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विरोधियों को 72 घंटे दे देता तो वे मेरी तारीफ करते- मोदी

हम 26 जनवरी को गर्व के साथ मनाते हैं लेकिन 26 नवंबर के बिना 26 जनवरी अधूरी है

विरोधियों को 72 घंटे दे देता तो वे मेरी तारीफ करते- मोदी
नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार (25 नवंबर) को संविधान दिवस के मौके पर दिल्ली में एक कार्यक्रम में पहुंचे। वहां उन्होंने दो किताबों का विमोचन किया। किताबों का नाम ‘New Version of Constitution of India’ और ‘Making of Constitution’ है। कार्यक्रम में पीएम मोदी ने कहा कि संविधान का मतलब बाबा साहेब अंबेडकर हैं।
मोदी ने कहा कि हम 26 जनवरी को गर्व के साथ मनाते हैं लेकिन 26 नवंबर के बिना 26 जनवरी अधूरी है। मोदी ने देश में डिजिटल करंसी के इस्तेमाल को बढ़ावा दिए जाने की बात कही। उन्होंने कहा, 'हर किसी का अपने पैसे पर हक है, लेकिन जरूरी नहीं कि हर बार नोट हाथ में हो। मोबाइल से भी पैसे जमा किए जा सकते हैं।' उन्होंने कहा कि देश का उज्जवल भविष्य देखने वालों से यही अपेक्षा है कि वे मुश्किलों को दूर करने में मदद करें। प्रधानमंत्री ने कहा, 'मैं देशवासियों से आग्रह करता हूं कि जिस देश के पास युवा ताकत है, जहां 100 करोड़ से ज्यादा मोबाइलधारक हैं, टेक्नॉलजी है...लोगों को इसके इस्तेमाल के लिए प्रेरित करें। जितनी सरलता से वॉट्सऐप का मेसेज फॉरवर्ड होता है, उतनी ही सरलता से मोबाइल से शॉपिंग कर सकते हैं।'
विपक्ष की ओर इशारा करते हुए मोदी ने कहा कि राजनीति के ऊपर भी समाज हित में कई काम करने होते हैं। इसके पहले प्रधानमंत्री ने कार्यक्रम में संविधान को लेकर भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि कुछ लोग संविधान के तहत मिले अधिकारों का दुरुपयोग करते हैं और आज देश सामने यह चुनौती है कि संविधान के माध्यम से कर्तव्य और अधिकार का संतुलन कैसे बिठाया जाए। मोदी ने कहा कि 26 जनवरी की अहमियत 26 नवंबर (संविधान दिवस) से जुड़ी हुई है। मोदी ने छात्रों के बीच एक दिन संविधान की पढ़ाई कराए जाने का सुझाव भी दिया।
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