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प्रेसिडेंट कोविंद ने जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस दिनेश महेश्वरी को सुप्रीम कोर्ट का जज नियुक्त किया

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने दिल्ली हाईकोर्ट के जज जस्टिस संजीव खन्ना को सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीश नियुक्त किया है। जस्टिस संजीव खन्ना हाल ही में अपना कार्यभार ग्रहण कर सकते हैं।

प्रेसिडेंट कोविंद ने जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस दिनेश महेश्वरी को सुप्रीम कोर्ट का जज नियुक्त किया
कोलेजियम (Collegium) की शिफारिश पर आखिरकार राष्ट्रपति ने अपनी मुहर लगा दी है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (Ram Nath Kovind) ने दिल्ली हाईकोर्ट के जज जस्टिस संजीव खन्ना (Sanjiv Khanna) और कर्नाटक हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस दिनेश महेश्वरी (Dinesh Maheshwari) को सुप्रीम कोर्ट में जज नियुक्त किया है।
कोलेजियम (Collegium) ने दोनों जजों के नाम की जब शिफारिश की तो काफी बवाल मचा। न्यायिक व्यवस्था से जुड़े लोगों ने भी दोनों जजों के नाम पर ऐतराज जताया। दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व जज कैलाश गंभीर ने इस संबंध में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को चिट्ठी लिखकर कॉलिजियम के फैसले पर आपत्ति जताई। उनका कहना था कि कोलिजियम द्वारा लिया गया फैसला अनुचित है।
इस मामले में राष्ट्रपति को दखल देना चाहिए। लेकिन बुधवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने दोनों जजों के नाम पर अपनी सहमति जता दी। उन्होंने दोनों जजों को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया है।

क्या था मामला

  • सुप्रीम कोर्ट की कॉलिजियम ने राजस्थान हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस प्रदीप नंद्राजोग और दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस राजेंद्र मेनन को सुप्रीम कोर्ट का जज बनाने के लिए सिफारिश की।
  • 5 से 6 जनवरी को कॉलिजियम ने अपने ही फैसले को पलट दिया। और दोनों जजों का नाम वापस ले लिया। इसके बाद कॉलिजियम ने कर्नाटक हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस दिनेश महेश्वरी और दिल्ली हाईकोर्ट के जज संजीव खन्ना के नाम की सिफारिश की।
  • सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संजय कौल ने इस संबंध में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई को चिट्ठी लिखी।
  • दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व जज कैलाश गंभीर ने इस मामले को लेकर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को चिट्ठी लिख कर कॉलिजियम की सिफारिश पर ऐतराज जताया।
  • कॉलिजियम के फैसले से कई जज नाराज हैं। उनका कहना है कि इस मामले में किसी की व्यक्तिगत पसंद और नपसंद को तरजीह नहीं दी जा सकती।
  • कॉलिजियम में सीजेआई रंजन गोगोई के अतिरिक्त जस्टिस मदन बी लोकुर, जस्टिस एके सीकरी, जस्टिस एस ए बोबड़े और जस्टिस एन वी रमन्ना शामिल थे।
  • कॉलिजियम ने नंद्राजोग और राजेंद्र मेमन के नाम पर हरी झंडी दी और फैसले पर इन सभी जजों ने दस्तखत भी किए।
  • बताया जा रहा है कि इस फैसले की खबर मीडिया में आ गई जिसके बाद चीफ जस्टिस काफी नाराज हुए। उन्होंने 5 और 6 जनवरी को इस मामले में पुनर्विचार के लिए बैठक बुलाई।
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