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वंशवाद का नतीजा है राहुल गांधी का अध्यक्ष बनना, ऐसे पड़ी ''वन फैमली-वन पार्टी'' की नींव

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी का गठन 132 साल पहले 28 दिसंबर 1885 को एओ ह्यूम ने किया था। हर साल इस पार्टी की देश के अलग-अलग शहरों में बैठक होती थी और पार्टी का एक राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना जाता था।

वंशवाद का नतीजा है राहुल गांधी का अध्यक्ष बनना, ऐसे पड़ी

भारतीय राजनीति में वंशवाद को लेकर अक्सर बहस होती रही है। कोई भी राजनीतिक दल हो उसमें वंशवाद की जड़े विद्यमान है। चूंकि कांग्रेस पार्टी भारत की सबसे पुराना दल है तो जाहिर है कि उसमें भी वंशवाद की जड़ें काफी गहराई में होगी।

शनिवार को राहुल गांधी कांग्रेस के अध्यक्ष बन गए हैं। अध्यक्ष पद के लिए वो निर्विवाद और बिना किसी अन्य उम्मीदवार को टक्कर दिए जीत गए। कांग्रेस नेता शहजाद पूनावाला ने भी राहुल गांधी का कांग्रेस के अध्यक्ष पद के लिए इलेक्शन नहीं सिलेक्शन हो रहा है। अगर इलेक्शन होता तो मैं भी अध्यक्ष पद के लिए नामांकन भरता।
खैर! हम आपको बताते है की कांग्रेस में वंशवाद की जड़े कितनी गहरी और पुरानी है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी का गठन 132 साल पहले 28 दिसंबर 1885 को एओ ह्यूम ने किया था। हर साल इस पार्टी की देश के अलग-अलग शहरों में बैठक होती थी और पार्टी का एक राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना जाता था।
पार्टी के नव-निर्वाचित अध्यक्ष राहुल गांधी के परनाना जवाहरलाल नेहरू के पिता मोतीलाल नेहरू भी इसके अध्यक्ष बने। पार्टी में वंशवाद की राजनीति का बीज तब पड़ा, जब मोतीलाल ने अपने पुत्र जवाहरलाल नेहरू को पार्टी का अध्यक्ष बनाने के लिए महात्मा गांधी को एक सिफारिशी पत्र लिखा। उसके बाद तो पार्टी और परिवार एक दूसरे के पर्याय होते चले गए।

आगे स्लाइड में पढ़िए कांग्रेस में वंशवाद की नींव-
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