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2002 जबरन वसूली मामला: पटियाला हाउस कोर्ट ने अबू सलेम पर 4 मई तक के लिए स्थगित किया फैसला

दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने जबरन वसूली के मामले में गैंगस्टर अबू सलेम पर फैसला 4 मई तक के लिए स्थगित कर लिया है।

2002 जबरन वसूली मामला: पटियाला हाउस कोर्ट ने अबू सलेम पर 4 मई तक के लिए स्थगित किया फैसला

दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने जबरन वसूली के मामले में गैंगस्टर अबू सलेम पर फैसला 4 मई तक के लिए स्थगित कर लिया है। बता दें कि अबू सलेम पर 2002 में दिल्ली के एक व्यापारी ने 5 करोड़ रुपए फिरौती मांगने का आरोप लगाया था।

कौन है अबू सलेम?

अंडरवर्ल्ड डॉन अबू सलेम का जन्म 1960 के दशक में उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले में सराय मीर नामक गांव में हुआ था। उसकी जन्मतिथि को लेकर सीबीआई और मुंबई पुलिस के बीच मतभेद हैं। अबू सलेम का पूरा नाम अबू सलेम अब्दुल कय्यूम अंसारी है। वैसे कई जगहों पर उसे अकील अहमद आजमी, कैप्टन और अबू समान के नाम से भी जाना जाता है। अबू के पिता एक जाने माने वकील थे। मगर एक सड़क दुर्घटना में उनकी मृत्यु हो जाने के बाद अबू का परिवार टूट गया। वह चार भाईयों में दूसरे स्थान पर था।

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पिता की मौत के बाद अबू का परिवार आर्थिक रूप से कमजोर हो गया। घर में भारी परेशानी आ गई. जिसके चलते अबू सलेम ने पढ़ाई छोड़कर काम करना शुरू कर दिया। उसने आजमगढ़ में ही एक मैकेनिक के यहां काम करना शुरू कर दिया। लेकिन जल्द वह काम के लिए दिल्ली आ गया। यहां उसने मैकेनिक का काम करने के बाद टैक्सी चलाना शुरू किया। लेकिन वह अपना और परिवार का गुजारा नहीं कर पा रहा था। इसलिए 80 के दशक में उसने मुंबई का रुख कर लिया और वहां जाकर टैक्सी चलाने लगा।

अपराध की दुनिया में कदम

मुंबई में कुछ माह बाद ही अबू की मुलाकात अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के लोगों से हुई. पहले मामला दुआ सलाम तक रहा लेकिन जल्द ही उसने डी कंपनी में काम करना शुरू कर दिया। उसके साथ उसका चचेरा भाई अख्तर भी शामिल था। यह जुर्म की दुनिया में उसका पहला कदम था। पहले वह आम कारिंदे की तरह काम करता रहा लेकिन अपने हुनर और तेज़ दिमाग की वजह से जल्द ही वह गैंग में आगे बढ़ गया था। उसने गैंग में रहकर अपनी अलग पहचान बनाना शुरू कर दिया था। मुंबई के लोग भी धीरे धीरे उसे जानने लगे थे। अबू सलेम अब पूरी तरह से जुर्म के रंग में रंग गया था।

अबू की पहली गिरफ्तारी

अबू सलेम के खिलाफ पहला मामला 1988 में मुंबई के अंधेरी पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था। लेकिन 1991 में उत्तर पश्चिम मुंबई के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त आफताब अहमद खान ने अबू सलेम को पहली बार गिरफ्तार किया था। यह उसकी पहली गिरफ्तारी थी। अबू पर आरोप था कि उसने लोखंडवाला कॉम्प्लेक्स में व्यापारियों से अवैध उगाही की कोशिश के चलते गोलीबारी की थी उसके खिलाफ इस संबंध में मामला भी दर्ज था। यह पहला मौका था जब पुलिस को अबू सलेम की तस्वीरें और फिंगर प्रिंट हासिल हुए थे।

मुंबई धमाकों के बाद दुबई बना ठिकाना

अबू सलेम, दाऊद के गैंग में अपनी खास जगह बना चुका था। इसी दौरान मुंबई में सीरियल ब्लास्ट हुए। जिसका इल्जाम दाऊद गैंग के सिर पर था। इसलिए दाऊद इब्राहिम और उसके गैंग ने दुबई में पनाह ली। अबू सलेम भी वहां पहुंच गया। फिर उसने दाऊद के भाई अनीस इब्राहिम के लिए काम करना शुरू कर दिया। वह दुबई में रहकर तस्करी और वसूली जैसे कामों को अंजाम देने लगा था। साथ ही वो कार ट्रेडर भी बन गया था। अनीस और दाऊद उसके काम से खुश थे। गैंग में उसकी तूती बोलने लगी थी।

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बॉलीवुड और बिल्डरों से वसूली

अबू सलेम के काम से खुश होकर डी कंपनी ने जल्द ही उसे अहम काम सौंप दिया। वो काम था बॉलीवुड और बिल्डरों से वसूली करने का। सलेम ने इस काम को बाखूबी अंजाम दिया। उसने बॉलीवुड सितारों, निर्माताओं के साथ-साथ बिल्डरों से जमकर वसूली करना शुरू कर दिया। पैसा वसूल करने के लिए उसने हर तरकीब अपनाई। धमकी देना, गोलीबारी करना और यहां तक कि किसी की जान लेना उसके लिए खेल बन गया। उसका आतंक मायानगरी में इस कदर बढ़ गया कि बॉलीवुड का हर छोटा बड़ा आर्टिस्ट और फिल्म निर्माता अबू सलेम उर्फ कैप्टन के नाम से ही कांपने लगा था।

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