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सरहद पर तनाव के कारण टल गई ये शादी, जानिए क्या है कारण

पुलवामा आतंकी हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव का असर यहां होने वाली एक शादी पर भी पड़ा है। बाड़मेर के महेंद्र और सिंध (पाकिस्तान) की छगन कंवर की शादी अब तय कार्यक्रम पर नहीं होगी। शादी फिलहाल टाल दी गई है।

सरहद पर तनाव के कारण टल गई ये शादी, जानिए क्या है कारण
पुलवामा आतंकी हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव का असर यहां होने वाली एक शादी पर भी पड़ा है। बाड़मेर के महेंद्र और सिंध (पाकिस्तान) की छगन कंवर की शादी अब तय कार्यक्रम पर नहीं होगी। शादी फिलहाल टाल दी गई है।
बाड़मेर के खेजड़ का पार निवासी महेन्‍द्र सिंह की शादी की तैयारियां पिछले एक महीने से चल रही थीं। रस्‍म अदायगी के साथ ही आठ मार्च की शादी के लिए बारातियों को शादी के कार्ड भी बांटे जा चुके थे।
इतना ही नहीं, बाराती के रूप में पाकिस्‍तान जाने वालों का वीजा और थार एक्‍सप्रेस में टिकट भी बुक हो चुके थे। दो मार्च को थार एक्‍सप्रेस के जरिए बारात का रवाना होना तय था लेकिन ऐन वक्त पर सारे कार्यक्रम रद़द कर दिए गए।
भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव के हालात के कारण परिवार वालों ने शादी को टालना उचित समझा और टिकट रद्द करवाने के साथ ही सारी तैयारियां भी रोक दी गईं। महेन्‍द्र ने बताया कि दोनों देशों के बीच पैदा हुए हालात को देखते हुए परिवार ने शादी को टालना उचित समझा।
इस बारे में महेन्‍द्र के परिवार ने पाकिस्‍तान में छगन के परिवार वालों से बात की और वे भी इससे सहमत हुए। महेन्‍द्र ने बताया कि फिलहाल शादी टाल दी गयी है और परिवार हालात सामान्‍य होने का इंतजार कर रहा है।
जानकारी के मुताबिक, करीब तीन वर्ष पूर्व बाड़मेर के खेजड़ का पार निवासी 23 वर्षीय महेन्‍द्र सिंह की सगाई पाकिस्‍तान के सिंध प्रांत के सिणोई गांव की छगन कंवर के साथ तय हुई थी। दोनों परिवारों की आपसी सहमति से इस साल 8 मार्च को शादी होनी थी।
जनवरी में महेन्‍द्र सहित कुल छह बारातियों के लिए पाकिस्‍तान का तीन म‍हीने का वीजा भी मिल गया। दुल्‍हन के लिए कपड़े और जेवरात खरीदने के साथ ही शादी की तैयारियां भी शुरू कर दी गई थी, लेकिन दोनों देशों के बीच ताजा तनाव को देखते हुए ऐन मौके पर सब कुछ रोक दिया गया।
उल्लेखनीय है कि राजस्‍थान के इस इलाके के लोगों की सरहद पार पाकिस्‍तान में खूब रिश्‍तेदारियां हैं। यहां की कई बेटियों का ससुराल और बहुओं का मायका पाकिस्‍तान में है। ऐसे में दशकों के इंतजार के बाद जब दोनों देशों के बीच इस रास्‍ते थार एक्‍सप्रेस की शुरूआत हुई तो इन रिश्‍तों को एक नया जीवन मिल गया।
दोनों ओर के लोग अपने रिश्‍तेदारों से मिलने आने-जाने लगे। लोगों ने इस ट्रेन का नाम ही ‘रिश्‍तों की गाड़ी' रख दिया। थार एक्‍सप्रेस की शुरुआत के बाद से ही पाकिस्‍तान से कई बारातें भारत आई हैं, तो कई बार यहां से बारात पाकिस्‍तान गई हैं।
राजस्‍थान से सटी पाकिस्‍तान की सीमा पर भारत और पाकिस्‍तान दोनों देशों के बीच चलने वाली साप्‍ताहिक ट्रेन थार एक्‍सप्रेस को ‘रिश्‍तों की गाड़ी' के नाम से जाना जाता है। अपनी शुरूआत के बाद से ही इस ट्रेन ने दोनों देशों के बीच दशकों से बिछड़े लोगों को मिलाने का काम किया है, लेकिन यह पहला मौका था, जब ऐसा नहीं हो पाया।
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