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इकोनॉमिक सर्वे 2018ः जीडीपी और रोजगार में होगी बढ़ोत्तरी, जलवायु परिवर्तन से कृषि पर होगा असर

रिपोर्ट पेश करते हुअ अरविंद सुब्रमण्यन ने कहा कि इस आने वाले दिनों में जनता को आर्थिक रूप से राहत मिलेगी। नए वित्त वर्ष मे अर्थव्यवस्था तेजी पकड़ेगी।

इकोनॉमिक सर्वे 2018ः जीडीपी और रोजगार में होगी बढ़ोत्तरी, जलवायु परिवर्तन से कृषि पर होगा असर

भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकर अरविंद सुब्रमण्यन ने आर्थिक समीक्षा 2017-18 को पेश किया। रिपोर्ट पेश करते हुअ अरविंद सुब्रमण्यन ने कहा कि इस आने वाले दिनों में जनता को आर्थिक रूप से राहत मिलेगी। नए वित्त वर्ष मे अर्थव्यवस्था तेजी पकड़ेगी।

मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन द्वारा तैयार आर्थिक समीक्षा के मुताबिक नोटबंदी का प्रभाव कम होने, वैश्विक मांग बहाल होने और घरेलू स्तर पर कुछ नीतिगत कदमों से अगले वित्त वर्ष में विकास दर 7 से 7.5 फीसदी रहने का अनुमान है।

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समीक्षा में कहा गया है कि 2017-18 की दूसरी छमाही में वृद्धि के मजबूत संकेत हैं और पूरे वर्ष के दौरान विकास दर 6.75 फीसदी रहेगी। केंद्रीय सांख्यिकी संगठन ने इस वित्त वर्ष में विकास दर 6.5 फीसदी रहने का अनुमान जताया था।

समीक्षा में इस बात को माना गया कि 2017-18 में राजकोषीय घाटा, चालू खाता और महंगाई अनुमान से ज्यादा रही। विनिर्माण क्षेत्र अब भी जूझ रहा है और फैक्टरी निर्यात और जीडीपी का अनुपात घट रहा है। कृषि में भी 4 वर्षों में वास्तविक कीमत में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है।

जीडीपी में बढ़ोत्तरी

समीक्षा के मुताबिक आयकर संग्रह जीडीपी के 2.3 फीसदी तक पहुंचकर नया रिकॉर्ड बना देगा। यह दावा भी किया गया है कि जीएसटी के बाद अप्रत्यक्ष कर संग्रह में 12 फीसदी बढ़ोतरी होगी।

कृषि आय में 20-25 फीसदी कमी

आर्थिक समीक्षा में विश्लेषकों ने कहा कि कृषि क्षेत्र पर खासतौर पर करीबी नजर रहेगी, क्योंकि आम चुनावों को देखते हुए राजनीतिक दृष्टिकोण से केंद्र सरकार का इस पर जोर रहेगा।

समीक्षा में कृषि क्षेत्र में आय के स्थिर रहने को रेखांकित किया गया है और कहा गया है कि देश के कृषि क्षेत्र का प्रतिफल बारिश और तापमान में उतार-चढ़ाव के लिहाज से बेहद संवेदनशील है। इस वजह से आने वाले समय में जलवायु परिवर्तन का कृषि क्षेत्र के उत्पादन पर गंभीर असर पड़ सकता है और किसानों की आय भी प्रभावित होगी।

समीक्षा में अनुमान लगाया गया है कि जलवायु परिवर्तन के कारण मध्य अवधि में कृषि आय में 20 से 25 फीसदी तक कमी आ सकती है।

औपचारिक रोजगार में 30 फीसदी इजाफा

समीक्षा में देश में औपचारिक रोजगार के दावों के लिए जीएसटी रिटर्न और कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के आंकड़ों का भी उपयोग किया गया है, जो पिछले अनुमान से काफी ज्यादा है।

इसमें कहा गया है कि अगर इसे सामाजिक सुरक्षा प्रावधानों के तहत परिभाषित किया जाए तो औपचारिक रोजगार में 30 फीसदी से ज्यादा का इजाफा हुआ है और अगर जीएसटी के लिहाज से देखें तो इसमें 50 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है।

बचत दर में होगा इजाफा

समीक्षा में कहा गया है कि गैर-कृषि क्षेत्र का आधे से अधिक कार्यबल पहले से ही औपचारिक क्षेत्र में है। समीक्षा में कहा गया है कि जीएसटी और नोटबंदी जैसे हालिया नीतिगत बदलावों से बचत दर में इजाफा हुआ है। समीक्षा में तर्क दिया गया है कि निवेश में सुधार हो रहा है और अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए यह खासा अहम है।

हालांकि इसमें यह भी जिक्र किया गया है कि इक्विटी की लागत घटकर निचले स्तर पर आ गई है लेकिन कॉरपोरेट की ओर से उतनी मात्रा में पूंजी नहीं जुटाई जा रही है। इससे पता चलता है कि उनकी निवेश योजना नरम बनी हुई है।

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