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कांग्रेस ने रचा इतिहास : पहली बार एक दिन में तीन मुख्यमंत्रियों ने ली शपथ

छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान में आज एक साथ तीन मुख्यमंत्रियों ने एक दिन में शपथ लेकर इतिहास रच दिया है और इसका श्रेय भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को जाता है।

कांग्रेस ने रचा इतिहास : पहली बार एक दिन में तीन मुख्यमंत्रियों ने ली शपथ
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छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान में आज एक साथ तीन मुख्यमंत्रियों ने एक दिन में शपथ लेकर इतिहास रच दिया है और इसका श्रेय भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को जाता है। ऐसा पहली बार हुआ है कि कांग्रेस के तीन नेताओं ने एक ही दिन में मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली है। छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल, मध्य प्रदेश कमल नाथ और राजस्थान अशोक गहलोत और सचिन पायलट ने उप मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली है।

छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल ने ली शपथ

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेश बघेल ने सोमवार को राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने रायपुर के बलबीर जुनेजा इंडोर स्टेडियम में भूपेश बघेल को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई। बघेल ने हिंदी में पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। बघेल के साथ उनके सहयोगी ताम्रध्वज साहू और टी एस सिंहदेव ने भी मंत्री पद की शपथ ली। सिंह देव विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे हैं। वह अंबिकापुर से विधायक हैं। वहीं ताम्रध्वज साहू पिछड़ा वर्ग के वरिष्ठ नेता हैं एवं दुर्ग ग्रामीण सीट से विधायक हैं। साहू दुर्ग लोकसभा सीट से कांग्रेस के सांसद भी हैं।

कांग्रेस को 68 सीटों पर जीत दिलाने में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल की बड़ी भूमिका रही है। 57 वर्षीय भूपेश बघेल अन्य पिछड़ा वर्ग के कुर्मी समाज से आते हैं जो राज्य की राजनीति में काफी दखल रखता है। बघेल ने वर्ष 2013 में विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष का पद सम्हाला था। बघेल का जन्म 23 अगस्त 1961 में दुर्ग जिले के सभ्रांत किसान परिवार में हुआ। बघेल के कार्यों को देखकर पार्टी ने 1993 में उन्हें टिकट दिया और वह पाटन विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीत गए।

बाद में वह 1998 और 2003 में भी क्षेत्र से विधायक रहे। वर्ष 2008 में वह चुनाव हार गए थे। इस चुनाव में भाजपा के विजय बघेल ने उन्हें हराया था। हार के बाद बघेल को वर्ष 2009 में रायपुर लोकसभा सीट से पार्टी ने उम्मीदवार बनाया लेकिन वह रमेश बैस से चुनाव हार गए। बघेल पर पार्टी ने एक बार फिर भरोसा जताया और वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव में उन्हें जीत मिली। इस वर्ष :वर्ष 2018 में: हुए चुनाव में बघेल ने पाटन विधानसभा सीट से जीत हासिल की है।

कमलनाथ मध्यप्रदेश के 18वें मुख्यमंत्री बने

कांग्रेस के दिग्गज नेता कमलनाथ ने सोमवार दोपहर मध्यप्रदेश के 18वें मुख्यमंत्री के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ ली। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने उन्हें शहर के जम्बूरी मैदान में एक भव्य समारोह में शपथ दिलाई। कमलनाथ ने हिन्दी में शपथ ली और अकेले शपथ ग्रहण किया। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री का पद संभालते ही कमलनाथ ने राज्य विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस के ‘वचन पत्र' (घोषणा पत्र) में किसानों के कर्ज माफ करने के किए गए वादे के अनुसार सोमवार शाम सबसे पहले किसानों के दो लाख रूपये तक के रिण माफ करने की फाइल पर हस्ताक्षर किए।

कमलनाथ को पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी अपना ‘तीसरा बेटा' मानती थीं। कमलनाथ एक ऐसे नेता हैं, जिन्होंने विभिन्न पदों पर रहते हुए गांधी-नेहरू परिवार की तीन पीढ़ियों... इंदिरा गांधी, राजीव गांधी एवं राहुल गांधी के साथ काम किया है। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने एक बार उन्हें अपना ‘तीसरा बेटा' कहा था, जब उन्होंने 1979 में मोरारजी देसाई की सरकार से मुकाबले में उनकी मदद की थी। पूर्व ग्वालियर राजघराने के वंशज एवं पार्टी के युवा नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया को अनदेखा कर राहुल गांधी ने इस साल 26 अप्रैल को अरूण यादव की जगह कमलनाथ को मध्य प्रदेश का कांग्रेस अध्यक्ष बनाया था।

राजस्थान में अशोक गहलोत ने मुख्चयमंत्री और पायलट ने उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने तीसरी बार राजस्थान के मुख्यमंत्री के रूप में और उनके साथ नयी सरकार में बतौर उप मुख्यमंत्री शामिल हुए सचिन पायलट ने सोमवार को पद और गोपनीयता की शपथ ली। गहलोत तीसरी बार राजस्थान के मुख्यमंत्री बने हैं। राज्य में तीसरी बार मुख्यमंत्री बनने वाले वह चौथे नेता हैं। गहलोत से पहले भैंरो सिंह शेखावत और हरिदेव जोशी तीन-तीन बार मुख्यमंत्री रहे। हालांकि मोहन लाल सुखाड़िया सबसे अधिक चार बार इस पद पर रहे।

गहलोत 1998 में पहली बार और 2008 में दूसरी बार मुख्यमंत्री बने थे। इंदिरा गांधी के समय से राजनीति में सक्रिय गहलोत केंद्र में मंत्री भी रहे हैं। राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी में कई अहम पदों पर रह चुके गहलोत तीन बार कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष रहे हैं। गहलोत ने राजनीति के अलावा 1971 में बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम के दौरान पश्चिम बंगाल में बांग्लादेशी शरणार्थियों के शिविरों में काम किया और कई सामाजिक गतिविधियों में शामिल रहे।

उप मुख्यमंत्री बने पायलट फिलहाल राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हैं। वह लोकसभा सदस्य और मनमोहन सिंह सरकार में मंत्री रह चुके हैं। वह अपने जमाने में कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री दिवंगत राजेश पायलट के पुत्र हैं। राजस्थान विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को जीत मिलने के बाद मुख्यमंत्री पद के चयन को लंबी खींचतान हुई। गहलोत और पायलट दोनों इस पद की दौड़ में शामिल थे, लेकिन 14 दिसंबर को कांग्रेस अध्यक्ष ने गहलोत को मुख्यमंत्री और पायलट को उप मुख्यमंत्री नामित करने का फैसला किया।

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