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CBI vs CBI: आलोक वर्मा की हुई वापसी, पढ़ें सुप्रीम कोर्ट का पूरा फैसला

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने सीबीआई बनाम सीबीआई (CBI VS CBI) के मामला में एक अहम फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा (Alok Verma) को उनके पद पर बहाल कर दिया है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने आलोक वर्मा को छु्ट्टी पर भेजने के फैसले को असंवैधानिक बताया है। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) आलोक वर्मा (Alok Verma) को छुट्टी पर भेजने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले को निरस्त कर दिया है।

CBI vs CBI: आलोक वर्मा की हुई वापसी, पढ़ें सुप्रीम कोर्ट का पूरा फैसला
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CBI vs CBI

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने सीबीआई बनाम सीबीआई (CBI VS CBI) के मामला में एक अहम फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा (Alok Verma) को उनके पद पर बहाल कर दिया है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने आलोक वर्मा को छु्ट्टी पर भेजने के फैसले को असंवैधानिक बताया है। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) आलोक वर्मा (Alok Verma) को छुट्टी पर भेजने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले को निरस्त कर दिया है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने कहा है कि आलोक वर्मा कोई भी नीतिगत फैसला नहीं ले सकते और न ही किसी जांच का जिम्मा ले सकते हैं। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) से सवाल किया था कि अधिकारियों के बीच तना-तनी जुलाई से चल रही थी। यह रातों रात नहीं हुआ है।

तो डायरेक्टर आलोक वर्मा (CBI Director Alok Verma) को हटाने से पहले चयन समिति से परामर्श क्यों नहीं लिया गया। काम से हटाने से पहले चयन समिति से परामर्श लेने में क्या दिक्कत थी? 23 अक्टूबर को अचानक फैसला क्यों लिया गया? CVC की ओर से पेश SG तुषार मेहता ने कहा कि CVC की संसद के प्रति जवाबदेही होती है।

सीबीआई (CBI) गंभीर मामलों की जांच करने के बजाय आपस में ही लड़ रही थी। बड़े अधिकारी एक दूसरे पर गंभीर आरोप लगा रहे थे। एक दूसरे के घर में रेड (Raid) कर रहे थे। बड़े असाधारण हालात हो गए थे। इस कारण से CVC को यह कदम उठाना पड़ा।

मुकुल रोहतगी ने कहा था कि CBI निदेशक की नियुक्ति और ट्रांसफर में चयन समिति की भूमिका और बाकी अधिकार सरकार के पास हैं। फली नरीमन ने कहा था कि जिस तरह सुप्रीम कोर्ट में कोई कार्यवाहक चीफ जस्टिस नहीं हो सकता उसी तरह CBI में कोई कार्यवाहक निदेशक नहीं नियुक्त किया जा सकता।

आलोक वर्मा के वकील फली नरीमन ने कहा था कि आलोक वर्मा को छुट्टी पर भेजे जाने के पीछे असल वजह उनका राकेश अस्थाना के खिलाफ FIR दर्ज करना था। बिना अधिकार के सरकार सीबीआई डायरेक्टर को कुछ भी नहीं कर सकती। इस पर चीफ जस्टिस ने पूछा था कि क्या आपका कहना है कि CBI निदेशक को छुआ ही नहीं जा सकता?

किसी तरह की अनुशासन हीनता पर कार्रवाई नहीं की जा सकती? अगर ऐसा ही है तो संसद ने इस बात को कानून बनाते वक्त क्यों नहीं कहा। अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा था कि CBI के दो बड़े अधिकारी निदेशक और विशेष निदेशक आपस में बच्चों की तरह लड़ रहे थे।

उनके लड़ाई की खबरें मीडिया में आ गई थीं। जिससे CBI की छवि खराब हुई थी। सरकार का फैसला सीबीआई पर लोगों का भरोसा वापस लाने के लिए था। अटॉर्नी जनरल ने कहा था कि आलोक वर्मा का ट्रांसफर नहीं हुआ था इसलिए चयन समिति से परामर्श नहीं लिया गया।

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