पर पांच करोड़ से 100 करोड़ रुपये जुर्माना लगाने का प्रस्ताव है। इससे भ्रष्टाचार बढ़ेगा।
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