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गोला-बारूद में कमी के कारण 13 अफसरों पर गिरी गाज

सेना के पास लड़ने के लिए 20 दिन का असला बारूद भी मौजूद नहीं है।

गोला-बारूद में कमी के कारण 13 अफसरों पर गिरी गाज

सेना के पुनर्गठन के कैबिनेट के अहम फैसले के अगले दिन गुरुवार को रक्षा मंत्रालय द्वारा लिए गए दूसरे बड़े निर्णय में अच्छा प्रदर्शन न करने वाले आयुध फैक्ट्रियों के 13 अधिकारियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया। यह सभी अधिकारी केंद्रीय सेवा के तौर पर जानी जाने वाली इंडियन आर्डिनेंस फैक्ट्रीज सर्विस (आईओएफएस) के ग्रुप ‘ए’ श्रेणी से जुड़े हुए हैं।

ओएफबी के खराब प्रदर्शन को लेकर रक्षा मामलों की संसदीय समिति के अलावा हालिया आई कैग रिपोर्ट में भी तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा गया था कि दुश्मन के साथ युद्ध की स्थिति में सेनाओं के पास लड़ने के लिए 20 दिन का असला बारूद भी मौजूद नहीं है।

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ओएफबी सेनाओं की आवश्यकता के हिसाब से जरूरी हथियार व गोलाबारूद की सप्लाई समय पर करने में विफल साबित हो रही हैं। संसदीय समिति ने अपनी एक बैठक में ओएफबी को ‘सफेद हाथी’ की संज्ञा तक दे डाली थी। इसके बाद ही मंत्रालय ने इनके कामकाज को सुधारने के लिए उसकी समीक्षा करने का निर्णय लिया है।

इन पदों पर हैं अधिकारी

उधर रक्षा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इनमें से 12 अधिकारी डायरेक्टर के पद पर और शेष 1 अधिकारी संयुक्त सचिव के पद पर कार्यरत हैं।

तीन महीने का नोटिस, पेंशन लाभ मिलेंगे

ओएफबी के प्रवक्ता दीपक श्रीवास्तव ने हरिभूमि से बातचीत में कहा कि इन 13 अधिकारियों की सेवानिवृति विभाग के नियमों के हिसाब से की गई है। जिसमें 50 की उम्र पर पहुंच चुके अच्छा प्रदर्शन न करने वाले अधिकारियों की कार्य समीक्षा करने का अधिकार विभाग के पास है।

इसी के हिसाब से यह निर्णय लिया गया है, लेकिन बाहर किए गए अधिकारियों के तैनाती स्थल व भविष्य में ओएफबी के अन्य अधिकारियों, कर्मचारियों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई किए जाने से संबंधित प्रश्न के बारे में उन्होंने कोई जानकारी होने से साफ इंकार कर दिया।

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विभाग की ओर से अब इन्हें तीन महीने का नोटिस दिया जाएगा और सेवानिवृति के बाद इनके पेंशन संबंधी तमाम लाभ जारी रहेंगे। केंद्रीय सेवा में सेवानिवृति की अधिकतम आयुसीमा 60 वर्ष है।

ओएफबी के नियम का सार

आंकड़ों के हिसाब से अभी देश में कुल 39 ओएफबी हैं। जिनमें कुल 1 लाख लोग काम करते हैं। इनमें से 1 हजार 718 ग्रूप ‘ए’ के अधिकारी हैं। 50 वर्ष की आयु के बाद इस सेवा में अधिकारी के प्रदर्शन की समीक्षा की जाती है। मंत्रालय द्वारा यह निर्णय सेंट्रल सिविल सर्विस (पेंशन) के नियम 1972 में धारा 56 (जे) और नियम 48 (1)(बी) को ध्यान में रखकर लिया गया है।

इसमें सेवा काल पूरा होने से पहले भी संतोषजनक प्रदर्शन न करने वाले अधिकारियों को सेवानिवृत किए जाने का प्रावधान मौजूद है। इसी तर्ज पर हाल ही में कुछ आईपीएस और इकनम टैक्स विभाग के अधिकारियों को भी केंद्र सरकार की तरफ से बाहर का रास्ता दिखाया गया है।

संकेत के बावजूद नहीं संभले

इस कार्रवाई से पहले सरकार की ओर से ओएफबी को अपनी कार्यक्षमता बढ़ाने व सैन्य उपकरणों की सप्लाई समयसीमा के भीतर करने के लिए कई बार संकेत भी दिए गए थे। इसके अलावा कई सुधारात्मक कदम भी उठाए गए लेकिन जब इनसे कोई बात नहीं बनी तो अंत में मंत्रालय की तरफ से असंतोषजनक प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों की छुट्टी कर दी गई।

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