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कावेरी विवाद: सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ कर्नाटक बंद

स्कूल और सरकारी प्रतिष्ठानों को भी आज बंद किया गया है।

कावेरी विवाद: सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ कर्नाटक बंद
बेंगलुरु. तमिलनाडु को 15000 क्यूसेक पानी दिए जाने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ आज कर्नाटक बंद है। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए सुरक्षा के मद्देनजर बेंगलुरु में 16 हजार से ज्यादा पुलिस के जवानों तैनात की गई है। स्कूल और सरकारी प्रतिष्ठानों को भी आज बंद किया गया है। कावेरी जल विवाद अंग्रेजों के समय से चला आ रहा है। 1924 में इन दोनों के बीच समझौता हुआ, लेकिन बाद में विवाद में केरल और पुडुचेरी भी शामिल हो गए जिससे यह और मुश्किल हो गया।
तमिलनाडु को देने का निर्देश
गत दो दशकों या इससे अधिक समय से सुप्रीम कोर्ट तथा कावेरी नदी प्राधिकरण को कई मौकों पर इसमें हस्तक्षेप करना पड़ा है। ऐसा 1991 में, 2002 में तथा फिर 2012 में हुआ। ऐसा अब फिर हुआ है। आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक सरकार को 15 हजार क्यूसेक पानी 10 दिन तक तमिलनाडु को देने का निर्देश दिया है, जिसके चलते किसान काफी नाराज हैं और विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे कावेरी हरोता समिति ने बीते मंगलवार को भी मंड्या में बंद बुलाया था। कर्नाटक बंद सुरक्षा के मद्देनजर बंगलुरू में 16 हजार से ज्यादा पुलिस के जवानों तैनात की गई है।
अगली सुनवाई 16 सितंबर को होगी
दरअसल कर्नाटक ने कोर्ट से कहा था कि वो 10 हजार क्यूसिक पानी देने को तैयार है लेकिन तमिलनाडू ने कहा कि उसे 20 हजार क्यूसिक पानी चाहिए वरना फसल खराब हो जाएगी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश जारी किया है। मामले की सुनवाई 16 सितंबर को होगी।
जल बंटवारा हमेशा सिरदर्द बना रहता है
जल बंटवारा हमेशा ही किसी भी जगह पर ऊपरी तथा निचले तटवर्ती राज्यों के लिए सिरदर्द बना रहता है। देश की लगभग सभी प्रमुख नदियां अन्तर्राज्यीय नदियां हैं और उनका पानी दो अथवा अधिक राज्य बांटते हैं। उदाहरण के लिए, सतलुज व यमुना के पानी को लेकर पंजाब तथा हरियाणा आमने-सामने हैं। महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश तथा कर्नाटक कृष्णा को लेकर लड़ रहे हैं, जबकि तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल तथा पुड्डुचेरी कावेरी को लेकर। तेलंगाना तथा आंध्र प्रदेश में भी कृष्णा तथा गोदावरी नदियों के जल बंटवारे को लेकर विवाद है।
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