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चीन ने चंद्रमा के अंधेरे हिस्से में उतारा रोवर, साथ भेजा आलू, जानिए क्या है वजह

चीन ने बृहस्पतिवार को अंतरिक्ष के क्षेत्र में एक बड़ी छलांग लगाई है। चीन ने चंद्रमा के बाहरी हिस्से पर अपना स्पेस क्राफ्ट उतारा है। चंद्रमा के बाहरी हिस्से को हम ''डार्क साइड ऑफ द मून'' (Dark Side of the moon) या ''फार साइड ऑफ द मून'' (Far Side of the moon) कहते हैं।

चीन ने चंद्रमा के अंधेरे हिस्से में उतारा रोवर, साथ भेजा आलू, जानिए क्या है वजह
चीन ने बृहस्पतिवार को अंतरिक्ष के क्षेत्र में एक बड़ी छलांग लगाई है। चीन ने चंद्रमा के बाहरी हिस्से पर अपना स्पेस क्राफ्ट उतारा है। चंद्रमा के बाहरी हिस्से को हम 'डार्क साइड ऑफ द मून' (Dark Side of the moon) या 'फार साइड ऑफ द मून' (Far Side of the moon) कहते हैं। इससे पहले चंद्रमा पर चीन ने 2013 में अपना एक रोवर उतारा था। सोवित संघ और अमेरिका चीन से पहले अपना रोवर चंद्रमा की सतह पर उतार चुके हैं। लेकिन इस बार चीन ने जहां रोवर उतारा है वह धरती से दूर है। चीन ने इस मिशन का नाम चैंग-4 (Chang-4) रखा है। आइए जानते हैं इसके बारे में।

Chang-4 मिशन

चैंग-4 मिशन एक 'लूनर एक्स्प्लोरेशन मिशन' है। जब हम लूनर (Lunarploration Mission) शब्द कहते हैं तो वह चांद के लिए इस्तेमाल होता है। इस मिशन का उद्देश्य है कि चीन चांद के फार साइड ऑफ द मून पर एक रोवर लैंड करवाए। अब रोवर क्या है यह भी जान लें।

आसान भाषा में रोवर एक गाड़ी होगी। जिसपर कैमरा और कई तरह के यंत्र लगे होंगे। इसमें पहिए होंगे जिसके सहारे यह चंद्रमा की सतह पर चलेगा और खोज करेगा। इसे दो सैटेलाइट के सहार चलाया जाएगा। एक सैटेलाइट चंद्रमा के चारो ओर रहेगा। दूसरा सैटेलाइट पृथ्वी की कक्षा से बाहर होगा।

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पहला सैटेलाइट रोवर और दूसरे सैटेलाइट को जोड़ेगा। वहीं दूसरा सैटेलाइट पृथ्वी से जुड़ेगा। दोनों सैटेलाइट को 3B रॉकेट से लांच किया गया था। चांद पर किया गया यह चीन का चौथा मिशन है वहीं चांद की सतह पर चीन ने दूसरी बार रोवर उतारा है।

डार्क साइड ऑफ द मून

What is Dark side of the moon? आपने चांद को देखा होगा। महीने की 15 रातों में हम चांद देख सकते हैं। वहीं 15 रात चांद पूरी तरह गायब रहता है। जैसे पृथ्वी सूर्य का चक्कर लगाती है और खुद भी घूमती है। उसी तरह चंद्रमा भी है। चंद्रमा पृथ्वी का चक्कर लगाता है और साथ ही अपनी धुरी पर भी घूमता है।
चांद का यह हिस्सा पृथ्वी से नहीं देखा जा सकता। क्योंकि यह पिछला हिस्सा है।
चंद्रमा के पास अपनी कोई रोशनी नहीं है। वह सूर्य के प्रकाश से चमकता है। हमेशा से हमें रात में चांद का एक जैसा हिस्सा ही दिखता आया है। जो हिस्सा हमें दिखता है वह नियर साइड ऑफ द मून (Near Side Of the Moon) कहलाता है। जो हिस्सा हमें कभी नहीं दिखता वह डार्क साइड ऑफ द मून (Dark Side Of the Moon) कहलाता है। अब ऐसा नहीं है कि वहां कभी प्रकाश नहीं जाता। वहां प्रकाश तब पड़ता है जब चंद्रमा का वह हिस्सा सूर्य की तरफ पहुंच जाता है।

क्या-क्या लेकर गया है रोवर

चीन का रोवर चांद के डार्क साइड पर रिसर्च तो करेगा ही (chinese rover on moon)। लेकिन रोवर अपने साथ कुछ लेकर भी गया है। चीन का रोवर अपने साथ रेशम के कीड़ों के अंडे, कुछ पत्ते, पौधे, कई तरह के बीज, आलू के बीज लेकर गया है।
यह सारी चीजें एक तरह के बॉक्स में बंद है। चीन ने ऐसा क्यों किया इसका भी कारण है। रेशम के अंडों से जब कीड़े निकलेंगें तो वह कार्बन डाई ऑक्साइड गैस निकालेंगे। पौधे ऑक्सीजन निकालेंगे। यह एक तरह का प्रयोग होगा कि क्या चांद पर भी पृथ्वी की तरह जीवन हो सकता है।

भारत उतारेगा चंद्रयान-2

चीन की इस प्रगति के बाद भारत पर भी दबाव है कि वह चांद पर अपना रोवर उतारे। लेकिन इन दोनों में अगर तुलना की जाए तो चांद चंद्रयान-2 चीन के चैंग-4 से कमजोर है। चैंग 4 मिशन का रोवर 30 दिन यानी कि एक महीने तक चांद की सतह पर चल सकता है। जबकि चंद्रयान 2 के पास केवल 15 दिन चलने का ही ईंधन होगा।
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