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कश्मीर में पैलेट गन की जगह अब मिर्ची बम

पैलेट गन के इस्तेमाल से काफी लोगों की आंशिक या पूरी तरह से आंखों की रोशनी चली गई

कश्मीर में पैलेट गन की जगह अब मिर्ची बम
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श्रीनगर. हिंसाग्रस्त कश्मीर घाटी में प्रदर्शनों के दौरान उपद्रवियों पर सेना द्वारा पिदले छह साल से पैलेट गन (ये नॉन-लीथल यानी कम नुकसान पहुंचाने वाला हथियार) का प्रयोग किया जा रहा था और जिसको लेकर काफी बवाल मचा हुआ था। सरकार ने अब उसका विकल्प तलाश लिया है और उसकी जगह चिली ग्रेनेड्स और पेपर (काली मिर्च) का इस्तेमाल करने का फैसला लिया है।
गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने भी आज कश्मीर में प्रेस कांफ्रेस के दौरान कहा कि पैलेट गन के इस्तेमाल पर विचार करने विशेषज्ञों की एक कमेटी बनाई गई है जो एक -दो दिनों में अपनी सुझाव देगी। इसके बाद इस पर बैन लगा दिया जएगा। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस सप्ताह ही मिर्ची बम प्रयोग किया जा सकता है।
बता दें कि हाल ही में कश्मीर में विरोध-प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल से काफी लोगों की आंशिक या पूरी तरह से आंखों की रोशनी चली गई थी। जिसके बाद गृह मंत्रालय ने इसकी जगह पर किसी दूसरे हथियार के बारे में सुरक्षा बलों को देने की बात कही। बताया जा रहा है कि मिर्ची बम से भीड़ को बिना ज्यादा नुकसान के आसानी से तितर-बितर किया जा सकता है।
क्या होता है मिर्ची बम
पेपर गन में मिर्ची से भरी गोलियां होती हैं जिनसे आंख, नाक और गला प्रभावित होता है। जैसा कि नाम से स्पष्ट है चिली ग्रेनेड में पूर्वोत्तर में पाई जाने वाली दुनिया की सबसे तीखी मिर्च भुत जोलोकिया के पाउडर का इस्तेमाल होता है।
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