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सामान्य वर्ग के गरीबों के लिये 10 फीसदी आरक्षण के विधेयक को SC में चुनौती

सामान्य वर्ग में आर्थिक रूप से पिछड़े तबके के लिये नौकरियों और शिक्षा में दस फीसदी आरक्षण की व्यवस्था करने वाले संविधान संशोधन विधेयक को बृहस्पतिवार को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी गयी।

सामान्य वर्ग के गरीबों के लिये 10 फीसदी आरक्षण के विधेयक को SC में चुनौती

सामान्य वर्ग में आर्थिक रूप से पिछड़े तबके के लिये नौकरियों और शिक्षा में दस फीसदी आरक्षण की व्यवस्था करने वाले संविधान संशोधन विधेयक को बृहस्पतिवार को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी गयी। उसे इस आधार पर चुनौती दी गई कि यह 50 फीसदी आरक्षण की सीमा का उल्लंघन करता है। इस विधेयक को एक दिन पहले ही संसद की मंजूरी मिली।

गैर सरकारी संगठन यूथ फॉर इक्वैलिटी और उसके अध्यक्ष डॉ. कौशल कांत मिश्रा द्वारा दायर याचिका में कहा गया कि मौजूदा स्वरूप में आरक्षण की ऊपरी सीमा 60 फीसदी तक पहुंच जाएगी, जो शीर्ष अदालत के फैसलों का उल्लंघन है।
संगठन ने 124 वें संविधान संशोधन विधेयक पर रोक लगाने ओर उसे निरस्त करने की मांग की है और कहा कि इससे संविधान के बुनियादी ढांचे का उल्लंघन होता है और आर्थिक पैमाना आरक्षण के लिये एकमात्र आधार नहीं हो सकता है।
याचिका में कहा गया है कि आर्थिक आधार पर आरक्षण को सिर्फ सामान्य श्रेणी तक सीमित नहीं किया जा सकता है और 50 फीसदी आरक्षण की सीमा लांघी नहीं जा सकती।
इंदिरा साहनी मामले में शीर्ष अदालत के 1992 के नौ न्यायाधीशों की पीठ के ऐतिहासिक फैसले का उल्लेख करते हुए याचिका में कहा गया है कि ताजा संशोधन पूरी से इस संवैधानिक मापदंड का उल्लंघन करता है कि आर्थिक पैमाना आरक्षण का एकमात्र आधार नहीं हो सकता है।
याचिका में कहा गया है, ‘‘इस तरह का संशोधन इसलिये संवेदनशील है और इसे निरस्त किया जाना चाहिये क्योंकि यह बाध्यकारी फैसले को निष्प्रभावी बनाता है।'
याचिका में कहा गया है, ‘‘मौजूदा संशोधन के जरिये ओबीसी और एससी-एसटी को आर्थिक आधार पर आरक्षण के दायरे से बाहर रखने का मतलब है कि सिर्फ सामान्य श्रेणी में जो गरीब हैं वही इस आरक्षण का लाभ पा सकेंगे।' बाद में एक विज्ञप्ति में संगठन ने कहा कि वह सिद्धांत रूप में इस कदम का स्वागत करता है और संरक्षणात्मक भेदभाव का आधार जाति की जगह गरीबी को बनाया गया है।
संगठन ने कहा, ‘‘हालांकि, कुल आरक्षण की सीमा बढ़ाकर 60 फीसदी कर दी गई है। यह कई समस्याएं पैदा करेगा। अब और राजनीतिक दल, जाति समूह केंद्र और राज्य स्तर पर आरक्षण का प्रतिशत बढ़ाने की मांग करेंगे।'
यूथ फॉर इक्वैलिटी ने मांग की कि 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण को भी जातिगत आधार की जगह आर्थिक पैमाने की कसौटी के दायरे में लाया जाए। राज्य सभा ने बुधवार को 124वें संविधान संशोधन विधेयक को सात के मुकाबले 165 मतों से पारित किया था।
सदन ने विपक्षी सदस्यों के पांच संशोधनों को अस्वीकार कर दिया। इससे पहले, मंगलवार को लोक सभा ने इसे पारित किया था। विधेयक अब राष्ट्रपति के पास मंजूरी के लिये जाएगा।
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