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सावधान! आंख की रोशनी छीन सकता है ''चाइनीज पटाखा''

चाइनीज पटाखों में अस्थिर केमिकल पोटैशियम क्लोरेट का इस्तेमाल होता है।

सावधान! आंख की रोशनी छीन सकता है
नई दिल्ली. जहां एक ओर देशभर में लोग दिवाली की तैयारियों में जुटे हुए हैं। वहीं दूसरी ओर कुछ लोग ऐसे भी हैं जिनको बगैर पटाखो के दिवाली फीकी-फीकी लगती है। जिसके चलते कई लोग पटाथों की खरीद में लग जाते हैं। लेकिन हाल ही में भारत द्वारा चाइनीज सामानों को बैन किए जाने की बात पर कई जगहों पर चाइनीज पटाखे भी बैन कर दिए गए हैं। आपको बता दें कि इस तरह से चाइनीज पटाखो पर बैन लगना बेहद सही है क्योंकि ये बेहद सस्ते होने के साथ-साथ तेज रोशनी भी देते हैं लेकिन ये हमारे लिए बेहद खतरनाक हैं।
इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के मुताबिक, कई चाइनीज पटाखों में अस्थिर केमिकल पोटैशियम क्लोरेट का इस्तेमाल होता है। जिसकी वजह से भारत में इसे बैन किया गया है। ऐसे पटाखे मिलने पर उसे जब्त किया जा रहा है। चीनी पटाखे बेहद सस्ते होते हैं लेकिन इसमें इस्तेमाल होने वाले पोटैशियम क्लोरेट से तेज धमाका होता है। ये बेहद ज्वलनशील और अस्थिर रसायन है। इनके अलावा चीनी पटाखों में खतरनाक रसायन का भी इस्तेमाल होता है। जिससे त्वचा संबंधी बीमारी और एलर्जी होने की संभावना रहती है।
पोटैशियम क्लोरेट की वजह से त्वचा की बीमारी और सांस लेने की समस्या होने की संभावना ज्यादा होती है। यही वजह कि पटाखों को बेचने वाली कंपनियों को अपने प्रोडक्ट पर इसमें इस्तेमाल होने वाले तत्वों, रसायनों का जिक्र करना होता है।चाइनीज पटाखों में सल्फर और पोटैशियम क्लोरेट के इस्तेमाल की वजह से पर्यावरण को काफी नुकसान होता है। इसके इस्तेमाल से प्रदूषण स्तर कई गुना बढ़ जाता है। पटाखों में सल्फर की वजह से आंखों में जलन और सांस लेने में परेशानी की शिकायत हो सकती है।
जबकि भारतीय पटाखों में पोटैशियम और सोडियम नाइट्रेट का इस्तेमाल होता है। जो आम तौर पर काफी सुरक्षित हैं। यही वजह है कि चीनी पटाखे भारतीय पटाखों से ज्यादा खतरनाक होते हैं क्योंकि इसमें पोटैशियम क्लोरेट या परक्लोरेट का इस्तेमाल होता है, जो तेजी से जलने में सक्षम हैं। इसीलिए इन्हें भारत में बैन किया गया है।
नोट: चाइनीज पटाखे सरकार के तय किए गए ध्वनि मानकों पर खरे नहीं उतरते। नियमों के मुताबिक आकिशबाजी के दौरान अधिकतम ध्वनि 154 डेसिबल तक होनी चाहिए।
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