logo

Exclusive Video: ''तूफान आया, चोट लगी, मेरी नाव बर्बाद हो गई फिर भी मुझे मौत का डर नहीं था'' - कमांडर अभिलाष टोमी

दक्षिण हिंद महासागर के करीब 14 मीटर ऊंची लहरों के भयानक तूफान की चपेट में आकर भारतीय नौसेना के कमांडर अभिलाष टोमी (Abhilash Tomy) गंभीर रूप से घायल हो गए थे। वह सितंबर 2018 में गोल्डल ग्लोब रेस 2018 (Golden Globe Race 2018) में भारत के साथ-साथ एशिया का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। तीन दिनों तक वह हिंद महासागर में फंसे रह गए। उन्हें बचा लिया गया लेकिन अपनी गंभीर चोट के कारण वह प्रतियोगिता से बाहर हो गए थे। कीर्ति चक्र से सम्मानित कमांडर अभिलाष टोमी से हरिभूमि की डिफेंस रिपोर्टर कविता जोशी ने खास बात-चीत की। पेश है बातचीत के कुछ अंश।

Exclusive Video:
दक्षिण हिंद महासागर के करीब 14 मीटर ऊंची लहरों के भयानक तूफान की चपेट में आकर भारतीय नौसेना के कमांडर अभिलाष टोमी (Abhilash Tomy) गंभीर रूप से घायल हो गए थे। वह 1 जुलाई को शुरू हुई गोल्डन ग्लोब रेस 2018 में (Golden Globe Race 2018) में भारत के साथ-साथ एशिया का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। 140 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से बहती प्रचंड हवाओं के वेग और 15 मीटर उठती लहरों के रौद्र रूप की चपेट में आकर वह घायल हुए। तीन दिनों बाद उन्हें बचा लिया गया लेकिन अपनी गंभीर चोट के कारण वह प्रतियोगिता से बाहर हो गए थे। कीर्ति चक्र से सम्मानित कमांडर अभिलाष टोमी से हरिभूमि की डिफेंस रिपोर्टर कविता जोशी ने खास बात-चीत की। पेश है बातचीत के कुछ अंश।

सवाल- जिस समय हादसा हुआ आप उस समय हिंद महासागर में किस जगह थे। समुद्र का हाल क्या था और दुर्घटना कैसे हुई?

जवाब- मैं उस समय ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका के बीच में 40 डिग्री दक्षिण में था। भारत से करीब 5 हजार किलोमीटर दूर था। ऑस्ट्रेलिया से करीब 4 हजार किलोमीटर दूर था। तूफान में मैं फंस गया। वह तूफान इतना भयानक था कि मेरी नाव पूरी तरह टूट गई। मुझे रीढ़ की हड्डी में चोट आई।
सवाल- तूफान का मंजर कैसा था?
जवाब- वो तूफान जीवन भर याद रहेगा। मैं पहले भी तूफानों में फंसा हूं। लेकिन हर बार उनसे निकला भी हूं। लेकिन यह तूफान बड़ा भयानक था। हवा बहुत तेज चल रही थी। इसी वजह से लहरे भी 10-15 मीटर उठ रही थीं।
सवाल- आपको कितनी चोट आई थी?
जवाब- मैं उंचाई से गिरा था। इस कारण मुझे बहुत गंभीर चोट आई थी। 21 तारीख को मुझे चोल लगी और 6 तारीख को मैं अस्पताल पहुंचा। जब MRI हुआ तो पता चला कि रीढ़ की हड्डी में चोट आई है। अब उसकी सर्जरी हुई है। जिसमें टाइटेनियम की प्लेट से जोड़ा गया है।
सवाल- चोट लगने के बाद आपकी मनोदशा क्या थी?
जवाब- जब मुझे चोट लगी तो मैं यह जानता था कि बचाव दल मेरे लिए आएगा। मैं बस उनका इंतजार कर सकता था। लेकिन बचाव दल कितने दिन में पहुंचेगा। उनहें तीन दिन लग सकते हैं। 10 दिन लग सकते हैं। तो मैं बस अपने आप को तब तक के लिए जिंदा रख सकता था। मैने सोचना बंद कर दिया था, क्योंकि अगर सोचता तो परेशानी होती। फिर में देखता रहता था कि क्या पैर हिला पा रहा हूं। शरीर कितना काम कर रहा है। मैं हर चीज का नोट बना रहा था ताकि डॉक्टर को बता पाऊं।
सवाल- आपने उस समय क्या खाया?
जवाब- कुछ नहीं। क्योंकि चोट के कारण में चल फिर नहीं सकता था। पानी पैर से पंप करके निकालना पड़ता था। कुछ बना नहीं सकता था। बस तीन दिन तक मैं केवल आइस टी (ICE Tea) पीकर जिंदा रहा हूं।
सवाल- भले ही आपको लगा हो कि आपको बचा लिया जाएगा। लेकिन फिर भी आपको इसकी ताकत कहां से मिली?
जवाब- भारतीय नौसेना की ट्रेनिंग में यह सब सीखा है। इसू लिए मुझे यकीन था। और इसी यकीन से ताकत मिल रही थी।
सवाल- आपने अपनी रेस कहां से शुरू की थी?
जवाब- फ्रांस से रेस 1 जुलाई को शुरू हुई थी। हम 17 लोग निकले थे। मैं समुद्र में 82 दिन तक रहा।
सवाल- आप गोल्डन ग्लोब रेस में अकेले भारतीय थे। आपको कैसा लगा?
जवाब- ये काफी भावुक करने वाली बात है। हमने गोवा में नाव बनाई। फिर उसे नीदरलैंड ले गए। वहां पर लोग बोट देखने आते थे। और पूछते थे कि यह झंडा किस देश का है। मैं उन्हें बताता था कि ये भारत का झंडा है। एक विदेशी पत्रकार ने लिखा था कि अभिलाष टोमी को यह रेस पूरी करने में 6 महीने के बजाय 10 महीने लगेंगे। लेकिन मैने जल्द ही तीसरा स्थान ले लिया था।

Loading...

Latest

View All

वायरल

View All

गैलरी

View All
Share it
Top