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डब्ल्यूईएफ से भारत का वैश्विक विकास का मंत्र, पीएम मोदी ने बताई ये तीन वैश्विक समस्या

दावोस में विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने उद्घाटन भाषण के जरिये दुनिया के सामने भारत का वैश्विक दृष्टिकोण रखा, विश्व के समक्ष मौजूद चुनौतियां रखीं, सभी देशों से मिलकर समावेशी विकास की ओर अग्रसर होने का आह्वान किया और वैश्वीकरण व उदारीकरण की सुस्त पड़ी गति को तीव्र करने पर जोर दिया।

डब्ल्यूईएफ से भारत का वैश्विक विकास का मंत्र, पीएम मोदी ने बताई ये तीन वैश्विक समस्या

दावोस में विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने उद्घाटन भाषण के जरिये दुनिया के सामने भारत का वैश्विक दृष्टिकोण रखा, विश्व के समक्ष मौजूद चुनौतियां रखीं, सभी देशों से मिलकर समावेशी विकास की ओर अग्रसर होने का आह्वान किया और वैश्वीकरण व उदारीकरण की सुस्त पड़ी गति को तीव्र करने पर जोर दिया।

पीएम ने पूरी समग्रता से विश्व के प्रति भारत की सोच, विश्व में भारत की भूमिका और विश्व से भारत की अपेक्षा के साथ-साथ वैश्विक विकास की दशा व दिशा को रेखांकित किया। पीएम के इस संबोधन में भारत की वैश्विक नेतृत्व की क्षमता और आकांक्षा स्पष्टता से परिलक्षित हुई। जिस तरह 1997 के पश्चात लंबे अर्से के बाद कोई भारतीय पीएम ने विश्व आर्थिक मंच के सम्मेलन में शिरकत की और भारत को उद्घाटन का अवसर प्राप्त हुआ,

ठीक उसी आशा के अनुरूप मोदी ने अपने सारगर्भित संबोधन से डब्ल्यूईएफ की उपलब्धियों, उपयोगिताओं, उद्येश्यों व बदले वैश्विक माहौल में चुनौतियों पर प्रकाश डाला। इस बार सम्मेलन की थीम भी है बंटे हुए विश्व में साझा भविष्य का निर्माण। मोदी ने अपने भाषण को भी इस थीम पर केंद्रित रहा। भारत विश्व में शांति चाहता है और वह चाहता है कि विश्व के सभी देश मिलकर सहयोग के साथ सामूहिक प्रगति के लिए काम करे।

विश्व अपने निहित स्वार्थ के चलते बंटा हुआ नहीं रहे। अगर सभी देश मिलकर काम करे तो विश्व में शांति और सौहार्द स्थापित हो सकता है और वह प्रगति कर सकता है। पीएम ने विश्व के सामने मौजूद तीन प्रमुख चुनौतियों का जिक्र किया- जलवायु परिर्वतन, आतंकवाद और दुनिया का आत्मकेंद्रित होना। उन्होंने कहा कि ग्लेशियर पीछे हटते जा रहे है, आकर्टिक की बर्फ पिघलती जा रही है। बहुत गर्मी, बेहद बारिश, बहुत ठंड। आज मानव और प्रकृति की जंग क्यों है?

दूसरे की संपत्ति का लालच क्यों है? हमें चुनौतियों के खिलाफ एकजुट होना होगा। भारत के दर्शन में इस समस्या का हल है। यदि हम प्रकृति और विकास के बीच संतुलन रखें तो जलवायु परिवर्तन की समस्या का समाधान कर सकते हैं। भगवान बुद्ध के उपदेश में भी इस समस्या का हल है। आज आतंकवाद से समूचा विश्व चिंतित है।

बिना नाम लिए पीएम ने पाकिस्तान पर हमला किया। कहा कि आतंकवाद से ज्यादा खतरनाक है अच्छा आतंकवाद और बुरा आतंकवाद का भेद करना। आतंकवाद गंभीर वैश्विक खतरा है। पढ़े-लिखे युवाओं का आतंक के प्रति आकर्षित होना दुनिया के लिए चिंता की बात है। समूचे विश्व को मिलकर आतंकवाद की चुनौती का सामना करना होगा।

पीएम ने विश्व के अनेक देशों के आत्म केंद्रित होते जाने का जिक्र किया। इससे ग्लोब्लाइजेशन नाम के विपरीत सिकुड़ता जा रहा है। उन्होंने वैश्वीकरण को तेज करने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र की कमजोर होती भूमिका की तरफ भी इशारा किया। दूसरे विश्व युद्ध के बाद बने संगठनों की संरचना क्या आज के मानव की आकांक्षाओं को परिलिक्षित करते हैं?

पीएम ने भारत में हुए आर्थिक सुधारों से दुनिया को अवगत कराया। विश्व में भारत की बढ़ी रेटिंग के बारे में बताया। उन्होंने सबसे उदार अर्थव्यवस्था का हवाला देते हुए दुनिया के निवेशकों से भारत में निवेश का आह्वान किया। कहा कि समृद्धि के साथ शांति चाहिए तो भारत आइए। डाटा नियंत्रण की आवश्यकता पर जोर दिया।

प्रधानमंत्री ने जता दिया कि बदले हुए विश्व में भारत नेतृत्वकारी भूमिका निभाने के लिए तैयार है। विश्व में शांति और प्रगति के लिए भारतीय दर्शन, दृष्टि और सबके विकास की अवधारणा को विश्व को अपनाना होगा। विश्व आर्थिक मंच अगर विश्व के समग्र विकास के लिए भारत के समावेशी दृष्टिकोण को आत्मसात करता है तो इस सम्मेलन की सफलता मानी जाएगी। विश्व में एक बार फिर भारत का डंका बजा है।

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