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कलाम की प्रतिमा के साथ गीता रखने पर विवाद,कुरान और बाइबल भी रखे गए

पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम की पुण्यतिथि पर उनकी एक प्रतिमा का अनावरण के दौरान गीता रखने पर विवाद।

कलाम की प्रतिमा के साथ गीता रखने पर विवाद,कुरान और बाइबल भी रखे गए

बीते 27 जुलाई को रामेश्वरम में भारत के पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम की पुण्यतिथि पर उनकी एक प्रतिमा का अनावरण किया गया था। लेकिन इस प्रतिमा के आगे रखी भागवत गीता के रखे होने से विवाद शुरू हो गया।

दरअसल प्रधानमंत्री मोदी बीते गुरुवार को रामेश्वरम के पिकाराम्बू में अब्दुल कलाम की प्रतिमा का अनावरण किया था। लकड़ी से बनी इस प्रतिमा में कलाम को वीणा बजाते हुए दर्शया गया है।

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साथ ही इस प्रतिमा के आगे भगवत गीता को भी दिखाया गया है। जिसके बाद एमडीएमके के नेता वाइको ने वीणा बजाते हुए प्रतिमा और आगे भगवतगीता रखे जाने को लेकर केंद्र सरकार और बीजेपी पर आरोप लगाया।

डीएमके नेता ने आरोप लगाया कि बीजेपी कलाम को भगवा रंग में रंगने की कोशिश कर रही है। डीएमके नेता वाइको ने कहा कि प्रतिमा के साथ गीता के बजाय तमिल किताब 'थिरुकुरल' रखी जानी चहिए। मामला तूल पकड़ने के बाद विवाद को खत्म करने के लिए अब कुरान और बाइबल भी रख दी गई है।

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वहीं इस मामले पर कलाम के भतीजे शेख सलीम ने कहा कि इस मामले को लेकर अब विवाद नहीं है। क्योंकि प्रतिमा के सामने अब कुरान और बाइबल भी है। उन्होंने कहा कि कलाम को किसी धर्मं के साथ नहीं जोड़ा जा सकता है।
कलाम ने सभी धर्मों का गहराई से अध्ययन किया था। उनकी छवि को किसी मजहब से जोड़ना गलत है। वे पूरे देश के लिए आदर्श थे ऐसे में उनकी प्रतिमा को राजनीति से जोड़कर सवाल उठाना सही नहीं है।
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