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‘नमामि गंगे’मिशन के लिए केंद्र की रफ्तार हुई तेज

कृषि मंत्रालय कृषि व सिंचाई योजनाओं से करेगा मदद

‘नमामि गंगे’मिशन के लिए केंद्र की रफ्तार हुई तेज
नई दिल्ली. ‘नमामि गंगे’ मिशन को तेजी से लागू करने के प्रयास में जुटी केंद्र सरकार ने एक और कदम आगे बढ़ाया, जिसमें कृषि सिंचाई और किसानों से संबन्धित योजनाओं के जरिए कृषि मंत्रालय मदद के लिए आगे आया है। इसमें गंगा किनारे जल सरंक्षण के लिए सूक्ष्म सिंचाई को बढ़ावा मिल सकेगा। नई दिल्ली में शुक्रवार को केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास तथा गंगा संरक्षण मंत्रालय ने कृषि तथा किसान कल्याण मंत्रालय के साथ एक सहमति ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गये हैं। इसके तहत ‘नमामि गंगे’ कार्यक्रम को तेजी से लागू करने में आ रही कृषि संबन्धी अड़चने दूर करने का प्रयास है। दरअसल कृषि मंत्रालय से सहमति ज्ञापन के तहत गंगा किनारे के गांवों में जैविक कृषि का विकास करने की योजना को बल देने के लिए परियोजना में प्रत्येक ग्राम पंचायत एक क्लस्टर का प्रतिनिधित्व करने का प्रस्ताव है।
वहीं गंगा स्वच्छता के प्रति जागरूकता कार्यक्रमों, स्वयं सहायता समूहों तथा मोबाइल एप के माध्यम से जैविक खेती को प्रोत्साहन दिया जा सकेगा। इस करार के तहत कृषि मंत्रालय रसायन, उर्वरक और कीटनाशकों के संतुलित उपयोग के लिए जागरूकता पैदा करेगा, ताकि गंगा बेसिन में जल संरक्षण के लिए सूक्ष्म सिंचाई को बढ़ावा मिले और किसानों को लाभान्वित किया जा सके। यही नहीं कृषि मंत्रालय गंगा किनारे आजीविका से जुड़े पशुपालन आधारित प्राकृतिक खेती को भी बढ़ावा देगा। जल संसाधन मंत्रालय राज्य सरकारों तथा राज्य स्तरीय क्रियान्वयन एजेंसियों के बीच कृषि तथा किसान कल्याण मंत्रालय की विभिन्न गतिविधियों में जरूरी तालमेल सुनिश्चित करेगा। इस सहमति ज्ञापन की उपलब्धि और क्रियान्वयन की प्रगति की निगरानी प्रत्येक मंत्रालय के नोडल अधिकारियों की संचालन समिति द्वारा की जाएगी। तीन महीने में एक बार या आवश्यकता अनुसार समिति की बैठक होगी, जिसमें सहमति ज्ञापन की प्रगति की समीक्षा की जाएगी।
कई मंत्रालयों का समावेश
मोदी सरकार ने एकीकृत गंगा संरक्षण मिशन के रूप में ‘नमामि गंगे’ कार्यक्रम शुरू किया है, जिस पर 12,728 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। वहीं इस कार्यक्रम के तहत 7272 करोड़ रुपये की लागत वाली कई परियोजनाएं शुरू कर दी गई है, इस करार के तहत उन्हें भी कवर किया जाएगा। इसका मकसद कार्य कुशलता बढ़ाकर सम्मिलित रूप से बेहतर तालमेल के माध्यम से पुराने और नये प्रयास एकीकृत करना है। गौरतलब है कि इससे पहले जल संसाधन मंत्रालय ने पहला समझौता ज्ञापन गत तीन दिसंबर 2015 को रेल मंत्रालय के साथ किया था, जिसके बाद ‘नमामि गंगे’ कार्यक्रम में भाग लेने वाले सात मंत्रालयों-शिपिंग, मानव संसाधन और विकास, ग्रामीण विकास, पर्यटन, आयुष, युवा मामले और खेल तथा पेय जल और स्वच्छता के साथ भी सहमति ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गये और इस परियोजना को तेजी से लागू करने की कवायद जारी है।
कृषि मंत्रालय की ये होगी भूमिका
केंद्रीय जल संसाधन मंत्री सुश्री भारती ने कहा कि इस सहमति ज्ञापन पर हस्ताक्षर से कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय से तालमेल के साथ ‘नमामि गंगे’ की विभिन्न परियोजनाओं का कारगर तरीके से कार्यान्वयन सुनिश्चित हो सकेगा। उन्होंने कहा कि ‘नमामि गंगे’ बहुविषयी कार्यक्रम होने के नाते इस परियोजना को अंजाम देने के लिए अन्य मंत्रालयों, राज्य सरकारों तथा स्थानीय समुदायों की भागीदारी अति आवश्यक है। सुश्री भारती ने उम्मीद जताई कि कृषि मंत्रालय ‘नमामि गंगे’ कार्यक्रम की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
कृषि और किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने ‘नमामि गंगे’ कार्यक्रम को सफलतापूर्वक लागू करने में जल संसाधन मंत्रालय को सभी आवश्यक सहायता देने का भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि ‘नमामि गंगे’ कार्यक्रम मोदी सरकार का प्रमुख कार्यक्रम है और उन्हें आशा है कि इस सहमति से इस परियोजना में तेजी लाने में मदद मिलेगी। इस समझौता ज्ञापन पर जल संसाधन मंत्रालय, नदी विकास तथा गंगा संरक्षण मंत्रलाय के राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) के अपर मिशन निदेशक हरी हर मिश्रा और कृषि तथा किसान कल्याण मंत्रालय के अपर आयुक्त डा. एस.एस. तोमर, ने केंद्रीय मंत्रियों सुश्री उमा भारती तथा राधा मोहन सिंह की मौजूदगी में हस्ताक्षर किए। यह सहमति ज्ञापन तीन वर्षों के लिए किया गया है और दोनों पक्षों की सहमति से इसकी अवधि बढ़ाई जा सकती है।

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