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महिलाओं को पंचायतों के सोशल ऑडिट की जिम्मेदारी देने वाले पहला राज्य बना छत्तीसगढ़

सीएम रमन सिंह की राज्य सरकार महिला स्वसहायता समूहों को पंचायतों के कामकाज की सोशल ऑडिट की जिम्मेदारी सौंप रही है।

महिलाओं को पंचायतों के सोशल ऑडिट की जिम्मेदारी देने वाले पहला राज्य बना छत्तीसगढ़
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रायपुर। महिला सशक्तिकरण की दिशा में मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में राज्य सरकार एक सार्थक पहल करते हुए महिला स्वसहायता समूहों को पंचायतों के कामकाज के सामाजिक अंकेक्षण (सोशल ऑडिट) की भी जिम्मेदारी सौंप रही है। ऐसा करने वाला छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है। तीन स्तरों वाली पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण देने के बाद यह राज्य सरकार का एक और महत्वपूर्ण कदम है।

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प्रशिक्षण भी दिया जा रहा
पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों ने यहां बताया कि महिला समूहों को पंचायतों के कामकाज के सामाजिक अंकेक्षण में भागीदार बनाने के लिए उन्हें प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। प्रथम चरण में राज्यस्तर पर विगत लगभग तीन माह में 14 हजार 435 महिला स्वसहायता समूहों को इसके लिए प्रशिक्षित किया जा चुका है।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम विगत दो अक्टूबर से शुरू हुआ था, जो इस महीने की छह तारीख को पूरा हुआ। उन्हें मनरेगा और इंदिरा आवास योजना के तहत भौतिक सत्यापन, सामाजिक जवाबदेही, योजनाओं का लेखा परीक्षण, स्वीकृत कार्यों पर चर्चा, सोशल ऑडिट का आवश्यक दस्तावेजीकरण एवं प्रतिवेदन लेखन जैसे कार्यों का प्रशिक्षण दिया गया है।

गुणवत्ता में सुधार आया

अधिकारियों ने बताया कि महिला स्वसहायता समूह की भागीदारी से सामाजिक अंकेक्षण कार्य की गुणवत्ता में सुधार आया है और सोशल ऑडिट के कार्य में अधिक पारदर्शिता सुनिश्चित हो रही है। शासन की इस पहल से ग्रामसभाओं में महिलाओं की सहभागिता बढ़ रही है और ग्रामसभाएं सशक्त हो रही हैं। ग्रामसभाओं में महिलाओं की भागीदारी से शासन की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों को और अधिक पारदर्शिता के साथ मिल पा रहा है।

कार्यक्रम तैयार किया गया
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीयस्तर पर सामाजिक अंकेक्षण कार्य की गुणवत्ता और महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए एसएचजी-व्हीआरपी प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार किया गया है। महिला समूहों के प्रशिक्षण के लिए विकासखंड स्तर पर 120 मास्टर प्रशिक्षक तैनात किए गए हैं। इस वर्ष छह जनवरी तक इस कार्यक्रम के तहत महिला स्व-सहायता समूहों को 441 सत्रों में प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
प्रशिक्षित महिलाएं स्थानीय और क्षेत्रीय भाषाओं में बातचीत करती हैं, इससे पंचायतस्तर पर ग्रामीणों से योजनाओं के क्रियान्वयन की जानकारी प्राप्त करने में आसानी हो रही है। साथ ही लोगों को सामाजिक अंकेक्षण के उद्देश्यों और विभिन्न योजनाओं की जानकारी बेहतर ढंग से मिल रही है।

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