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25 मई 2013 की वो रात कभी नहीं भूल पाएंगे राहुल, दो दिन तक सोये नहीं थे

25 मई 2013 की रात छत्तीसगढ़ के लिए सबसे दर्दनाक रात थी। राहुल गांधी आधी रात में ही रायपुर पहुंच गए थे। घटना से गुस्साए कांग्रेसियों से शांति की अपील की और सबको संभाला।

25 मई 2013 की वो रात कभी नहीं भूल पाएंगे राहुल, दो दिन तक सोये नहीं थे

25 मई 2013 की रात छत्तीसगढ़ के लिए सबसे दर्दनाक रात थी। नक्सलियों ने झीरम घाटी हमले में कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को निशाना बनाकर तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, उनके पुत्र दिनेश पटेल, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल समेत 30 से अधिक लोगों को मौत के घाट उतार दिया था।

पूरा प्रदेश घटना से स्तब्ध था। कांग्रेसी आक्रोशित थे। जैसे ही इस घटना की सूचना कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को मिली, वे आधी रात दिल्ली से रायपुर पहुंचे और कांग्रेसियों के बीच उपस्थित होकर उन्हें संबल दिया। घटना से गुस्साए कांग्रेसियों से शांति की अपील की और सबको संभाला।

घटना के दूसरे दिन भी वे छत्तीसगढ़ में ही रहे और उस समय के कार्यक्रम संयोजक और अब प्रदेश अध्यक्ष बन चुके भूपेश बघेल को अपना विमान देकर बस्तर से घायलों को रायपुर लाने की जिम्मेदारी सौंपी।

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दो दिनों की इस मशक्कत में उन्होंने झपकी तक नहीं ली। यही वजह है, झीरम घाटी घटना के समय छत्तीसगढ़ के साथ राहुल गांधी के जुड़ाव को याद कर कांग्रेसजन आज भी भावुक हो जाते हैं।

कांग्रेस पार्टी की कमान बेटे राहुल गांधी को 'सौंपने' के बाद कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने शुक्रवार को राजनीति से रिटायरमेंट का ऐलान कर दिया। सोनिया से जब पत्रकारों ने पार्टी में उनकी भावी भूमिका को लेकर सवाल पूछा, तो उन्होंने अपने रिटायरमेंट की बात कही। हालांकि कांग्रेस ने कहा है कि वह सिर्फ अध्यक्ष पद से रिटायर हो रही हैं, राजनीति से नहीं।

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गौरतलब कि पिछले काफी वक्त से सोनिया गांधी सक्रिय राजनीति से दूर चल रही हैं। उन्होंने हाल में संपन्न हुए गुजरात और हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव में भी प्रचार नहीं किया। इस बीच उनके खराब स्वास्थ्य की खबरें भी आती रहीं।

आज राहुल संभाल सकते हैं कमान

शनिवार को राहुल कांग्रेस अध्यक्ष के तौर पर कार्यभार संभाल सकते हैं। सोनिया गांधी ने ऐसे समय में रिटायरमेंट की घोषणा की है, जब कांग्रेस पार्टी के सामने अपना जनाधार बढ़ाने की बड़ी चुनौती है। गौरतलब है कि 11 दिसंबर को कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को निर्विरोध तरीके से पार्टी का अध्यक्ष चुन लिया गया था। नेहरू-गांधी परिवार के वंशज राहुल (47) के सामने अब पार्टी की खोई हुई प्रतिष्ठा को लौटाने की चुनौती है।

19 साल तक संभाली बागडोर

गौरतलब है कि सोनिया गांधी 1998 में कांग्रेस की अध्यक्ष बनी थीं। वह 19 साल तक कांग्रेस अध्यक्ष पद पर रहीं। इस दौरान उनकी अध्यक्षता में कांग्रेस ने लगातार दो लोकसभा चुनाव (2004 और 2009) जीते। सोनिया कांग्रेस की अगुवाई वाले यूपीए (संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन) की चेयरपर्सन भी रहीं।

पुरानी पार्टी में नए युग का आगाज

कांग्रेस में यह बदलाव देश की सबसे पुरानी पार्टी में नए युग का आगाज माना जा रहा है। गौरतलब है कि 11 दिसंबर को कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को निर्विरोध तरीके से पार्टी का अध्यक्ष चुन लिया गया था। इस शीर्ष पद के लिए केवल राहुल ने ही नामांकन किया था।

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