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सिगरेट से ज्याद खतरनाक है दिल्ली का पॉल्यूशन: रिपोर्ट

दिल्ली के सबसे पॉश कहे जाने वाले इलाकों में हवा का स्तर निम्न दर्जे तक पहुंच गया है।

सिगरेट से ज्याद खतरनाक है दिल्ली का पॉल्यूशन: रिपोर्ट
नई दिल्ली. इस बार दिवाली और सर्दी का मौसम आने से पहले ही दिल्ली में पॉल्यूशन का ग्राफ बढ़ता जा रहा है। दिल्लीवासियों ने गुरुवार को बेहद खराब गुणवत्ता की हवा में सांस ली। कुछ स्थानों पर प्रदूषित हवा का स्तर सुरक्षित सीमा से नौ गुणा ज्यादा था। वहीं अधिकारियों ने चेताया कि आगे गंभीर रूप से प्रदूषित समय आने को है। शहर के बहुत अधिक प्रदूषित आनंद विहार में पीएम 10 (सस्पेंडिड पार्टिकूलेट मैटर) दोपहर दो बजे प्रति क्यूबिक मीटर 962 मोइक्रोग्राम से ज्यादा था, जबकि इसकी सुरक्षित सीमा 100 है।
लेकिन उससे पहले ही दिल्ली की हवाएं बेहद प्रदूषित हैं। लोधी रोड में तो हवा का स्तर निम्न दर्जे तक पहुंच गया है। दिल्ली के मौसम विभाग के बाहर स्क्रीन के जरिए एयर क्वालिटी इंडेक्स को दर्शाया जा रहा है जिसमें साफ देखा जा सकता है कि किस तरह से यहां की हवा प्रदूषित बनी हुई। यहां पीएम 2.5 का स्तर 266 तक पहुंच गया है। यह हाल तब है जब लोधी रोड में हैवी कमर्शियल गाड़ियां प्रतिबंधित है और यहां बड़ी तादाद में हरियाली है।
सेंटर फॉर सांइस एंड एन्वायरमेंट (सीएसई) के विशेषज्ञ विवेक चट्टोपाध्याय ने कहा, 'दिल्ली की सड़कों पर यातायात का दबाव है, इसके साथ ही कचरा भी जलाया जा रहा। अब समय आ गया है कि सरकार बदरपुर संयंत्रों जैसे दिल्ली में कोयला आधारित बिजली संयंत्रों पर निगरानी रखे। यह स्थिति दीवाली से कुछ दिन पहले की है। दिवाली में स्थिति और बदतर हो सकती है। आंकड़े दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) ने तत्काल समय में वायु गुणवत्ता की निगरानी के दौरान दर्ज किए हैं। इसका एक्यूआई (वायु गुणवत्ता सूचकांक) पूरे दिन गंभीर बना रहा और कई बिंदुओं पर 500 के स्तर (अधिकतम सीमा) तक पहुंच गया। वहीं पीएम 2.5 अपनी नियत सीमा से कई गुणा ज्यादा था। पीएम 2.5 महीन और घातक प्रदूषक होते हैं।
बता दें कि मंदिर मार्ग और आरके पुरम जैसे रिहायशी इलाकों का एक्यूआई, सीपीसीबी के निगरानी केंद्रों के मुताबिक गंभीर श्रेणी में रहा। गंभीर एक्यूआई होने से लोगों की सेहत प्रभावित हो सकती है और यह उन लोगों की सेहत पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है जो पहले से बीमार हैं। ये श्वसनीय प्रदूषक न केवल श्वसन प्रणाली को नुकसान पहुंचाता है बल्कि रक्तधारा में भी पहुंच जाता है।
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