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रक्षा सौदों में घूसखोरी को लेकर लगेगा अंशीय प्रतिबंध, दिशानिर्देंश तैयार

इस मामले पर रक्षा मंत्रालय अलग से नीति लेकर आएगा।

रक्षा सौदों में घूसखोरी को लेकर लगेगा अंशीय प्रतिबंध, दिशानिर्देंश तैयार
नई दिल्ली. रक्षा सौदों में रिश्वतखोरी के मामलों में शामिल कंपनी पर अंशीय प्रतिबंध लगाया जाएगा। इसके लिए रक्षा मंत्रालय ने ‘कालीसूची’ को लेकर अलग से दिशानिर्देंश तैयार कर लिए हैं। आगामी नवंबर महीने में होने वाली रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) की पहली बैठक में इन्हे अंतिम स्वीकृति के लिए रखा जाएगा। इसके बाद इस मामले पर रक्षा मंत्रालय अलग से नीति लेकर आएगा।
मामला दर मामला होगी पड़ताल
रक्षा मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि सेनाओं की सामरिक ताकत में इजाफा करने के लिए जिन अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के साथ सौदे किए जाते हैं। उनमें से जिस मामले में घूसखोरी की बात सामने आएगी उसे लेकर जांच की जाएगी। लेकिन देश में जारी कंपनी की बाकी भागीदारी इससे प्रभावित नहीं होगी। इसके पीछे तर्क यह है कि किसी भी रक्षा सौदे को मंजूरी दिलाते वक्त रिश्वतखोरी के आरोपों के चलते अगर किसी कंपनी पर पूर्णत: प्रतिबंध लगा दिया गया तो उसके साथ चल रही अन्य परियोजनाएं भी ठप पड़ जाएंगी। इससे देश के राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े हितों पर आंच आएगी। साथ ही राष्ट्रीय सुरक्षा का काम भी प्रभावित होगा। इसलिए मंत्रालय मामला दर मामला विषयों की पड़ताल करेगा और उसके बाद निर्णय लेगा।
राष्ट्रीय सुरक्षा के तहत मिलेगी छूट
रक्षा सौदों में भ्रष्टाचार से जुड़े किसी भी मामले में कंपनी को छूट राष्ट्रीय सुरक्षा के हित को ध्यान में रखकर दी जाएगी। उदाहरण के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा को देखते हुए अगर कोई समझौता किया जाना बेहद जरूरी है तो उसे ग्रीन सिग्नल दिया जाएगा। दिशानिर्देशों में सौदों में मध्यस्थ की भूमिका भी तय की जा सकती है। गौरतलब है कि बीते कुछ दिन पहले रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने नौसैन्य कमांडरों के सम्मेलन से इतर कहा था कि इस मामले को लेकर मंत्रालय ने दिशानिर्देंश तैयार किए हैं। एक बार सभी ने मिलकर इसपर चर्चा भी की है। डीएसी की अगले महीने होने वाली बैठक में इसे अंतिम मंजूरी दी जाएगी। मौजूदा दौर में वीवीआईपी हेलिकॉप्टर से लेकर एंब्रेयर विमान सौदे जैसे कई मामले हैं, जिनमें सौदे में रिश्वतखोरी की बात सामने आयी है। लेकिन इन तमाम कंपनियों को कालीसूची में डालने को लेकर कोई निर्णय नहीं हुआ है।
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