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पाक को अपना उपनिवेश बना रहा चीन, रोजमर्रा की जरूरतों के लिए चीन पर होगा निर्भर

सीपीईसी प्रोजेक्ट से इस्लामाबाद खुद एक ऐसी खतरनाक स्थिति में खड़ा पाएगा जहां उसका वित्तीय और सामाजिक ढांचा पूरी तरह तबाह हो जाएगा।

पाक को अपना उपनिवेश बना रहा चीन, रोजमर्रा की जरूरतों के लिए चीन पर होगा निर्भर
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आतंकवाद को समर्थन देने की वजह से पाकिस्तान के अंतरर्राष्ट्रीय समुदाय में अलग-थलग पड़ते जाने का चीन फायदा उठा रहा है।

इतना ही नहीं वह अच्छे से वाकिफ है कि पाकिस्तान के प्रति उसके संरक्षक सरीखे रवैये से आखिरकार इस्लामाबाद एक ऐसे उपनिवेश में तब्दील हो जाएगा जो अपने रोजमर्रा की जरूरतों के लिए चीन पर निर्भर होगा।

यह आंकलन है नीदरलैंड्स आधारित एक जाने-माने अंतरराष्ट्रीय थिंक टैंक का। एम्सटर्डम बेस्ड यूरोपियन फाउंडेशन ऑफ साउथ एशियन स्टडीज (ईएफएसएएस) ने अपनी रिपोर्ट में कहा है।

जब तक पाकिस्तान एक अन्य ईस्ट इंडिया कंपनी (यानी चीन पाक आर्थिक गलियारा या सीपीईसी प्रोजेक्ट) की छाया में रहेगा और अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा की अहमियत को नहीं समझेगा, तब तक राष्ट्रीय विकास की कोई भी कोशिश राष्ट्रीय आपदा में तब्दील होती रहेगी।

चीन का मास्टर प्लान- पाक में चीनी कंपनियों का हो दबदबा

ईएफएसएएस की रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि चीन का मास्टर प्लान यह है कि पाकिस्तान के सामाजिक-आर्थिक क्षेत्र में चीनी कंपनियों और चीन संस्कृति का दबदबा हो।

इस तरह इस्लामाबाद खुद एक ऐसी खतरनाक स्थिति में खड़ा पाएगा जहां उसका वित्तीय और सामाजिक ढांचा पूरी तरह तबाह हो जाएगा।

रिपोर्ट कहती है कि उच्च आयात शुल्क, ब्याज दर और सरचार्जों के मिश्रण के पाकिस्तान के लिए कर्ज चुका पाना जटिल हो जाएगा। ऐसे में पाकिस्तान को अपने घरेलू और निर्यात कीमतों को बढ़ाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

ऐसा करते ही वह अपने पड़ोसियों और दूसरे देशों से प्रतिस्पर्धा में काफी पिछड़ जाएगा क्योंकि दूसरे देश कम कीमतों को बरकरार रखेंगे।

पाक बनता जा रहा चीन का गुलाम

ईएफएसएएस रिपोर्ट में लिखा है, कर्ज लेने वाला हमेशा कर्जदाता का नौकर होता है। 15 साल का मेगा प्रोजेक्ट (सीपीईसी) बताता है कि किस तरह पाकिस्तान स्वेच्छा से चीन के नियम और शर्तों से उसका गुलाम बनता जा रहा है।।

वैसे चीन हमेशा से पाकिस्तान को अपना दोस्त बताता रहता है और 2015 में चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के पहले पाकिस्तान दौरे के वक्त उनके बयानों में भी इसकी झलक दिखती है।

लेकिन यह दोस्ती हमेशा से पाकिस्तान के लिए एक बोझ ही साबित होती आई है और इसकी वजह है उस पर चीन का आसमान छूता कर्ज।

सीपीईसी पाक के लिए हितकर नहीं

ईएफएसएएस रिपोर्ट में कहा गया है कि सीपीईसी पाकिस्तान के लिए हितकर नहीं है क्योंकि इसकी वजह से आगे चलकर उसे अंतहीन परेशानियां झेलनी पड़ेंगी।

अगर पाकिस्तान सीपीईसी से जुड़े हर प्रोजेक्ट्स के नफा-नुकसान का समझदारी से आकलन नहीं करता है तो चीन के लिए हर हाल में फायदे वाली स्थिति बनी रहेगी।

इसे ग्वादर पोर्ट मामले में देखा जा सकता है जहां इस ट्रेड रूट की वजह से होने वाले मुनाफे का 91 प्रतिशत हिस्सा 40 सालों तक चीन को जाएगा।

रिपोर्ट में कहा गया है कि चाइना डिवेलपमेंट बैंक और चाइना एक्सिम बैंक जो ब्याज दर चार्ज करते हैं, उसके हिसाब से चीन 3 साल से भी कम वक्त में अपने निवेश को रिकवर कर लेगा लेकिन पाकिस्तान को इसमें 25 साल लगेंगे।

चीन का दावा है कि सीपीईसी से पाकिस्तानियों को रोजगार के मौके मिलेंगे लेकिन यह दावा हवा-हवाई दिखने लगा है और नतीजतन लोगों में असंतोष और संदेह की भावना बढ़ने लगी है।

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