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नोटबंदी: आतंकी हुए पस्त, आम कश्मीरियों की भी टूटी कमर

सरकार के इस फैसले ने आम आदमी को मुश्किल में डाल दिया है।

नोटबंदी: आतंकी हुए पस्त, आम कश्मीरियों की भी टूटी कमर
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नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नोटबंदी के ऐलान का जितना प्रभाव देश के बाकी राज्यों में देखने को मिल रहा है। उससे कहीं ज्यादा इससे जम्मू-कश्मीर प्रभावित हुआ है। क्योंकि जुलाई महीने के पहले सप्ताह में आतंकी बुरहान वानी की मौत के बाद से सूबे में तनाव था ही कि अब 500 और 1000 के नोटों पर लगी पाबंदी ने रही-सही कसर निकाल दी है। यह कहना है राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के आनुषांगिक संगठन मुस्लिम राष्ट्रीय मंच (एमआरएम) का। एमआरएम के राष्ट्रीय संयोजक मोहम्मद अफजल ने बीते 10 से 15 नवंबर के बीच कश्मीर घाटी का व्यापक दौरा कर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की है, जिसमें इस तथ्य का भी उल्लेख किया है। अब वो इस रिपोर्ट को जल्द ही संघ मुख्यालय और गृह मंत्रालय को सौंपेंगे। हरिभूमि से खास बातचीत में मोहम्मद अफजाल ने अपनी इस रिपोर्ट के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
नोटबंदी का जम्मू-कश्मीर पर क्या प्रभाव पड़ा है?
मैंने अपने दौरे में राज्य के तमाम महत्वपूर्ण इलाकों का दौरा किया। इसमें अनंतनाग, शोपियां, पुलवामा, तंगधार, कुपवाड़ा, हड़वाड़ा, बांदीपुरा, चौकीबल, कुलगाम, गांदरबल, सोपोर शामिल हैं। इन जगहों पर नोटबंदी को लेकर लोगों में गुस्सा है। अपने आक्रोश में आम कश्मीरी कहता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नोटों पर अचानक पाबंदी लगाने से हमारे सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। पहले से ही घाटी में बीते 6 महीने से तनाव पसरा था, गरीब के पास कोई काम नहीं था और अब इस फैसले ने भी हमें मुश्किल में डाल दिया है।
आजादी के सवाल पर आम कश्मीरी नागरिक क्या सोचता है?
मैंने कश्मीर के जितने इलाकों का दौरा किया। वहां की आधे से अधिक यानि 50 फीसदी आबादी का कहना है कि वो भारत के साथ रहना चाहते हैं। लेकिन उन्हें ऐसा लगता है कि वर्तमान में केंद्र की सत्ता पर काबिज मोदी सरकार धारा 370 को समाप्त करना चाहती है। हम चाहते हैं कि धारा 370 को बरकरार रखा जाए। इससे इतर करीब 20 फीसदी लोगों की राय है कि वो भारत से आजादी चाहते हैं।
केंद्र और राज्य सरकारों के रवैये को लेकर कैसी प्रतिक्रिया मिली?
यहां अब भी हड़ताल जारी है। कुछ जगहों पर शाम चार बजे के बाद यह खुलती है। स्थानीय लोग राज्य की महबूबा मुफ्ती सरकार से जितना खफा है, उतना उनके मन में केंद्र सरकार के प्रति नाराजगी नहीं है। लोग कहते हैं कि राज्य के चुनाव से पहले महबूबा जिन आतंकियों के फोटो लेकर चुनाव में प्रचार कर रही थी। आज उनका ही विरोध कर रही हैं। यह एक प्रकार का विश्वासघात है। मुफ्ती की सरकार हट जाए तो मोदी की सरकार इंडिया से सीधे राज्य का प्रशासन चलाएगी। तभी हालात सामान्य हो सकते हैं।
कश्मीर में शिक्षा को लेकर कैसे हालात हैं?
शिक्षा के मामले में ज्यादा दिक्कत दक्षिण-कश्मीर में है। यहां स्कूल बंद हैं। लोगों में गुस्सा है। शुक्रवार को जुम्मे की नमाज के बाद यहां पत्थरबाजी होती है। दो दिन पहले ही यहां एक स्कूल को तोड़ा गया है। अपनी यात्रा में मैं कुकरनाग गया था। यह वो जगह है जहां हिजबुल मुजाहिद्दीन के युवा कमांडर आतंकी बुरहान वानी को सेना ने एनकाउंटर में मार गिराया था। इसके अलावा सुम्बल, जोरावाड़ी में कुछ स्कूल खुलने शुरू हुए हैं। इसके अलावा कश्मीर यूनिवर्सिटी और वहां की केंद्रीय यूनिवर्सिटी का भी मैंने दौरा किया। जिसमें देखने को मिला कि इक्का-दुक्का बच्चे ही पढ़ने के लिए आ रहे हैं।
बुरहान वानी की मौत पर कश्मीर से कैसी प्रतिक्रिया मिली?
कश्मीर में कुछ जगहों पर वानी को एक शहीद की तरह से देखा जाता है। इस तरह के लोगों के लिए यहां कहीं-कहीं पर अलग से कब्रिस्तान भी बनाए गए हैं। उनपर ऊर्दू में लिखा है शहीदों की कब्रगाह। लोग कहते हैं कि ये हमारे ही तो बच्चे हैं। मुझे लगता है कि इन लोगों को काउंसलिंग की जरूरत है।
आम जनजीवन को पटरी पर लौटने में कितना समय लगेगा?
धीरे-धीरे आम जनजीवन पटरी पर लौटता हुआ नजर आ रहा है। अब पहले के मुकाबले यहां गाड़ियां, टैक्सियां चल रही हैं। मेडिकल स्टोर, अस्पताल खुल रहे हैं। सब्जी और फल वाले बैठ रहे हैं। लेकिन इसके बीच ज्यादा समस्या शोपियां और पुलवामा की है। यह इलाका अलगाववादियों का गढ़ है। यहां लोगों ने अपने घरों पर रंग के जरिए पाकिस्तान के झंड़े की आकृति बनायी हुई है। पथराव जारी है।
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