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चीनी सेना तिब्बत में कराएगी ''कृत्रिम बारिश'', भारत में बढ़ा बाढ़ का खतरा

चीन तिब्बत के 6 लाख 20 हजार वर्ग मील क्षेत्र में कृत्रिम बारिश कराने की तैयारी कर रहा हैं। एक मिलिटरी कंपनी ने इस काम में 500 विशेष मशीनों को लगाया है।

चीनी सेना तिब्बत में कराएगी

चीन अपने दक्षिणी इलाके को सूखे से राहत दिलाने के लिए बड़ी तैयारी कर रहा है। वह तिब्बत के पठार में मॉनसून के बादलों को बरसाने के लिए वहां ऐसी मशीनें लगा रहा है, जो सिल्वर आयोडीन की मदद से इस काम को मुमकिन बना सकेंगी।

इस काम को चीन की एक मिलिटरी कंपनी अंजाम दे रही है। वह अभी तक 500 मशीनें वहां लगा चुकी है। चीन की इस कोशिश से पड़ोसी देशों, खासकर भारत में आशंका पैदा हो रही है कि कहीं इससे भारत के मॉनसून पर तो असर नहीं पड़ेगा या फिर कहीं ज्यादा बारिश होने से तिब्बत से भारत आने वाली नदियों में बाढ़ तो नहीं आ जाएगी।

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बता दें कि चीन सरकार ने अपनी सैन्य कंपनी चाइना एयरोस्पेस साइंस एंड टेक्नॉलजी कॉर्पोरेशन को इस मिशन का जिम्मा सौंपा है। चीनी वैज्ञानिकों का इरादा तिब्बत के करीब छह लाख 20 हजार वर्ग मील क्षेत्र में कृत्रिम तरीके से बारिश कराने का है।

आपको बता दें कि तिब्बत के पठार से ब्रह्मपुत्र, सतलुज और सिंधु नदियां निकलती हैं, जो भारत में आती हैं। इसके साथ ही वहां से यांग्त्से, मीकॉन्ग और यलो रिवर भी निकलती हैं, जो चीन में बहती हैं।

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भारतीय वैज्ञानिकों ने कहा ‘फिजूल कवायद’

भारतीय वैज्ञानिक चीन की इस कोशिश को फिजूल की कवायद करार दे रहे हैं। भारत में मॉनसून की भविष्यवाणी करने वाले मुख्य वैज्ञानिक डॉ. डी. शिवानंद पई कहते हैं कि कृत्रिम रूप से बारिश कराने के प्रयास बहुत कारगर नहीं होते हैं।

साथ ही यह काफी महंगा भी पढ़ेगा। डॉ. पई के मुताबिक, भारत में मॉनसून के बादल अरब सागर, हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी से पैदा होते हैं और यह हिमालय से टकराकर भारत में बरसते हैं।

उनका कहना है कि तिब्बत में बंगाल की खाड़ी से बादल पहुंचते हैं और ऑस्ट्रेलिया से भी मॉनसूनी बादल वहां पहुंचते हैं। ऐसे में यह नहीं कहा जा सकता है कि इससे भारत को कोई नुकसान होगा।

इनपुट- भाषा

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