Hari bhoomi hindi news chhattisgarh
Breaking

घर में रोशनी आने से पहले ही चली गई आंखों की रोशनी

मोतियाबिंद की बीमारी के कारण जानकी देवी की नेत्रदृष्टि बिजली की रोशनी देखने से पहले ही खो गई।

घर में रोशनी आने से पहले ही चली गई आंखों की रोशनी
बदायूं. उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले की जानकी देवी का सपना था कि वह उनके घर में बिजली (इलेक्ट्रिसिटी) आएं और उससे उनका घर रोशन हो, लेकिन उनका यह सपना पूरा होने से पहले ही जानकी देवी की आंखों की रोशनी चली गई।
बदायूं जिले के दारा नगर गांव में 85 वर्षीय जानकी देवी नगर ने बताया कि उन्होंने अपनी जिंदगी में अब तक सिर्फ दो बार् ही बिजली देखी है। उनके गांव को बिजली से रोशन होने में वर्षों बीत गए लेकिन सरकार ने उन्हें बिजली मुहैया नहीं करवाई।
जानकी देवी का कहना है कि, "जब सरकार द्वारा बिजली के पोल बनवाने का काम चल रहा था तब मैंने सोचा की जल्द ही हमारा घर भी बिजली की रोशनी से जगमाएगा। लेकिन सरकार की इन योजनाओं को अधूरा पड़े इतने साल हो गए कि अब जानकी देवी की आँखों की रौशनी भी जा चुकी है। मोतियाबिंद की बीमारी के कारण जानकी देवी की नेत्रदृष्टि बिजली की रौशनी देखने से पहले ही खो गई है।
बदायूं के इस गांव में सरकार द्वारा बजली उपलब्ध करवाने का इन्तजार करते-करते गांव वालों ने डीजल जनरेटर की व्यवस्था शुरू कर ली थी। जिसके लिए उन्हें रोजाना सौ रुपिए खर्च करने पड़ते थे।
स्थानीय लोगों का कहना है कि, "सरकारी योजनाएं बस कागजों पर दिखती है, हकीकत में यह खोखली निकलती हैं, इन्हें बस बढा-चढ़ाकर दिखाया जाता है। सरकार द्वारा पूरे गांव को बिजली सप्लाई देने के लिए गांव में जगह-जगह पोल गाड़े गए थें। लेकिन इन सभी पोल पर बिजली सप्लाई बहुत समय बाद दी गई थी।"
करनपुर गांव में भी बिजली आपूर्ति के हालात बहुत बदतर है जहां लोग बिजली आपूर्ति बहुत कम होने से परेशान हैं। तो वही ट्रांसफार्मर ख़राब होने पर बिजली विभाग के अधिकारी किसी मैकैनिक को भी भेजने से इनकार कर दते हैं।
गांव के मुखिया कुमार रंजीत सिंह का कहना है कि, "गांव में अब बिजली की कटौती से सभी दो-चार हैं। इसलिए गांव के लोग अपने खर्चे पर ही ट्रांसफार्मर ठीक करवाते हैं। और जेनेरेटर की सुविधा रखते हैं।
गौरतलब है कि बीजेपी सरकार 2019 तक सभी गांवों में बिजली पहुंचाने की योजना बना रही है। वहीं कुछ गांवों में अभी तक बिजली के पोल तक अधूरे पड़े हैं। इन पोल को करीब 1995 में शुरू किया गया था और आज तक इन पर बिजली सप्लाई की व्यवस्था शुरू नहीं हो पाई है।
गांवों को बिजली से रोशन करने के लिए सरकार को जमीनी स्तर से शुरुआत करनी होगी। हालांकि उत्तर-प्रदेश में हमेशा ही बिजली व्यवस्था अपने खस्ताहाल में ही रही है।

खबरों की अपडेट पाने के लिए लाइक करें हमारे इस फेसबुक पेज को फेसबुक हरिभूमि, हमें फॉलो करें ट्विटर और पिंटरेस्‍ट पर-

Next Story
Share it
Top