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राजनाथ के दौरे के बाद, कश्मीर नीति में हो सकता है ये बड़ा बदलाव

सरकार ने निर्देश दिया है कि घाटी में कोई भी आतंकी संगठन न रह पाए।

राजनाथ के दौरे के बाद, कश्मीर नीति में हो सकता है ये बड़ा बदलाव
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मोदी सरकार कश्मीर को लेकर अपनी नीति में कोई बड़ा बदलाव कर सकती है। केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह के हालिया जम्मू-कश्मीर दौरे को इसी से जोड़कर देखा जा रहा है।

दरअसल, अपने चार दिवसीय दौरे में राजनाथ सिंह ने यह बताने की कोशिश की कि लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री मोदी द्वारा दिया गया संदेश, सरकार का स्टैंड था और इसका असर वह श्रीनगर के लाल चौक तक दिखाएंगे।

सूत्रों के अनुसार इस दौरे के बाद सरकार की कश्मीर नीति में अगले कुछ दिनों में बदलाव दिख सकता है। सरकार की सबसे बड़ी चिंता थी कि उनकी सख्त नीति का कश्मीर में गलत संदेश जा रहा है। उस पर भाजपा नेताओं के बयान इस धारणा को मजबूत कर रहे थे।

जम्मू-कश्मीर की सीएम महबूबा मुफ्ती ने दिल्ली में पीएम मोदी और राजनाथ से मिलकर इस चिंता की जानकारी दी। इसके बाद राजनाथ को खास तौर पर कश्मीर भेजा गया।

सरकार की मंशा है कि आम कश्मीरियों तक यह संदेश जाए कि दिल्ली कश्मीर और कश्मीरियत दोनों के साथ है। इस मामले में राजनाथ ने 4 दिनों में लगभग 100 से अधिक संगठनों से बात कर संदेश देने में कुछ हद तक सफलता भी पाई।

धारा 35-ए पर संदेह दूर किया

कश्मीर में जारी संकट के बीच धारा 35-ए पर नया विवाद खड़ा हो गया था। सुप्रीम कोर्ट में इससे संबंधित केस दायर हुआ। इसके बाद से कश्मीर में हालात और बिगड़ने लगे।

इस मुद्दे पर पीडीपी और नेशनल कॉन्फ्रेंस तक एक हो गए, लेकिन राजनाथ ने इस मुद्दे पर कश्मीर जाकर कहा कि सरकार कोई भी ऐसा फैसला नहीं लेगी, जिससे कश्मीर के लोगों के हित प्रभावित हों। इस बयान का बड़ा असर हुआ।

पीएम ने 15 अगस्त को दिया था संदेश

15 अगस्त को पीएम मोदी ने कश्मीर में जारी लगातार तनाव और अस्थिरता के बीच अपनी मौजूदा नीति में बड़े बदलाव का संकेत दिया था।

मोदी ने कहा था कि कश्मीर समस्या न तो गाली से सुलझने वाली है, न गोली से। यह समस्या हर कश्मीरी को गले लगाकर सुलझने वाली है। सवा सौ करोड़ का यह देश इसी परंपरा में पला-बढ़ा है।

दरअसल मौजूदा आक्रामक नीति से अटल बिहारी वाजपेयी की नीति की तरफ बढ़ने का संकेत उन्होंने तब दिया, जब उन्होंने कहा कि इंसानियत के दायरे में ही बात होगी। इसके तुरंत बाद राजनाथ सिंह के दौरे ने सरकार का एक और नरम अप्रोच सामने रखा।

आतंकियों पर दबिश व सैन्य अभियान रहेगा जारी

हालांकि इस बीच सरकार ने साफ किया है कि अलगाववादी नेताओं पर दबिश जारी रहेगी, लेकिन उन्हें कानूनी रूप से पकड़ा जाएगा।

एनआईए और ईडी उन नेताओं के खिलाफ बड़े पैमाने पर कार्रवाई कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार सभी एजेंसियों को इनके खिलाफ जांच को तीन महीने में पूरी कर चार्जशीट दाखिल करने को कहा है। आतंकियों के खिलाफ मिलिटरी ऑपरेशन भी जारी रहेगा।

इस साल अब तक 150 से अधिक आतंकी मारे जा चुके हैं जो पिछले 10 सालों में सबसे अधिक है, जबकि अभी साल बीतने में 3 महीने बाकी हैं। सरकार ने साफ निर्देश दिया है कि घाटी में कोई पुराना आतंकी संगठन न रह पाए और जैसे ही खुफिया सूत्रों से नए संगठन के सक्रिय होने की सूचना मिले, उसे उखाड़ फेंका जाए।

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