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संविधान दिवस: पीएम मोदी ने भी मानी डॉ. आंबेडकर की इन 10 बातों को

संविधान दिवस पर पीएम मोदी ने कहा कि सभी के लिए समानता और सभी के प्रति संवेदनशीलता, हमारे संविधान की पहचान है जो ग़रीब, दलित, पिछड़े, वंचित, आदिवासी, महिला समेत सभी समूहों के मूलभूत अधिकारों की रक्षा करती है।

संविधान दिवस: पीएम मोदी ने भी मानी डॉ. आंबेडकर की इन 10 बातों को
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आज भारत का संविधान दिवस है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मानते हैं कि भारत के सभी लोगों की पहचान हमारे संविधान से ही है। समानता और सभी के प्रति संवेदनशीलता ही हमारे संविधान की पहचान है जो ग़रीब, दलित, पिछड़े, वंचित, आदिवासी, महिला समेत सभी समूहों के मूलभूत अधिकारों की रक्षा करती है और उनके हितों को सुरक्षित रखती है।

पीएम मोदी ने कहा कि आज, संविधान-दिवस के अवसर पर डॉ.बाबासाहेब आंबेडकर की याद आना तो बहुत स्वाभाविक है। मोदी ने कहा कि संविधान-सभा में महत्वपूर्ण विषयों पर 17 अलग-अलग समितियों का गठन हुआ था। इनमें से सर्वाधिक महत्वपूर्ण समितियों में से एक मसौदा समिति थी।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर, संविधान की उस मसौदा समिति के अध्यक्ष थे। एक बहुत बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका का वो निर्वाह कर रहे थे। आज हम भारत के जिस संविधान पर गौरव का अनुभव करते हैं, उसके निर्माण में बाबासाहेब आंबेडकर के कुशल नेतृत्व की अमिट छाप है।

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शक्तिशाली संविधान-बाबासाहेब का योगदान

प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने ये सुनिश्चित किया कि समाज के हर तबके का कल्याण हो। 6 दिसम्बर को उनके महापरिनिर्वाण दिवस के अवसर पर, हम हमेशा की तरह उन्हें स्मरण और नमन करते हैं। देश को समृद्ध और शक्तिशाली बनाने में बाबासाहेब का योगदान अविस्मरणीय है।

पीएम मोदी ने कहा कि हमारा कर्तव्य है कि हम संविधान का अक्षरश पालन करें और किसी को किसी भी तरह से क्षति ना पहुंचने दें। सन उन्नीस सौ उनचास में :1949: में आज ही के दिन, संविधान-सभा ने भारत के संविधान को स्वीकार किया था। 26 जनवरी 1950 को, संविधान लागू हुआ।

भारत का संविधान

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इसलिए तो हम, 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाते हैं। भारत का संविधान, हमारे लोकतंत्र की आत्मा है। आज का दिन, संविधान-सभा के सदस्यों के स्मरण करने का दिन है। उन्होंने भारत का संविधान बनाने के लिए लगभग तीन वर्षों तक परिश्रम किया।

पीएम मोदी ने कहा कि जो भी हमारे संविधान को पढ़ता है तो, हमें गर्व होता है कि राष्ट्र को समर्पित जीवन की सोच क्या होती है! क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि विविधताओं से भरे अपने देश का संविधान बनाने के लिए उन्होंने कितना कठोर परिश्रम किया होगा?

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भारत का संविधान बहुत व्यापक

मोदी ने कहा कि संविधान-सभा के सदस्यों ने सूझबूझ दूरदर्शिता के दर्शन कराए होंगे और वो भी उस समय, जब देश ग़ुलामी की जंज़ीरों से मुक्त हो रहा था। इसी संविधान के प्रकाश में संविधान-निर्माताओं , उन महापुरुषों के विचारों के प्रकाश में नया भारत बनाना हम सब का दायित्व है।

पीएम मोदी ने कहा कि हमारा संविधान बहुत व्यापक है। शायद जीवन का कोई ऐसा क्षेत्र नहीं है, प्रकृति का कोई ऐसा विषय नहीं है जो उससे अछूता रह गया हो। नागरिक हों या प्रशासक, संविधान की भावना के अनुरूप ही आगे बढ़ें। किसी को किसी भी तरह से क्षति ना पहुँचे - यही तो संविधान का संदेश है।

पीएम मोदी ने कहा कि 15 दिसम्बर को सरदार वल्लभभाई पटेल की पुण्यतिथि है। किसान-पुत्र से देश के लौह-पुरुष बने सरदार पटेल ने, देश को एक सूत्र में बाँधने का बहुत असाधारण कार्य किया था। सरदार साहब भी संविधान सभा के सदस्य रहे थे। वे मूलभूत अधिकारों बुनियादी अधिकार, अल्प-संख्यकों और आदिवासियों पर बनी परामर्श समिति के भी अध्यक्ष थे।

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