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डेबिट साइबर अटैक के पीछे पाक का हाथ, जारी हुआ था अलर्ट

7 हजार बार किया गया था बैंकोंं के साइबर नेटवर्क पर अटैक

डेबिट साइबर अटैक के पीछे पाक का हाथ, जारी हुआ था अलर्ट
नई दिल्ली. देश पर होने वाले साइबर हमलों पर नजर रखने वाली भारत सरकार की सर्वोच्च निगरानी एजेंसी कम्प्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम-इंडिया (CERT-In) ने देश के सभी बड़े बैंकों को यह चेतावनी जारी की थी कि उन पर पाकिस्तान की तरफ से साइबर अटैक हो सकता है। लेकिन बैंकों ने इस चेतावनी को गंभीरता से नहीं लिया। आपको बता दें कि यह एजेंसी बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों को वक्त-वक्त पर संभावित साइबर खतरों के बारे में अडवाइजरी जारी करती है।
इकोनॉमिक्स टाइम्स को इसी संस्था के एक बड़े अधिकारी ने यह जानकारी दी है कि हमने बैंकों को इस साल जुलाई और अगस्त में भी अलर्ट जारी किया था। हमारा आखिरी अलर्ट इसी साल 7 अक्टूबर को जारी हुआ था। इस अलर्ट में हमने बैंको को चेताया था कि पाकिस्तान की तरफ से बैंकों के नेटवर्क पर साइबर अटैक हो सकता है। यह अलर्ट जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकी हमलों के बाद सीमा पर भारत के जवाबी हमले के मद्देनजर जारी की गई। इस अडवाइजरी के जारी होने से एक महीने पहले सितंबर की शुरुआत में ही बैकों को साइबर सुरक्षा में सेंध से जुड़ी शिकायतें मिलने लगी थीं।
वहीं, सीमा पर भारत के जवाबी हमले के बाद पाकिस्तानी हैकर्स द्वारा विभिन्न भारतीय वेबसाइट्स को निशाना बनाया गया। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, ऐसे 7 हजार हमले पाकिस्तानी हैकर्स ने अंजाम दिए।
इस सेंध की वजह से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले बैंकों में एसबीआइ, एचडीएफसी, आइसीआइसीआइ, यस और एक्सिस बैंक शामिल हैं। सभी का कहना है कि उनका सिस्टम दुरुस्त है और प्रभावित कार्ड्स का इस्तेमाल शायद उन एटीएम पर हुआ जो संबंधित बैंकों के नेटवर्क के बाहर के थे।
32 लाख कार्ड्स की जानकारी में सेंध लगने की आशंका की खबर मीडिया में आने के बाद CERT-In और द नैशनल क्रिटिकल इन्फर्मेशन इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोटेक्शन सेंटर (NCIIPC) ने एसबीआइ, एक्सिस और एचडीएफसी को ईमेल भेजकर कहा था कि वे इस मामले में औपचारिक शिकायत दर्ज कराएं। हालांकि, बैंकों की ओर से कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई गई। अफसरों का कहना है कि बैंकों द्वारा इस मामले को रिपोर्ट न करना भी नियमों का उल्लंघन है।
7 हजार बार किया गया वेबसाइटों पर अटैक
ऑडिट एंड कंसलटेंसी फर्म पीडब्ल्यूसी के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर शिवराम कृष्णन ने बताया कि भारत के सर्जिकल स्ट्राइक के बाद पाकिस्तानी हैकर्सों ने सात हजार बार वेबसाइटों पर अटैक किए। उन्होंने कहा, 'जून 2016 में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने बैंकों को अडवाइजरी जारी करके सिक्यॉरिटी ऑपरेशंस सेंटर बनाने को कहा था। कितने बैंकों ने ऐसा किया या कितने ऐसे हैं जो कायदे से निगरानी करते हैं? लोग अपना पैसा बैंकों को देते हैं, किसी थर्ड पार्टी हिटाजी पेमेंट सिस्टम्स को नहीं। हम किस तरह का संदेश दुनिया को दे रहे हैं?'
हालांकि, एटीएम और पॉइंट ऑफ सेल सर्विसेज देने वाली कंपनी हिटाची सिस्टम ने इस बात से इनकार किया कि मैलवेयर इन्फेक्शन उनके सर्वर से पनपा है। कृष्णन ने यह भी कहा कि भारत साइबर सुरक्षा पर पर्याप्त पैसा नहीं खर्च कर रहा।
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