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क्रिसमस का महत्व : प्रभु यीशु का जन्मदिन, प्रसिद्द चर्च और क्रिसमस-डे की रोचक बातें

किसी समय तक केवल पश्चिमी देशों या ईसाई बहुल इलाकों में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार अब पूरी दुनिया में मनाया जाने लगा है। अपने देश भारत में भी इसकी अलग-अलग तरह की रौनक देखने को मिलती है। खास बात यह है कि हर धर्म के लोग इसे हर्षोल्लास से अपने अंदाज में मनाते हैं। इतना ही नहीं 25 दिसंबर का अंतिम सप्ताह पूरा देश क्रिसमस और न्यू ईयर के सेलिब्रेशन में डूबा नजर आता है।

क्रिसमस का महत्व : प्रभु यीशु का जन्मदिन, प्रसिद्द चर्च और क्रिसमस-डे की रोचक बातें

ईसाइयों के लिए क्रिसमस का महत्व (Christmas Importance) बहुत होता है। प्रभु यीशु (Lord Jesus) के जन्मदिन के मौके पर मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार (Christmas Festival), अब कुछ दशक पहले की तरह हमारे लिए कोई विदेशी त्योहार नहीं रहा बल्कि दूसरे भारतीय त्योहारों की ही तरह अब यह भारतीय त्योहार हो गया है। यही कारण है कि गोवा से लेकर गुड़गांव तक और इंफाल से लेकर अहमदाबाद तक आज यह त्योहार न केवल खूब धूम-धाम से मनाया जाता है बल्कि खास भारतीय तरीके से भी मनाया जाता है।

हर कहीं क्रिसमस की धूम

भारत के जिन शहरों में ईसाइयों की आबादी अच्छी खासी है- मसलन गोवा का पणजी, उत्तर-पूर्व का आइजोल, केरल के तमाम शहर, झारखंड का रांची और नागालैंड की राजधानी कोहिमा और उत्तर-पूर्व का ही शिलॉन्ग आदि। इन तमाम शहरों में तो दिसंबर माह की शुरुआत होते ही क्रिसमस की रौनक दिखने ही लगती है, देश के दूसरे तमाम शहरों में भी (विशेषकर महानगरों में) क्रिसमस की धूम दिसंबर के पहले से ही शुरू हो जाती है खासकर मुंबई और बेंगलुरु में। इस साल भी दिसंबर शुरू होते ही देश के तमाम छोटे-बड़े शहर सजने-संवरने लगे हैं। चर्चों में विशेष प्रार्थनाएं शुरू हो चुकी हैं और बाजारों में क्रिसमस गिफ्ट, कार्ड, प्रभु यीशु की चित्रकृतियां, सांता क्लॉज की टोपी, सजावटी सामग्री और केक की बिक्री इन दिनों खूब जोरों पर है।

नॉर्थ-ईस्ट का अनोखा अंदाज

यूं तो देश में सबसे ज्यादा ईसाई केरल में रहते हैं लेकिन अगर कहा जाए कि मिजोरम की राजधानी आइजोल क्रिसमस की धूम का सबसे बड़ा गढ़ है तो इसमें कुछ गलत नहीं होगा। आप भी अगर भीड़-भाड़ और शोर-शराबे से दूर क्रिसमस की खुशी में डूब जाना चाहते हैं, तो आइजोल इसके लिए बेस्ट जगह है। यहां न्यू ईयर और क्रिसमस का एंज्वॉयमेंट आपस में घुल-मिल जाते हैं। यही कारण है कि दिसंबर माह के आखिरी सप्ताह में यहां जश्न का जो सिलसिला शुरू होता है, वह नए वर्ष में 2-3 जनवरी तक चलता है। आइजोल में इस मौके पर खूब सजावट होती है। यहां क्रिसमस और न्यू ईयर का स्वागत जगमगाती रोशनी में हर्षोल्लास से किया जाता है।

क्रिसमस का महत्व (Christmas Importance)

25 दिसंबर को ईसा मसीह का जन्म हुआ था, जिन्होंने ईसाई धर्म की स्थापना की। इसलिए इस दिन को पूरी दुनिया में क्रिसमस-डे के नाम से जाना जाता है। वैसे भारतीय ईसाई क्रिसमस का त्योहार बेहद सादगीपूर्ण तरीके से मनाते हैं। लेकिन गोवा के पणजी में इस त्योहार की धूम विदेशों के जैसे होती है। पणजी के समुद्र तटों पर दिसंबर के शुरू होते ही देशी-विदेशी सैलानी आने लगते हैं और 20 दिसंबर के आस-पास तक तो यहां के तट सैलानियों से भर जाते हैं। चूंकि दिसंबर माह में यहां मौसम बहुत ही खुशनुमा रहता है, इसलिए यहां पर समुद्र पर राइडिंग करने का मजा ही कुछ और होता है। यहां दिसंबर के आखिरी दिनों में पब, चर्च या सी-बीच पर सांता क्लॉज की टोपी पहने सभी धर्म के लोग क्रिसमस राइम्स की धुनों पर थिरकते हुए मिल जाएंगे। सही मायनों में यहां इंडियन क्रिसमस देखने को मिलता है। चारों तरफ मौसमी फूलों, फलों और केक की सुगंध यहां फैली होती है। बेसिलिका ऑफ बॉम जीजस, सेंट एंटोनी चर्च, सेंट एंड्रू चर्च, नवेलिन आदि गोवा के चर्च इन दिनों खूब गुलजार रहते हैं।

प्रसिद्ध चर्च (Famous Church)

गोवा की तरह ही केरल में भी भारतीय तरीके से जाति-धर्म का भेदभाव भुलाकर लोग क्रिसमस का त्योहार मनाते हैं। गौरतलब है कि ईसाई धर्म का प्रचार-प्रसार सर्वप्रथम भारत के इसी राज्य में हुआ था। ईसा मसीह के शिष्य सेंट थॉमस ने यहां प्रभु यीशु के विचारों का प्रचार प्रसार किया था। शायद इसीलिए भारत केरल में ईसाई समाज के लोग बहुतायात में रहते हैं। सेंट जॉर्ज चर्च, होली फेमेली चर्च, सेंट फ्रांसिस चर्च, सेंट क्रूज बेसिलिका चर्च, सेंट जॉर्ज कैथेड्रल, पारुमाला आदि चर्च यहां के प्रसिद्ध चर्च हैं। केरल में सेंट थॉमस और मदर मरियम के नाम पर भी ऐतिहासिक चर्च हैं। केरल के बाजारों में भी दिसंबर आते ही क्रिसमस की रौनक छा जाती है। बच्चों के पास सांता क्लॉज की मुखाकृति वाली टोपी इन दिनों यहां बहुत देखने को मिलती है।

यहां भी दिखती है रौनक

सिर्फ गोवा या केरल में ही क्रिसमस की रौनक नहीं दिखती बल्कि गुजरात के रन ऑफ कच्छ में और दमन दीव वाले दीव में भी खूब दिखती है। दीव के ज्यादातर बीच एकांत, साफ-सुंदर और बड़े हैं। साथ ही यहां ठहरने के लिए तमाम इकोनॉमी शेल्टर भी हैं तो कई रिजॉर्ट भी हैं। कुल मिलाकर अगर कहा जाए कि देश के अब हर कोने में और हर डेस्टेनेशन में क्रिसमस की धूम रहती है तो यह गलत नहीं होगा।

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