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विश्व व्यापार समझौते में बाधा नहीं बनेगा भारत, देश के गरीबों को मिलेगी पूरी खाद्य सुरक्षा

एफएओ से विश्व व्यापार संगठन में गरीबों और किसानों के हितों की रक्षा करने में नेतृत्व करने का आह्वान किया।

विश्व व्यापार समझौते में बाधा नहीं बनेगा भारत, देश के गरीबों को मिलेगी पूरी खाद्य सुरक्षा
नई दिल्ली. खाद्य सब्सिडी के मुद्दे पर डब्ल्यूटीओ वार्ता में भारत पर अड़चन डालने के आरोपों के कुछ सप्ताह बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि भारत नियम आधारित वैश्विक व्यापार समझौते के रास्ते में आड़े नहीं आएगा लेकिन वह देश के गरीबों और किसानों के हितों और खाद्य सुरक्षा का बलिदान भी नहीं कर सकता है। प्रधानमंत्री ने उनसे मुलाकात करने आए खाद्य एवं कृषि संगठन के महानिदेशक डॉ. जोस ग्रैजियानो डा सिल्वा से कहा, ‘‘भारत नियम आधारित वैश्विक व्यापार समझौते के रास्ते में खड़ा नहीं हो सकता है, लेकिन भारत गरीबों और किसानों के हितों और खाद्य सुरक्षा का बलिदान नहीं दे सकता है।’’

सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार मोदी ने डा. सिल्वा को ब्राजील में ‘नो हंगर प्रोजेक्ट’ में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली शख्सियतों में से एक बताया और एफएओ से विश्व व्यापार संगठन में गरीबों और किसानों के हितों की रक्षा करने में नेतृत्व करने का आह्वान किया। जिनेवा में जुलाई में डब्ल्यूटीओ वार्ता में भारत ने खाद्य सब्सिडी के मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया था जिसे अमेरिका ने वार्ता की असफलता की वजह बताया था। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत भारतीय कृषि में आने वाली चुनौतियों से निपटने में एफएओ की सक्रिय भागीदारी की ओर देख रहा है।

उन्होंने खाद्य भंडारण में क्षमता बढ़ाने के लिए एफएओ के साथ साझेदारी की जरुरत पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों के जरिए एफएओ के प्रयासों के द्वारा लाई गई इस तरह की क्षमता का इस्तेमाल बहुत गरीब देशों की पोषण और खाद्य संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जा सकता है। प्रधानमंत्री ने भारत में महिलाओं को ध्यान में रखकर विशेष अभियान तैयार करने में एफएओ के सहयोग की बात कही, जो पोषण मूल्य और खाद्य आदतों को सुधारने का मार्ग बताएगा।

नीचे की स्लाइड्स में पढ़िए, खाद्य सुरक्षा के लिए सरकार का क्या प्रयास है-

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