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प्रशांत महासागर में दबदबा बनाने के लिए चीन ने चली नई चाल, अब सैन्य ठिकाना बनाने की तैयारी

वानूआतू में सैन्य ठिकाना बनाने को लेकर चीन एंव वानूआतू के बीच इस मुद्दे को लेकर शुरुआती स्तर की बातचीत पूरी हो चुकी है। इसके लिए चीन ने वानूआतू में 440 मिलियन यूअस डॅालर का निवेश करने की योजना बनाई है।

प्रशांत महासागर में दबदबा बनाने के लिए चीन ने चली नई चाल, अब सैन्य ठिकाना बनाने की तैयारी
चीन अपनी सीमा विस्तार को लेकर जल्द ही दक्षिण प्रशांत द्वीप राष्ट्र वानूआतू में सैन्य बेस बना सकता है। एक अंतरार्रष्ट्रीय अखबार में छपि खबर के मुताबिक चीन दक्षिणी प्रशांत में अपना एक स्थायी सैन्य ठिकाना चाहता है। जानकारों के मुताबिक अगर चीन ऐसा करने में कामयाब होता है तो इसके पूरी दुनिया पर दूरगामी असर पड़ेगा।
एक रिपोर्ट के मुताबिक चीन एंव वानूआतू ने इस मुद्दे पर शुरुआती स्तर की बातचीत पूरी हो चुकी है, लेकिन इस प्रस्ताव की कोई आधारिक घोषणा नहीं की गई है। वहीं सुरक्षा विशेषज्ञओं के मुताबिक शुरुआती स्तर की बात होने के बाद चीन के लिए वानूआतू में सैन्य बेस बनाने में कोई मुश्किल नहीं होने वाली हैं।
वानूआतू में चीन के सैन्य ठिकाना बनाने की इच्छा को लेकर ऑस्ट्रेलिया,अमेरिका और न्यूजीलैंड जैसे देशों ने गंभीर विचार-विमर्श कर अपनी चिंता भी जाहिर की हैं।मीडिया रिपोर्टस् के मुताबिक चीन जिस सैन्य ठिकाने की मंशा रखे हुए है वह ऑस्ट्रेलिया समुंद्री तट में मात्र 2000 किलोमीटर की दूरी पर है।
चीन की इस महत्वकांशा को जानकार प्रशांत महाद्वीप में अपनी सीमा विस्तार के रूप में देख रहे है। जिससे कि वह विश्व के सबसे ताकतवर देश अमेरिका से मौका आने पर सीधे टक्कर ले सके। गौरतलब है कि अमेरिका ने पहले भी प्रशांत महासागर में चीन के बढ़ते दखल की आलोचना की थी। तब से लेकर चीन किसी ना किसी बहाने से प्रशांत महासागर में अपने प्रभुत्व को बढ़ाने की कोशिश में लगा रहता है।
आपको बता दें कि अगर चीन वानूआतू में सैन्य बेस बनाने में कामयाब हो जाता है तो चीनी सैनिकों को प्रशांत महासागर में अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने का मौका मिल जाएगा। जिसे लेकर अमेरिका ने पहले ही अपनी आपत्ति जाहिर कर दी थी। चीनी सेना के प्रशांत महासागर में बढ़ते दखल अमेरिका के साथ-साथ ऑस्ट्रेलिया ने भी खिलाफत की है।
ऑस्ट्रेलिया के मुताबिक प्रशांत महासागर में चीन के बढ़ते प्रभाव को उनकी सीमा में दखल अंदाजी के रूप में देखता है। आपको बता दें कि अगर चीन अपने इस मनसूबे में कामयाब हो जाता है तो यह चीन के लिए अपने देश से बाहर प्रशांत महासागर में पहला और दुनिया में देश से बाहर का दूसरा सैन्य ठिकाना होगा।
आपको बता दें कि चीन प्रशांत महासागर में अपने प्रभाव को बढ़ाने के लिए काफी बढ़ी मात्रा में निर्माण कार्य के लिए लोन दे रहा हैं। रिपोर्टस् के मुताबिक वानूआतू को इसके लिेए चीन द्वारा 440 मिलियन यूअस डॅालर देने की घोषणा की गई है। यहीं नहीं चीन ने वानूआतू के प्रधानमंत्री शार्लोट साल्वाई के आधिकारिक घर के साथ-साथ अन्य सरकारी इमारतों के निर्माण की जिम्मेदारी ली हैं।
जानकारों के मुताबिक इसके इलावा चीन स्प्रीचु सेन्टों आईसलेंड के पास मौजूद नए वार्फ्र में बडीं मात्रा में पैसा लगा रहा है। आपको बता दे कि वार्फ्र वानूआतू इंटरनेशल एयरपोर्ट के काफी पास का इलाका हैं जिसका चीन विस्तार कर रहा है।
गौरतलब है कि चीन पहले प्रशांत महासागर में अपनी दावेदारी पेश कर चुका है और कई जगहों पर उसने अपनी सेना भी स्थापित कर रखी है। चीन के इस कदम की विश्व के लगभग हर देश ने आलोचना की है, ऑस्ट्रलिया भी उन्हीं में से एक हैं। आपको बता दें कि केवल वानूआतू एक मात्र देश है जिसने प्रशांत महासागर में चीन के दखल और निर्माण कार्य का समर्थन किया है।
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