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कम्युनिस्ट न करें हिंदू संगठनों को बदनाम: विहिप

साजिश के तहत हिन्दू संगठनों का नाम विवाद से जोड़ा जा रहा है।

कम्युनिस्ट न करें हिंदू संगठनों को बदनाम: विहिप

विश्व हिन्दू परिषद ने कहा है कि पत्रकार गौरी लंकेश के मामले में हिन्दूवादी संगठनो का नाम घसीटना दुर्भाग्यपूर्ण है।

बिना जांच के किसी भी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सकता है। विहिप के संयुक्त सचिव डॉ सुरेंद्र जैन ने कहा कि कम्युनिस्टों के द्वारा साजिश के तहत हिंदू संगठनों का नाम इस विवाद से जोड़ा जा रहा है।

उन्होंने कहा कि हमसब को अभी जांच होने तक इंतजार करना चाहिए।

उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि मीडिया के एक तबके का ये ट्रेंड बन गया है कि वो हर हत्या को हिन्दू संगठन से जोड़ने की कोशिश करने में लगे हुए है।

जैन ने कहा कि आरोपी जो भी उसे तत्काल गिरफ्तार करना चाहिए और उसे सजा मिलनी चाहिए जोकि राज्य सरकार की जवाबदेही है।

सीबीआई से जांच कराए सरकार

जैन ने कहा कि कर्नाटक सरकार को सीबीआई से हत्या की जांच करानी चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि लोगों को पता है गौरी लंकेश वर्तमान किस विषय पर लिख रही थी।

जैन ने कहा कि कर्नाटक की कांग्रेस सरकार के भ्रष्टाचार को लेकर वो लिखने वाली थी। जिसका डर कांग्रेस को सता रहा था। उन्होंने कहा कि कर्नाटक सरकार हिम्मत दिखाते हुए हत्या की जांच सीबीआई से कराए ताकि सच्चाई सामने आ सके।

उन्होंने कहा कि हत्या का संबंध नक्सलियों से भी जुड़ा हो सकता है इस लिहाज से भी कर्नाटक सरकार ने जांच करवाई।

जैन ने कहा कि उन्हें हिंदू संगठनों पर आरोप मढ़ने के बजाय हत्यारों को पकड़ कर सजा दिलवानी चाहिए।

वाममार्गी बुद्धिजीवियों का आरोप निराधार

जैन ने हरिभूमि से खास बातचीत में कहा कि जब दीपक बुझने वाला होतो जो ज्यादा लौ दी जाती है। उसी प्रकार से कम्युनिस्ट विचारधारा देश और दुनिया में समाप्ति के कगार पर है।

उन्होंन कहा कि कम्युनिस्टों जब कोई मुद्दा नहीं मिलता है तो वो किसी की मृत्यु को ही उत्सव बना देते है।

उन्होंने कहा कि जब हैदराबाद में नाबालिगों के साथ अरब देशों के शेख यौन शोषण करते हैं तब किसी कम्युनिस्टों की आवाज कहां छिप जाती है।

जब केरल और कर्नाटक में खूनी खेल कम्युनिस्टों के द्वारा खेला जाता है तब इनकी बुद्धि कहां चली जाती है।

गौरतलब है कि 5 सितंबर की रात बेंगलुरु में महिला पत्रकार गौरी लंकेश को उनके घर के बाहर ही कुछ अज्ञात हमलावरों द्वारा गोली मारकर हत्या कर दी गई।

पत्रकार की हत्या पर मीडिया से लेकर सोशल मीडिया तक में हंगामा मचा हुआ है। सोशल मीडिया पर लोग लिख रहे हैं कि किसी विचारधारा के खिलाफ लिखने वाली महिला पत्रकार की इस तरह से हत्या लोकतंत्र की हत्या है।

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