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नोट बंदीः कई कंपनियां दे रही हैं सालभर की सैलेरी

काला धन है वाले लोग पैसे को क़ानूनी बनाने और खपाने के लिए नए-नए हथकंडे अपना रहे हैं।

नोट बंदीः कई कंपनियां दे रही हैं सालभर की सैलेरी
नई दिल्ली. केंद्र सरकार द्वारा पांच सौ और एक हजार के नोट बंद करने के बाद ब्लैक मनी रखने वाले लोग अपना पैसा कई जुगाड़ों से खपाने की कोशिश में लगे हुए हैं। हालांकि ऐसे लोग इंटेलिजेंस एजेंसियों की नजर में हैं।
जिन लोगों के पास काला धान है वह उसे क़ानूनी बनाने और खपाने के लिए नए नए हथकंडे अपना रहे हैं। लोगों ने जहां पैसों को जलाने, कूड़े के ढेर में डालने आदि जैसे तरीके अपनाए हैं वहीं कुछ लोग इसे खपाने के लिए कुछ नायाब तरीके भी ढूढ़ चुके हैं-
1) कई ऑफिस या धंधे वालों ने अपने अंडर काम करने वाले एम्प्लॉयीज को एडवांस सैलरी देना शुरू कर दिया है। कई लोगों ने तो अपने स्टाफ को अगले एक साल तक की सैलरी अडवांस में दे दी है। सूत्रों के अनुसार अपने पास जमा कैश को खपाने के लिए वह ये तरीके अपना रहे हैं। स्टाफ के लोग अपनी एडवांस सैलरी बैंक खातों में जमा कर देंगे जिससे ब्लैक मनी वाला नुकसान से बच जाएगा।
2) कुछ ट्रेडर्स अपना कैश बिजनेस रेवन्यू के रूप में जमा कर रहे हैं। इसे वह नोटबंदी की घोषणा के बाद सेल्स से मिला पैसा दिखाएंगे जिसकी पेमेंट बाद में हुई है। जिससे वह टैक्स देने से बच जाएंगे।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि, वह इन सभी मामलों पर नजर रखे हुए हैं। उन्होंने कहा कि ब्लैक मनी आखिर में बैंकों तक पहुंच ही जाएगी और सरकार को इसका सटीक अनुमान लग जाएगा कि इकॉनमी में कितना ब्लैक मनी था। आरबीआई 31 मार्च तक कैश एक्सचेंज करेगा। उसके बाद ही पता चल पाएगा कि कितना ब्लैक मनी था।
एक अधिकारी ने बताया कि आने वाले विधानसभा चुनावों में बीजेपी के लिए एक मुद्दा होगा। इसके अलावा ब्लैक मनी के सिस्टम में आने से इकॉनमी को बूस्ट मिलेगा और बैंकों के पास भी काफी पैसा होगा जिससे इंट्रेस्ट रेट के कम होने की संभावना है। एजेंसियों की रिपोर्ट्स के अनुसार 500 और 1000 के पुराने नोट की डिमांड अभी भी बनी हुई है। कई ट्रेडर्स इन्हें 90 प्रतिशत फेस वैल्यू पर स्वीकार कर रहे हैं जो गैर-कानूनी है।
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