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पाक में 11 साल के बच्चे ने राष्ट्रपति कार्यालय पर किया केस

11 वर्षीय बच्चे ने भाषण को चुराने के आरोप में राष्ट्रपति ममनून हुसैन के कार्यालय पर मुकदमा किया है।

पाक में 11 साल के बच्चे ने राष्ट्रपति कार्यालय पर किया केस
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इस्लामाबाद. पाकिस्तान में छठी क्लास के एक स्टूडेंट ने अपना भाषण चुराने के आरोप में प्रेजिडेंट ऑफिस पर मुकदमा किया है। पाकिस्तान में 11 वर्षीय मुहम्मद सबील हैदर नामक स्टूडेंट ने पाकिस्तान के निर्माता मोहम्मद अली जिन्ना की सालगिरह पर अपने तैयार किए भाषण को चुराने के आरोप में राष्ट्रपति ममनून हुसैन के कार्यालय पर मुकदमा किया है। उसका कहना है कि उसने यह भाषण पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना की जयंती पर आयोजित किए जाने वाले कार्यक्रम में देने के लिए तैयार किया था।
छठी कक्षा में पढ़ने वाले मोहम्मद सबील हैदर ने अपने पिता नसीम अब्बास नासिर के जरिये इस्लामाबाद उच्च न्यायालय का रूख किया। उसने अपने भाषण की सामग्री 'चुराने' और उसकी मंजूरी के बिना उसे किसी और को देने के लिए राष्ट्रपति कार्यालय के खिलाफ याचिका दायर की।
एक्सप्रेस ट्रिब्यून की खबर के अनुसार न्यायमूर्ति आमिर फारूक ने हैदर की याचिका बनाए रखने पर फैसला सुरक्षित रखा। हैदर ने राष्ट्रपति के सचिव, राष्ट्रपति सचिवालय के अतिरिक्त सचिव, शिक्षा निदेशालय कॉलेजेज के निदेशक, पाकिस्तान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया विनियामक प्राधिकरण :पीईएमआरए:, पाकिस्तानी टेलीविजन के प्रबंध निदेशक और इस्लामाबाद कॉलेज फोर गर्ल्स की प्राचार्य के जरिये आयशा इश्तियाक नाम की एक लड़की को प्रतिवादी बनाया है।
क्‍या है मामला
इस्लामाबाद मॉडल कॉलेज फोर ब्यॉयेज में पढ़ने वाले हैदर ने याचिका में कहा कि उसने इस साल 23 मार्च को राष्ट्रपति कार्यालय द्वारा आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लिया था और भाषण दिया था। बाद में राष्ट्रपति ने उन्हें एक सराहना पत्र दिया था।
उसने कहा कि जिन्ना की 141वीं जयंती (25 दिसंबर) से संबंधित 'कायद ए आजम और बच्चे' कार्यक्रम आयोजित किया गया और प्रतिवादियों ने गत 14 दिसंबर को उससे कार्यक्रम में ‘पाकिस्तान का मुस्तकबिल’ विषय पर भाषण देने का अनुरोध किया था जिसकी रिकार्डिंग 22 दिसंबर को की जानी थी। लेकिन 22 दिसंबर को हैदर को भाषण देने नहीं दिया गया।
बाद में हैदर को बताया गया कि भाषण एक दूसरे स्कूल की लड़की देगी और जब उसने वह भाषण दिया तो हैदर को एहसास हुआ कि वह उसका लिखा भाषण था। हैदर के वकील ने इसे 'चोरी' बताते हुए मामले को बौद्धिक संपदा अधिकारों एवं कॉपीराइट आदि का उल्लंघन करार दिया और मांग की कि प्रतिवादियों को इलेक्ट्रॉनिक या सोशल मीडिया पर भाषण पेश करने से रोका जाए।
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