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नोटबंदी से कश्मीर में पत्थरबाजी भी हुई बंद: मनोहर पर्रिकर

रक्षा मंत्री पर्रिकर ने इस साहसिक कदम के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को धन्यवाद दिया।

नोटबंदी से कश्मीर में पत्थरबाजी भी हुई बंद: मनोहर पर्रिकर
नई दिल्ली. 500-1000 के नोटों के बंद होने के बाद लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा। लोग बैंको के बाहर घंटों लंबी-लंबी कतारें लगाकर पैसे बदल रहे हैं। लेकिन इस बीच कई अच्छी खबरें भी सामने आने लगी है। नोटबंदी के बाद से लोग जहां दंगे-फसाद करते थे आज वो लोग अपने-अपने नोटों को बैंकों में जमा कराने के लिए लंबी-लंबी लाइनों में लगे हुए दिखाई दे रहे हैं। इस बीच एक बहुत ही अच्छी खबर भी सुनने को मिल रही है कि उच्च मूल्य वाले नोट बंद करने के बाद से कश्मीर में आतंकवाद का वित्तपोषण खत्म हो गया है और सुरक्षा बलों पर पथराव नहीं हो रहा है। यह बात सोमवार (14 नवंबर) को रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने कही।

साहसिक कदम के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को धन्यवाद
रक्षा मंत्री पर्रिकर ने इस साहसिक कदम के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को धन्यवाद दिया और कहा कि इससे मादक द्रव्यों पर रोक लगाने में भी मदद मिलेगी। पर्रिकर ने कहा, 'पहले दरें तय थीं- सुरक्षा बलों पर पथराव के लिए पांच सौ रूपए और किसी अन्य काम के लिए एक हजार रूपए। प्रधानमंत्री ने आतंकवाद के वित्तपोषण को खत्म कर दिया।'
साहसिक कदम के बाद सुरक्षा बलों पर पथराव नहीं
भाजपा विधायक अतुल भाटखालकर की तरफ से आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा, 'पिछले कुछ दिनों में प्रधानमंत्री के साहसिक कदम के बाद सुरक्षा बलों पर पथराव नहीं हो रहा है। इसके लिए मैं प्रधानमंत्री को बधाई देता हूं।' पर्रिकर ने बाद में संवाददाताओं से बात करते हुए कहा कि आतंकवाद को प्रायोजित करने वाले नोटबंदी से प्रभावित होंगे।
‘पहले प्रयोग नहीं (नो फर्स्ट यूज) की नीति’ विवाद
गौरतलब है कि मनोहर पर्रिकर के कुछ बयान पहले भी विवादों में रहे हैं। अभी हाल में उनके परमाणु बम पर दिए गए एक बयान ने विवाद पैदा कर दिया था। मोनहर पर्रिकर ने नई दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान कहा, ‘पहले प्रयोग नहीं (नो फर्स्ट यूज) की नीति’ के बजाय भारत यह क्यों नहीं कह सकता कि हम एक जिम्मेदार परमाणु शक्ति हैं और गैरजिम्मेदार तरीके से इसका प्रयोग नहीं करेंगे।’
लेकिन इसके तुरंत बाद पर्रिकर बोले, ‘यह मेरा निजी विचार हैं। वर्ना कुछ कल यह खबर चला देंगे कि पर्रिकर ने न्यूक्लियर सिद्धांत में बदलाव कर दिए हैं। सरकार द्वारा कोई बदलाव नहीं किया गया है। यह मेरे निजी विचार हैं।’
इससे पहले रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने सर्जिकल स्‍ट्राइक का फैसला लेने के लिए राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रशिक्षण को क्रेडिट दिया था। उन्‍होंने कहा था कि महात्‍मा गांधी की धरती से आए प्रधानमंत्री और गोवा से आए रक्षामंत्री एक अलग तरह का कॉम्बिनेशन बनाते हैं। इस कॉम्बिनेशन ने भारतीय सेना के नियंत्रण रेखा के पार जाकर सर्जिकल स्‍ट्राइक करने का समर्थन किया। अहमदाबाद में निरमा यूनिवर्सिटी में ‘अपनी सेना को जानिए’ कार्यक्रम में पर्रिकर ने कहा था, ‘मैं चकित रह जाता हूं कि महात्‍मा गांधी की धरती से आए प्रधानमंत्री और गोवा से आए एक रक्षामंत्री व सर्जिकल स्‍ट्राइक, स्थिति काफी… हो सकता है आरएसएस की शिक्षा के कारण ऐसा हुआ हो लेकिन यह अलग तरह का कॉम्बिनेशन था।’
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