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स्थानांतरण रैकेट की सैन्य मुख्यालय पर गिरी गाज, CBI ने किया दो को गिरफ्तार

सेना ने किया जांच में सहयोग करने का वादा।

स्थानांतरण रैकेट की सैन्य मुख्यालय पर गिरी गाज, CBI ने किया दो को गिरफ्तार
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सैन्य मुख्यालय में कथित स्थानांतरण रैकेट को लेकर केंद्रीय जांच एवं अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने एक लेफ्टिनेंट कर्नल और एक बिचौलिए को गिरफ्तार किया है।

सीबीआई के सूत्रों ने कहा कि सेना के कार्मिक डिवीजन में तैनात लेफ्टिनेंट रंगनाथन सुब्रमणि मोनी और बिचौलिए गौरव कोहली को गुरुवार को उस समय गिरफ्तार किया गया जब बेंगलुरु में रह रहे एक सैन्य अधिकारी के तबादले के लिए दो लाख रुपए की रिश्वत दी जा रही थी।

उधर सेना मुख्यालय में मौजूद सूत्रों का कहना है कि वो जांच एजेंसी द्वारा पूरी तहकीकात किए जाने का इतंजार कर रहे हैं। साथ ही इस मामले में सेना अपनी ओर से पूर्ण सहयोग करने के लिए तैयार है।

जांच एजेंसी ने इस मामले में शुरुआत में कुछ सैन्य अधिकारियों की अवैध गतिविधियों का पता चला था। इसके बाद ही इन दोनों को गिरफ्तार करने के लिए जाल बिछाया गया था।

सूत्रों ने कहा कि इस खुलासे से सेना में हलचल मचना तय है, क्योंकि कुछ और वरिष्ठ अधिकारियो के भी इस मामले में लिप्त होने का भी संदेह है। गिरफ्तार किया गया सैन्य अधिकारी ले़ कर्नल मोनी सेना में वर्ष 1994 में कमीशन हुआ था और सेना मुख्यालय में इसकी नियुक्ति अगस्त 2015 में हुई है।

प्राथमिकी में डीडीजी कार्मिक ब्रिगेडियर एस के ग्रोवर का भी नाम है। लेकिन आरोपियों की सूची में उनका नाम शामिल नहीं किया गया। सीबीआई ने मोनी, हैदराबाद में रह रहे सैन्य अधिकारी पुरुषोत्तम, बैरक एवं स्टोर अधिकारी (बीएसओ) बेंगलुरु एस़ सुभाष और कथित बिचौलिए गौरव कोहली के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

सीबीआई ने प्राथमिकी में आरोप लगाया है कि यह रिश्वत हवाला माध्यमों के जरिए दी जा रही थी। दोंनो को विशेष सीबीआई न्यायाधीश नरेश कुमार मल्होत्रा के समक्ष पेश किए जाने के बाद एजेंसी को पूछताछ करने के लिए पांच दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है।

इसकी मांग लोक अभियोजक अमित कुमार ने कोर्ट से की थी। सीबीआई ने पांच दिन की हिरासत मांगते हुए कहा कि इस बड़ी साजिश का खुलासा किए जाने की जरुरत है। क्योंकि यह बड़ा गिरोह है। इसमें वरिष्ठ अधिकारियों की संलिप्तता का भी शक है, जिन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है।

सीबीआई ने अदालत को यह भी बताया कि वो यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या आरोपियों ने पहले भी ऐसा अपराध किया और किसको फायदा मिला। उन्हें आवाज के नमूने चाहिए और उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ किए जाने की जरुरत है। क्योंकि उनका आमना-सामना कराया जाना है।

एजेंसी इस बात पर भी ध्यान दे रही है कि सैन्य अधिकारी अपनी पसंद की जगह पर तैनाती पाने के लिए किस प्रकार लाखों रुपए देने के लिए तैयार थे। ऐसा आरोप है कि मोनी ने कोहली एवं सैन्य अधिकारी पुरुषोत्तम के साथ मिलकर विभिन्न अधिकारियों के तबादलों को प्रभावित करने के लिए आपराधिक षडयंत्र रचा।

पुरुषोत्तम ने उन सैन्य अधिकारियों से कथित रुप से संपर्क किया, जिन्हें या तो विभिन्न फील्ड फार्मेशंस में तैनात किया गया था या जिनका जल्द ही तबादला होना था और जो उनके पसंदीदा स्थलों पर तैनाती पाना चाहते थे।

वह कोहली से संपर्क किया करते थे। कोहली ने इन बड़े अवैध लाभ के बदले सैन्य अधिकारियों के स्थानांतरण के लिए इन संपर्कों का इस्तेमाल किया। इसमें दावा किया गया है कि पुरुषोत्तम ने कोहली से कथित अनुरोध किया कि वह रिश्वत के बदले में डीएसआरके रेड्डी और सुभाष का तबादला कराए।

दोनों बेंगलुरु से सिकंदराबाद या विशाखापट्टनम में तैनाती चाहते थे। सुभाष ने कोहली को हवाला के जरिए पांच लाख रुपए कथित रिश्वत के तौर पर दिए। सीबीआई ने कहा कि कोहली, मोनी के आवास पर गया और उसने दिल्ली में सैन्य मुख्यालयों में कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की।

सूचना में भी खुलासा किया गया कि मोनी, सुभाष के तबादले के मामले के लिए सैन्य मुख्यालय के डीडीजी (कार्मिक) ब्रिगेडियर एस़ के़ ग्रोवर के संपर्क में थे। ऐसा आरोप है कि सुभाष के तबादले के लिए कोहली, मोनी को दो लाख रुपए देने वाले थे।

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