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नोटबंदी: कहीं छात्र ने की आत्महत्या तो कहीं 3 साल की मासूम की मौत

मवाई गांव में ग्रामीणों ने बैंक का फर्नीचर तोड़ डाला।

नोटबंदी: कहीं छात्र ने की आत्महत्या तो कहीं 3 साल की मासूम की मौत
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लखनऊ. 8 नवंबर को प्रधानमंत्री के 1000 और 500 को नोट पर पाबंदी के ऐलान के बाद कैश की दिक्कत के चलते उत्तर प्रदेश के बांदा में एक बच्ची की जान चली गई। बांदा में ही बैंक से पैसा ना मिल पाने पर छात्र ने खुदकुशी कर ली। उत्तर प्रदेश के बांदा जिले का मजदूर धर्मेंद्र सोमवार को इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक की टिंडवारी शाखा पर रुपये निकालने को पहुंचा था। धर्मेंद्र के साथ बुखार से तप रही उसकी तीन साल की बेटी भी थी। बैंक की लाइन में कुछ देर लगे रहने के बाद जब लोगों ने तीन साल की उसकी बेटी अंकिता की हालत देखी तो उसे पहले बैंक से रुपये ले लेने को कहा, ताकि बच्ची को दवा मिल सके। धर्मेंद्र बैंक में गया लेकिन कुछ देर बाद खाली हाथ वापस आ गया। बैंक से बाहर आते समय ही तीन साल की अंकिता ने दम तोड़ दिया।
बच्ची के शव को बांदा-फतेहपुर रोड पर रखा
धर्मंद्र का कहना है कि वो अपने बैंक के खाते से 2500 रुपये निकालना चाहता था और इसके लिए उसने फार्म भी भरा था लेकिन मैनेजर ने पैसे देने से इंकार कर दिया। धर्मेंद्र की गोद में बच्ची की लाश और मैनेजर के रुपये ना देने की बात पर गांव के लोग भड़क गए। ग्रामीणो की भारी भीड़ सड़क पर आ गई और बच्ची के शव को बांदा-फतेहपुर रोड पर रखकर रास्ता जाम कर दिया। ग्रामीणो को समझाने पहुंचे आधिकारियों से गांव के लोगों ने मैनेजर के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। पुलिस अधिकारियों ने मैनेजर के खिलाफ कार्रवाई का भरोसा दिलाया तो लोगों ने जाम खोला। घटना को लेकर क्षेत्र के लोगों में रोष है।
छात्र ने लगा ली फांसी
बांदा में ही नोटबंदी के कारण एक और मौत का मामला सामने आया है। जिले के मवाई बुजुर्ग गांव में 19 साल के सुरेश प्रजापति ने खुद को फांसी लगाकर जान दे दी। सुरेश को चौथी बार बैंक से कैश ना मिलने पर मैनेजर के साथ उसका मनमुटाव हुआ था। सुरेश ने बीते शुक्रवार को बैंक में 30 हजार रुपये के पुराने नोट जमा कराए थे। जिसके बाद वो दस हजार के नए नोट चाहता था। सुरेश के पिता लालूराम के अनुसार, सुरेश बांदा कॉलेज में बीएसई दूसरे वर्ष का छात्र था। लालू के अनुसार, बुधवार को सुरेश को फीस जमा करने का आखिरी दिन था। फीस के लिए पैसे ना मिल पाने से वो दुखी था। वो बैंक से लौट कर आने के बाद कमरे में उदास बैठा था। घटना का पता जब चला जब सुरेश की मां ने खाने के लिए उसको आवाज लगाई और उसके जवाब ना देने पर कमरे में जाकर देखा तो उसने खुद को फंदे से लटकाया हुआ था। घटना के बाद गांववाले भड़क गए और उन्होंने बैंक पर हमला कर दिया। ग्रामीणों ने बैंक का फर्नीचर तोड़ डाला और बिल्डिंग को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की।
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