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''मोदी सरकार को जज नहीं मित्र चाहिए'' चीफ जस्टिस लोढ़ा ने सरकार की आलोचना की

गोपाल सुब्रमण्यम मामला: ''मोदी सरकार जज नहीं मित्र चहिए'', चीफ जस्टिस लोढ़ा ने सरकार की आलोचना की

नई दिल्ली. नरेंद्र मोदी की सरकार द्वारा जजों की नियुक्ति में सीनियर ऐडवोकेट गोपाल सुब्रमण्यम की अनदेखी करने पर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस आरएम लोढ़ा ने सरकार की आलोचना की है। नियुक्ति विवाद मामले में उस समय नया मोड आ गया जब चीफ जस्टिस लोढा ने मंगलवार को जस्टिस बीएस चौहान के विदाई समारोह में कहा कि वह तीन अन्य लोगों की फाइलों को मंजूरी देने लेकिन उनसे सलाह लिए बिना सुब्रमण्यम की फाइल रोकने के मोदी सरकार के फैसले पर हैरान हैं। गोपाल सुब्रमण्यम ने मोदी करकार पर आरोप लगाते हुएकहा कि है कि मोदी सरकार को जज नहीं मित्र चहिए हैं।
चीफ जस्टिस लोढ़ा ने कहा कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता से कोई समझौता नहीं हो सकता। यदि कोई समझौता किया गया तो वह एक दिन भी मुख्य न्यायाधीश के पद पर नहीं रहेंगे। हालांकि उन्होंने इस बात पर भी निराशा जाहिर की कि जब वह विदेश में थे तो सुब्रमण्यम ने अपनी शिकायत सार्वजनिक कर दी। हम आपको बताते चलें कि सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ वकील गोपाल सुब्रमण्यम की सुप्रीम कोर्ट जज के तौर पर नियुक्ति की सिफारिश की गई थी, लेकिन उन्होंने अपना नामांकन वापस ले लिया था। इस बारे में सुब्रमण्यम ने चीफ जस्टिस को चिट्ठी लिखकर कहा था कि जज के तौर पर मेरी नियुक्ति की सिफारिश को वापस ले लिया जाए।
गोपाल सुब्रमण्यम यूपीए सरकार में सॉलिसिटर जनरल रह चुके हैं। ऐसा बताया जा रहा है कि सोहराबुद्दीन फर्जी मुठभेड़ मामले में उनकी भूमिका के चलते ऐसा किया जा रहा है।एनडीए सरकार ने जजों की नियुक्ति करने वाले कॉलेजियम को एक पत्र लिख कर कहा गया था कि सुब्रमण्यम की सिफारिश पर फिर से विचार करें। इस बात पर सुब्रमण्यम काफी नाराज थे।
नीचे की स्लाइड्स में पढ़िए, जस्टिस लोढ़ा ने और क्या कहा गया था-
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