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CJI रंजग गोगोई ने पूछा- CBI निदेशक के अधिकार वापस लेने से पहले कमेटी की सलाह लेने में क्या मुश्किल थी?

सीवीसी की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) तुषार मेहता बहस करते हुए कहा कि निदेशक होने के बाद भी व्यक्ति अखिल भारतीय सेवा का हिस्सा होता है।

CJI रंजग गोगोई ने पूछा- CBI निदेशक के अधिकार वापस लेने से पहले कमेटी की सलाह लेने में क्या मुश्किल थी?

देश की सर्वोच्च जांच एजेंसी केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) में मचे घमासान पर सुप्रीम कोर्ट में आज सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा की याचिका पर सुनवाई की गई।आलोक वर्मा छुट्टी पर भेजने के सरकार के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।

सुप्रीम कोर्ट ने दलिले सुनने के बाद फैसला अभी सुरक्षित रख लिया है। सीवीसी की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) तुषार मेहता बहस करते हुए कहा कि निदेशक होने के बाद भी व्यक्ति अखिल भारतीय सेवा का हिस्सा होता है।

सीजेआई रंजग गोगोई ने पूछा कि आलोक वर्मा के अधिकार वापस लेने पहले सेलेक्शन कमेटी की सलाह लेने में क्या मुश्किल थी? एएसजी ने अपनी दलील पेश करते हुए कहा कि अखिल भारतीय सेवाएं के सदस्यों के मामले का निपटारा सीवीसी एक्ट, 2003 की धारा 8(2) के तहत होता है।

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उन्होंने सवाल करते हुए पूछा कि सीबीआई का निदेशक बनने के बाद क्या कोई भी शख्स अखिल भारतीय सेवाएं का सदस्य रहता है? पुलिस एक्ट में ऐसा कही नहीं लिखा है। जिस शख्ल की योग्यता निदेशक बनने की है, उसे पुलिस सर्विस पर लागू होने वाले नियमों से छूट है।

इसके बाद सीजेआई ने जवाब देते हुए कहा कि सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा की दलील यह है कि उनके अधिकार वापस लेने संबंधी कोई भी कार्रवाई वीनीत नारायण जजमेंट के विपरीत है। ऐसा करने के लिए सेलेक्शन कमेटी की स्वीकृति जरूरी है।

इसके बाद सीजेआई ने एएसजी से यह कहा कि सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा के अधिकार वापस लेने पहले सेलेक्शन कमेटी के लिए मशविरा लेने में क्या मुश्किल थी? सीजेआई के इस सवाल के जवाब में एसजी ने यह कहा कि यह स्थानांतरण का मामला नहीं था।

फिर सीजेआई ने कहा कि सेलेक्शन कमेटी की सलाह लेने में क्या परेशानी थी? इसके बाद एएसजी ने आगे कहा कि निदेशक अखिल भारतीय सेवा (सर्विस) का मेंबर होता है। जिसपर सीजेआई ने कहा बेशक।

एएसजी तुषार मेहता ने कहा कि चलिए मान लीजिए अगर कोई अफसर रिश्वत लेते हुए रूम में पकड़ा जाता है, और उसे तत्काल निलंबित करना है, तब ऐसी स्थिति में इसका अधिकार केंद्र सरकार के पास है।

इससे पहले बुधवार को केंद्र की तरफ से कोर्ट में कहा गया कि सीबीआई के 2 शीर्ष स्तर के अफसरों के बीच की लड़ाई सार्वजनिक होने से देश की प्रमुख जांच एजेंसी सीबीआई की छवि खराब हो रही थी। इसी वजह के केंद्र सरकार को सीबीआई की साख बचाने के लिए दखल देना पड़ा।

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