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ATM से खाली हाथ लौट रहे हैं लोग, 2000 का नोट बना मुसीबत

आरबीआइ छोटे नोटों की आपूर्ति की अपनी योजना में विफल हो गई।

ATM से खाली हाथ लौट रहे हैं लोग, 2000 का नोट बना मुसीबत
नई दिल्ली. पीएम मोदी के 500 और 2000 रु. के नोट बैन करने की घोषणा के बाद से देश में अफरा-तफरी मच गई है। बैंको और एटीएम में लंबी कतारे देखने को मिल रही है। एटीएम खाली पड़े होने से लोगों को रोजमर्रा की जिंदगी में परेशानी हो रही है।
सरकार ने 500 और 1000 के पुराने नोटों का इस्तेमाल पब्लिक यूटिलिटी बिल्स के लिए करने की सीमा 72 घंटे तक के लिए बढ़ा दी है। यानी पेट्रोल पंप, अस्पताल, ट्रेन, एयर और बस टिकट बुकिंग में इन नोटों का इस्तेमाल आप 72 घंटे और कर सकते हैं।
ऑल इंडिया बैंक एंप्लॉयीज असोसिएशन (एआइबीइए) के एक नेता ने शुक्रवार को कहा कि विमुद्रीकरण के लिए समुचित तैयारी न कर आरबीआइ ने करोड़ों भारतीयों की जिंदगी के लिए मुश्किल पैदा कर दी है। एआइबीईए के महासचिव सी.एच. वेंकटाचलम ने कहा, 'ग्रामीण और छोटे कस्बों में लगभग 46,000 बैंक शाखाएं और 36,000 एटीएम हैं। वहां छोटे मूल्य वाले नोटों की अत्यंत आवश्यकता है, क्योंकि उन इलाकों के निवासियों को अपनी आजीविका के लिए नकदी की आवश्यकता होती है।' उन्होंने कहा कि आरबीआइ को लगातार छोटे मूल्य के नोट बड़ी मात्रा में प्रचलन में लाना चाहिए था, ताकि आम आदमी के पास 500 या 1000 रुपए के नोटों के बदले वे छोटे नोट होते।
वेंकटचलम ने कहा, 'आरबीआइ छोटे नोटों की आपूर्ति की अपनी योजना में विफल हो गई। इसके अतिरिक्त एटीएम फिर से नए नोटों के अनुकूल बनाए जाने हैं, ताकि वे नए नोटों को जारी कर सकें। 'उन्होंने कहा कि अभी तक एटीएम से निकलने वाले फर्जी नोटों को रोकने की समस्या दुरुस्त करने का कोई तंत्र नहीं है।
आरबीआइ ने एक बयान में कहा है कि बैंकों के पास पर्याप्त मात्रा में नए नोट हैं। इस पर वेंकटचलम ने कहा कि फिर लोग बैंक शाखाओं और एटीएम पर कतार क्यों लगाए हुए हैं। उन्होंने सवाल किया कि यदि व्यवस्था में छोटे नोट नहीं है, तो फिर लोग 2000 रुपए के नोट लेकर क्या करेंगे। वेंकटचलम ने कहा कि बैंकर अत्यंत परेशान हैं, क्योंकि उन्हें आम जनता के कोप का भाजन होना है, जबकि उनका कोई दोष नहीं है।
दो दिन बंद होने के बाद जब तीसरे दिन एटीएम खुले तो कैश कुछ घंटों में ही खत्म हो गया। बैंक को भी नोट बदलने, लोगों के गुस्से को झेलने और अनगिनत सवालों की वजह से खासी दिक्कतें उठानी पड़ीं। जिन लोगों को 2000 के नोट मिले, वे खुश तो थे लेकिन उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि इसका इस्तेमाल किया कैसे जाए क्योंकि हर जगह छुट्टे की समस्या बनी हुई थी।
एनटी के अनुसार, बाजार में 100 के नोट भी बहुत कम हैं जिसका असर साफ तौर पर नजर आ रहा है। दिल्ली, जयपुर, अलवर और इंदौर समेत कई जगहों पर इनकम टैक्स ऑफिसर्स ने शुक्रवार को छापा मारा। जिसकी वजह से कई दुकानों बंद रहीं और जो दुकानें खुली रही भी, कैश की कमी की वजह से नोटबंदी के तीसरे दिन बाद भी उनका बिजनेस स्लो रहा।
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