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भारत-अमेरिका के मध्य ''सुपरपावर'' समझौते ने उड़ाए चीन-पाक के होश

दोनों देश अब कर सकेंगे एक-दूसरे के सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल

भारत-अमेरिका के मध्य
नई दिल्ली. भारत और अमेरिका के बीच एक ऐतिहासिक समझौते ने चीन और पाकिस्तान को पस्त कर दिया। इस समझौते के तहत भारत और अमेरिका की सेना मरम्मत और सप्लाई को लेकर एक दूसरे के सैन्य ठिकानों और जमीन का इस्तेमाल कर सकेगी।
भारत और अमेरिका के रक्षा मंत्रियों ने इस बात पर मुहर लगाते हुए लॉजिस्टिक्स एक्सचेंज मेमोरेंडम आफ एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। चीन और पाकिस्तान की मीडिया ने इस समझौते को चिंताजनक बताते हुए इसे अपने लिए खतरा करार दिया है।
अमेरिका पहुंचे रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर और उनके समक्ष एश्टन कार्टर ने इस समझौते पर साइन किए। अब एक दूसरे के देश में जाने वाले युद्धक विमान जैसे संसाधन आसानी से मिल सकेगा।
समझौते पर हस्ताक्षर के बाद जारी साझा बयान में उन्होंने इस महत्व पर जोर दिया कि यह व्यवस्था रक्षा प्रौद्योगिकी एवं व्यापार सहयोग में नवोन्मेष और अत्याधुनिक अवसर प्रदान करेगा।
अमेरिका ने भारत के साथ रक्षा व्यापार और प्रोद्योगिकी को साझा करने को निकट साझेदारों के स्तर तक विस्तान देने पर सहमति जाताई है। बयान में कहा गया कि दोनों देशों के बीच रक्षा संबंध उनके साझा मूल्यों और हित पर आधारित है।
भारत-अमेरिका के बीच हुए इस करार को वैश्विक राजनीति में अमेरिका के एशिया में बढ़ते चीन के प्रभाव को रोकने की कवायद माना जा रहा है, वहीं, भारत द्वारा इसे चीन-पाकिस्तान गठजोड़ के प्रभाव व आतंकवाद को रोकने की कोशिशों से जोड़ा जा रहा है।
ओबामा की बिदाई के समय हुआ करार
अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल के अंतिम महीनों में इस बहुप्रतीक्षित करार को अंतिम रूप दिया जा सका, जिसका अनुमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पिछले अमेरिका दौरे के दौरान भी मीडिया लगा रहा था,हालांकि उस दौरान इसके दस्तावेज को अंतिम रूप दिया गया था।
अमेरिका में जलील हुए पाक राजदूत
अमेरिका में पाकिस्तान के राजदूत को उनके बर्ताव के लिए ओबामा प्रशासन ने जबर्दस्त फटकार लगाई है। सूत्रों के मुताबिक वाइट हाउस की तरफ भेजी गई एक आधिकारिक चिट्ठी में ओबामा प्रशासन का कहना है कि पाकिस्तानी राजदूत पर्दे के पीछे कश्मीर मुद्दे पर और न्यूक्लियर सप्लायर ग्रुप (एनएसजी) में भारत की मेंबरशिप के खिलाफ लामबंदी कर रहे थे। अमेरिकी की नजर में राजदूत जलील का यह बर्ताव आपत्तिजनक था और इसी वजह से उन्हें फटकार लगाई गई है।
इसलिए खास है समझौता
समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद अमेरिका ने अपने करीबी रक्षा सहयोगियों की भांति भारत के साथ भी रक्षा,व्यापार और तकनीक सांझा करने के पर सहमति जताई है। इसके साथ ही अमेरिका अपने करीबी सहयोगियों की तरह भारत के साथ भी रक्षा,व्यापार और तकनीक संबंधी सहयोग करने पर सहमत हो गया है ।
समझौते के तहत दोनों देशों के बीच सैन्य साजो सामान में सहयोग,आपूर्ति और सेवा मसलन भोजन,पानी, परिवहन,पेट्रोलियम, तेल, लुब्रिकेंट्स, कपड़े, संचार सेवाएं, चिकित्सा सेवाएं, भंडारण सेवाएं, प्रशिक्षण सेवाएं, कलपुर्जे और कंपोनेंट्स,मरम्मत और रख रखाव सेवाएं, जांच सेवाएं, और पोर्ट सेवाओं का आदान-प्रदान किया जा सकेगा।
दो तरफा साजो-सामान-आदान प्रदान सहयोग का इस्तेमाल संयुक्त अभ्यास,संयुक्त प्रशिक्षण और मानवीय सहायता तथा आपदा राहत के दौरान किया जाएगा ।
अमेरिका को ये फायदे
हिंद महासागर में अमेरिका की ताकत बढ़ जाएगी। हिंद महासागर में अमेरिका का सबसे शक्तिशाली बेस डिगो गार्सिया में है। 30 वर्ग किलोमीटर के इस द्वीप की भारत से दूरी तीन हजार किलोमीटर और दक्षिण चीन सागर की दूरी पांच हजार किलोमीटर है।
भारत को मिलेगा लाभ
भारत की नजर अमेरिका से सैन्य तकनीक हासिल करने पर है। जानकारों का मानना है कि मोदी सरकार यह मान चुकी है कि अगर भारत को सुपरपावर बनना है तो अमेरिका के करीब जाना होगा। इस समझौते से यह संभव होगा।
चीन चिड़चिड़ाया
दक्षिण चीन सागर के मुद्दे पर चीन संयुक्त राष्ट्र, अमेरिका और पड़ोसी देशों में से किसी की नहीं सुन रहा है। इस समझौते से चीन सागर में कार्रवाई करने की अमेरिका की क्षमता बढ़ेगी, जिससे चीन पर दबाव पड़ेगा।
पाक फड़फड़ाया
इस रक्षा समझौते का चीन-पाकिस्तान पर सीधा असर पड़ेगा। दोनों देशों को एशिया में चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने और आतंकवाद के खिलाफ जंग में मदद मिलेगी। जेट इंजन तकनीक और ड्रोन तकनीक मिलने के बाद पाकिस्तान की रक्षा कमजोर होगी।
संयुक्त बयान
यह समझौता व्यावहारिक संपर्क और आदान-प्रदान के लिए अवसर प्रदान करेगा और दोनों देशों की सेना के बीच साजो-सामान संबंधी सहयोग, आपूर्ति और सेवा की व्यवस्था प्रदान करेगा।
-एश्टन कार्टर, रक्षा मंत्री अमेरिका
खास बातें
-विमानों और युद्धपोतों को मिल सकेगा ईधन
-रक्षा व्यापार का भी किया जाएगा विस्तार
-9/11 हमले में मारे गए लोगों को पर्रिकर ने दी श्रद्धांजली
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