Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

कांग्रेस समेत 7 विपक्षी दलों का CJI के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव, नोटिस मंजूर हुआ तो जांच के लिए बनेगी कमेटी

इन 7 दलों के नेताओं ने अपने दस्तखत वाला नोटिस राज्यसभा के सभापति और उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू को सौंपा हैं।

कांग्रेस समेत 7 विपक्षी दलों का CJI के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव, नोटिस मंजूर हुआ तो जांच के लिए बनेगी कमेटी
X

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ कांग्रेस समेत 7 दलों के 64 नेताओं ने महाभियोग प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए हैं। इसमें उन्होंने आरोप लगाया कि चीफ जस्टिस ने पद का दुरुपयोग किया है। इसके साथ ही चीफ जस्टिस के खिलाफ 5 आरोप लगाए हैं।

इन दलों के नेताओं ने दस्तखत वाला नोटिस शुक्रवार को राज्यसभा के सभापति और उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू को सौंपा। अगर यह नोटिस मंजूर होता है और विपक्ष प्रस्ताव लाने में कामयाब हो जाता है तो देश के इतिहास में सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस के खिलाफ विधायिका की तरफ से यह ऐसा पहला कदम होगा।

उधर, सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को इस मुद्दे पर खुलकर हो रही बयानबाजी को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया। महाभियोग प्रस्ताव को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष में बयानबाजी तेज हो गई है।

मनमोहन सिंह को रखा दूर

सभापति वेंकैया नायडू से 40 मिनट तक हुई मुलाकात के बाद राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। जब पूछा गया कि मनमोहन सिंह के इस पर दस्तखत नहीं हैं तो कपिल सिब्बल ने कहा- उन्हें जानबूझकर इसमें शामिल नहीं किया गया क्योंकि वे पूर्व प्रधानमंत्री हैं।

पूर्व सांसदों के हस्ताक्षर भी

आजाद ने कहा कि हमने 71 सांसदों के हस्ताक्षर वाला नोटिस दिया है। इनमें से 7 सांसदों का कार्यकाल खत्म हो चुका है। लिहाजा, संख्या 64 सांसदों की है। राज्यसभा के सभापति 50 सांसदों के समर्थन पर भी फैसला कर सकते हैं।

टीएमसी-डीएमके हुए किनारे

महाभियोग प्रस्ताव के पक्षधर विपक्षी दलों में पहले तृणमूल कांग्रेस और द्रमुक भी शामिल थीं। लेकिन बाद में इन दोनों दलों ने कांग्रेस से किनारा कर लिया। विपक्षी दलों में कांग्रेस के अलावा राकापां, माकपा, भाकपा, बसपा, समाजवादी पार्टी और मुस्लिम लीग शामिल हैं।

महाभियोग पर बयानबाजी दुर्भाग्यपूर्ण: सुको

सुप्रीम कोर्ट ने महाभियोग पर सार्वजनिक रूप से हो रही चर्चा को काफी दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया। जस्टिस एके सीकरी और जस्टिस अशोक भूषण की बेंच ने शुक्रवार को एक मामले पर सुनवाई करते हुए कहा कि महाभियोग के बारे में सार्वजनिक रूप से दिए जा रहे बयानों से शीर्ष अदालत व्यथित है।

राजनीति करना उचित नहीं: खुर्शीद

पेशे से वकील कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने कहा कि वकील का काला गाउन और सफेद बैंड पहनने वाले किसी भी आदमी के लिए कोर्ट के फैसले पर सोच समझ कर सवाल उठाने चाहिए। यह संवेदनशील मामला है। उन्होंने कहा कि शीर्ष कोर्ट के फैसले पर राजनीति करने को उचित नहीं कहा जा सकता है।

जजों को डराने की कोशिश: जेटली

चीफ जस्टिस के खिलाफ महाभियोग लाने के प्रस्ताव के बीच सत्ताधारी दल और विपक्षी पार्टी की बयानबाजी तेज हो गई है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने भी विपक्ष पर आरोप लगाया है कि वह महाभियोग को हथियार बनाकर जजों को डराने की कोशिश कर रही है।

इस पूरे मामले पर भाजपा ने कहा कि विपक्ष की तरफ से न्यायपालिका को लेकर लगातार राजनीति हो रही है। विपक्ष कोर्ट पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है।

लोकतंत्र पर खतरा: सिब्बल

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने कहा कि सीजेआई के कुछ प्रशासनिक फैसलों पर आपत्ति है। चीफ जस्टिस पर अपने पद की मर्यादा तोड़ने का आरोप लगाते हुए उन्‍होंने कहा कि न्यायपालिका के खतरे में आने से लोकतंत्र पर खतरा है।

तीन सदस्‍यीय कमेटी

प्रक्रिया के मुताबिक यदि इस तरह का कोई प्रस्‍ताव पास हो भी जाता है तो आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्‍यों की एक कमेटी बनाई जाती है। इस कमेटी में एक सुप्रीम कोर्ट के जज, किसी भी हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस और एक न्‍यायविद शामिल होते हैं।

इनमें से न्‍यायविद को लोकसभा के स्‍पीकर या राज्‍यसभा के सभापति नामित करते है। रिपोर्ट तैयार करने के बाद कमेटी उसे लोकसभा के स्‍पीकर या राज्‍यसभा के सभापित को सौंपती है।

क्‍या विपक्ष के पास संख्‍याबल है?

राज्‍यसभा में कुल 245 सांसद हैं। इस सदन में महाभियोग प्रस्‍ताव पास करने के लिए दो तिहाई बहुमत यानी 164 सांसदों के वोट की जरूरत होगी। राज्‍यसभा में सत्‍ताधारी एनडीए के 86 सांसद हैं।

इनमें से 68 भाजपा के सांसद हैं। यानी इस सदन में कांग्रेस समर्थित इस प्रस्‍ताव के पास होने की संभावना नहीं है। लोकसभा में कुल सांसदों की संख्‍या 545 है।

दो तिहाई बहुमत के लिए 364 सांसदों के वोटों की जरूरत पड़ेगी, यहां विपक्ष बिना भाजपा के समर्थन के ये संख्‍या हासिल नहीं कर सकता क्‍योंकि लोकसभा में अकेले भाजपा के ही 274 सांसद हैं।

ये लगाए आरोप

1. मुख्य न्यायाधीश के पद के अनुरुप आचरण ना होना, प्रसाद ऐजुकेशन ट्रस्ट में फायदा उठाने का आरोप। इसमें मुख्य न्यायाधीश का नाम आने के बाद सघन जांच की जरूरत।

2. प्रसाद ऐजुकेशन ट्रस्ट का सामना जब सीजेआई के सामने आया तो उन्होंने न्यायिक और प्रशासनिक प्रक्रिया को किनारे किया।

3. बैक डेटिंग का आरोप।

4. जमीन का अधिग्रहण करना, फर्जी एफिडेविट लगाना और सुप्रीम कोर्ट जज बनने के बाद 2013 में जमीन को सरेंडर करना।

5. कई संवेदनशील मामलों को चुनिंदा बेंच को देना।

एजी से मदद करने कहा

सुप्रीम कोर्ट ने एटॉर्नी जनरल केके वेणुगाेपाल से इस बारे में अदालत की मदद करने को कहा। कोर्ट ने पूछा कि क्या महाभियोग पर बयानबाजी को रोका जा सकता है? कोर्ट ने कहा कि एटॉर्नी जनरल की सलाह के बाद ही मीडिया पर बंदिशें लगाने के बारे में सोचा जाएगा।

महाभियोग के लिए इतना समर्थन हो

महाभियोग प्रस्ताव लाने के लिए राज्यसभा के कम से कम 50 और लोकसभा के कम से कम 100 सांसदों का समर्थन जरूरी होता है। संसद सत्र चालू नहीं होने की स्थिति में भी यह प्रस्ताव लाया जा सकता है। महाभियोग चाहे हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के किसी भी जज के खिलाफ हो।

27 साल में तीसरी बार कोशिश

सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट के जस्टिस के खिलाफ महाभियोग की कोशिश 27 सालों में तीसरी बार हो रही है।

1991: सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस वी. रामास्वामी के खिलाफ महाभियोग का प्रस्ताव लाया गया था, लेकिन लोकसभा में इस प्रस्ताव को पास कराने का जरूरी समर्थन नहीं मिला।

2009: सिक्किम हाईकोर्ट के जस्टिस पीडी दिनाकरण के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की कोशिशें हुईं। संसद में प्रस्ताव पर बात आगे बढ़ती, इससे पहले ही उन्होंने इस्तीफा दे दिया।

2011: कलकत्ता हाईकोर्ट के जस्टिस सौमित्र सेन के खिलाफ राज्यसभा में महाभियोग प्रस्ताव लाया गया। प्रस्ताव पास भी हुआ। लोकसभा में उनके खिलाफ प्रस्ताव आता, इससे पहले उन्होंने ही जज के पद से इस्तीफा दे दिया।

इनपुट- भाषा

और पढ़े: Haryana News | Chhattisgarh News | MP News | Aaj Ka Rashifal | Jokes | Haryana Video News | Haryana News App

Next Story