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तो बच्चों को न्याय दिलाने के मामले में जज साहब को कोई रूचि नहीं…

देशभर में पोक्सो कानून से जुड़े हुए कुल 29 हजार 687 मामले लंबित हैं।

तो बच्चों को न्याय दिलाने के मामले में जज साहब को कोई रूचि नहीं…

एक ओर देश में बाल अपराधों का आंकड़ा तेजी से आसमान छूता हुआ नजर रहा है। वहीं अदालतों में मामलों के निपटारे की रफ्तार कछुआ चाल की गति से आगे बढ़ती हुई दिखाई दे रही है।

यही वजह से राज्यों में पोक्सो और जेजे कानून को लेकर प्रकरणों का ढेर लगने लगा है और राज्य इसकी जानकारी केंद्र से साझा करने में हिचकिचाने लगे हैं।

हरिभूमि को अपनी पड़ताल में पोक्सो, जेजे कानून के लंबित व निपटाए जा चुके मामलों की मिली जानकारी के मुताबिक 36 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में पोक्सो कानून से जुड़े हुए कुल 29 हजार 687 मामले लंबित हैं। इनमें से केवल 1 हजार 193 मामलों का ही निपटारा हुआ है।

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इसके अलावा जेजे एक्ट के तहत जेजे बोर्ड में लंबित मामलों का आंकड़ा 40 हजार 841 है। इसमें से केवल 3 हजार 762 का निपटारा किया गया है। ऐसे में दोनों कानूनों के उचित क्रियान्वयन के लिए लंबित मामलों का त्वरित निपटारा बेहद जरूरी हो जाता है।

सुको से अपील करेगा आयोग

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) के सदस्य यशवंत जैन ने कहा कि यह तथ्य बिलकुल सही है कि बाल अपराधों से जुड़े मामलों के निपटारे की राज्यों में रफ्तार बेहद धीमी है। लेकिन इसमें अदालतों में मामलों का लंबित होना एक बड़ा कारण है।

आयोग इसमें तेजी लाने के लिए सर्वोच्च न्यायालय से तमाम राज्य अदालतों में लंबित पड़े प्रकरणों के त्वरित निस्तारण के संबंध में अपील कर सकता है। पोक्सो कानून से जुड़े कुल मामलों में अब तक निपटाए गए मामलों का परिणाम 4.01 फीसदी और जेजे कानून में 9.21 फीसदी है।

राज्यों को आयोग की फटकार

आयोग ने इस संबंध में राज्यों को हर महीने की 10 तारीख को दोनों कानूनों के संबंध में विस्तार से जानकारी देने को कहा था। लेकिन राज्यों द्वारा इसका कड़ाई से पालन न करने के चलते हाल ही में कमीशन ने उन्हें सख्त लहजे में फटकारते हुए कहा है कि वह मामले में किसी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं करेगा।

इसके बाद अब धीरे-धीरे राज्यों ने आयोग को जानकारी भेजने शुरू कर दी है। लेकिन बावजूद इसके समूचा डेटा आने में समय लगेगा।

आधी-अधूरी जानकारी देते राज्य

पोक्सो कानून को लेकर महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा 12 हजार 990 मामले अदालत में लंबित हैं। इनमें से कितने मामलों का निपटारा हुआ है। इसे लेकर महाराष्ट्र प्रशासन मौन है।

दूसरे स्थान पर 4 हजार 275 मामलों के साथ केरल है। प्रदेश सरकार ने भी आयोग को निपटाए जा चुके मामलों की कोई जानकारी नहीं दी है।

तीसरे स्थान पर 3 हजार 828 मामलों के साथ राजस्थान है। प्रदेश ने 83 मामलों का निपटारा कर दिया है। जेजे कानून को लेकर सबसे ज्यादा 18 हजार 526 लंबित मामले उत्तर-प्रदेश से जुड़े हुए हैं। सूबे ने 912 मामलों को हल किया है।

दूसरे स्थान पर 9 हजार 539 मामलों के साथ छत्तीसगढ़ है। सूबे में 653 मामलों को निपटारा किया जा चुका है। तीसरे स्थान पर ओड़िशा में कुल लंबित मामले 4750, निपटाए गए मामलों की संख्या 306 है।

हरियाणा, मप्र, दिल्ली की स्थिति

हरियाणा में पोक्सो के 124 मामले अदालत में लंबित हैं। जबकि अब तक कितने मामलों का निपटारा किया जा चुका है। इसपर हरियाणा ने कोई जानकारी आयोग से साझा नहीं की है। मध्य-प्रदेश ने भी इसी तर्ज पर केवल 1 हजार 241 लंबित मामलों की जानकारी दी है।

छत्तीसगढ़ में 347 मामले लंबित हैं, जिसमें से 94 का निपटारा किया जा चुका है। दिल्ली ने आयोग को केवल 202 लंबित मामलों की ही जानकारी भेजी है। जेजे एक्ट के बारे में हरियाणा, मप्र ने कमीशन को कोई जानकारी नहीं दी है। दिल्ली ने बताया है कि उसके यहां 1 हजार 619 मामले लंबित हैं, जिसमें से 421 मामलों को हल किया जा चुका है।

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