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इस शहर में ठंड से बचने के लिए खा जाते हैं घोड़ा, सर्दियों में पारा होता माइनस 50 डिग्री के पार

लगभग पूरा विश्व ठंड की चपेट में है। अमेरिका, चीन, भारत, रूस जैसे देशों में लगातार बर्फवारी हो रही है। अमेरिका और चीन में तो बर्फीले तूफान से अब तक 50 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई। वहीं भारत में भी ठंड से लगभग 20 लोगों की मौत हो चुकी हैं।

इस शहर में ठंड से बचने के लिए खा जाते हैं घोड़ा, सर्दियों में पारा होता माइनस 50 डिग्री के पार

लगभग पूरा विश्व ठंड की चपेट में है। अमेरिका, चीन, भारत, रूस जैसे देशों में लगातार बर्फवारी हो रही है। अमेरिका और चीन में तो बर्फीले तूफान से अब तक 50 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई। वहीं भारत में भी ठंड से लगभग 20 लोगों की मौत हो चुकी हैं।

पूर्वी चीन के अनहुई प्रांत में बर्फीले तूफान की वजह से पिछले तीन दिनों में 13 लोगों की मौत हो गई। बॉम्ब चक्रवात ने अमेरिका में तबाही मचा रखी है। इस ठंडे चक्रवात से 15 लोगों की मौत हो गई जबकि 80 हजार परिवार खतरे में है।

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लेकिन विश्व में एक ऐसा भी देश है जहां सर्दी के मौसम में औसत तापमान माइनस 50 डिग्री सेल्सियल के आस-पास रहता है। इसके बावजूद इस टाउन में करीब 500 लोग रहते हैं। यह शहर रूस में है, जिसे ओम्याकॉन नाम से जानते है। इस टाउन में रहने वाले बहुत सारे बदलावों का सामना करते हैं दुनिया के लिए जिसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल है। इसे दुनिया में सबसे ठंडा इनहैबिटेड एरिया माना जाता है।

खाने में रेंडियर और घोड़े का मीट

यहां रहने वाले लोगों के खाने से लेकर रहने के तरीके तक सब खास है। इतनी सर्दी के चलते वो सिर्फ वो जिंदा रहने के लिए सिर्फ मीट खाते हैं। वो भी रेंडियर और घोड़े का मीट खाते हैं। इस टाउन में बच्चों के लिए एक स्कूल भी है लेकिन वो कड़ाके की ठंड में चलता है। उसे तब तक नहीं बंद किया जाता जब तक पारा -52 डिग्री सेल्सियस नहीं पहुंच जाता।

जम जाती है पेन की इंक और पानी

इस ठंड में यहां पेन की इंक से लेकर ग्लास में पीने के पानी तक सबकुछ जम जाता है। यहां मोबाइल फोन सर्विस शुरू ही नहीं हुई है। यहां टेम्प्रेचर -60 डिग्री सेल्सियस के भी नीचे चला जाता है। 1933 में यहां पारा -67.07 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था। सर्दी के मौसम में यहां दिन में मुश्किल से सिर्फ तीन घंटे के लिए रोशनी होती है। बाकी के वक्त अंधेरा छाया रहता है।

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