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कावेरी विवाद: प्रतिदिन तीन हजार क्यूसेक पानी देगा कर्नाटक

कावेरी निगरानी समिति की बैठक में हुआ निर्णय

कावेरी विवाद: प्रतिदिन तीन हजार क्यूसेक पानी देगा कर्नाटक
नई दिल्ली. तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच कावेरी नदी के जल बंटवारे को लेकर चल रहे विवाद के बीच कावेरी निगरानी समिति ने कर्नाटक को निर्देश दिया है कि वह 21 से 30 सितंबर यानि दस दिन तक प्रतिदिन तमिलनाडु को तीन हजार क्यूसेक पानी देगा। केंद्रीय जल संसाधन सचिव शशि शेखर की अध्यक्षता में सोमवार को देर शाम श्रमशक्ति भवन में हुई कावेरी निगरानी समिति की सातवीं बैठक में यह निर्णय कर्नाटक, तमिलनाडु, पुडुचेरी के मुख्य सचिवों और केरल के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में लिया गया। सोमवार को साढ़े चार बजे शुरू होने के बाद करीब दो घंटा चली इस बैठक में तर्क-वितर्क के साथ हुई चर्चा के बाद भी कर्नाटक और तमिलनाडु छोड़े जाने वाले पानी की मात्रा को लेकर ऐसे किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सके, जिस पर कोई सहमति बनाई जा सके।
इसके बाद केंद्रीय जल संसाधन सचिव और समिति के अध्यक्ष शशि शेखर को अपने अधिकारों का इस्तेमाल करना पड़ा और तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच मतभेदों को खारिज करते हुए कर्नाटक को आदेश दिया कि वह तमिलनाडु को 21 से 30 सितंबर तक रोजाना 3000 क्यूसेक पानी देगा। दरअसल कावेरी निगरानी समिति पर सुप्रीम कोर्ट के जारी आदेश का भी दबाव है कि वह तमिलनाडु व कर्नाटक के जल संबन्धी आंकड़ों को तय करे जिसका अध्यक्ष शीर्ष अदालत करेगी। दोनों राज्यों के जल संबन्धी इन आंकड़ो का विश्लेषण केंद्रीय जल आयोग के अधिकारियों द्वारा किया जा रहा है, जिन्हें सोमवार को समिति की बैठक में प्रस्तुत किया गया। अब निगरानी समिति की अगली बैठक अक्तूबर में किसी भी दिन करने का निर्णय लिया गया। मसलन 30 सितंबर के बाद जरूरत पड़ने पर तमिलनाडु को पानी छोड़ने के बारे में अगला निर्णय लिया जा सकता है।
इन मामलों पर बनी सहमति
बैठक के दौरान दोनों राज्य छोड़े जाने वाले पानी की मात्रा पर सहमति पर नहीं पहुंच सके। वहीं बैठक में कर्नाटक ने जहां थोड़ा भी पानी छोड़ने का जोरदार विरोध किया, वहीं तमिलनाडु ने कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण के आदेश के अनुसार पानी प्रवाहित करने का अनुरोध किया। इसके बावजूद इस बैठक में इस बात पर रजामंदी जताई कि कावेरी प्रबंधन बोर्ड के प्रभाव में आने तक फरवरी 2017 से हालात का जायजा लेने के लिए समिति की बैठक हर महीने होनी चाहिए। गौरतलब है कि प्रस्तावित बोर्ड से संबंधित मामला शीर्ष अदालत में लंबित है। वहीं समिति ने नदी के जल प्रवाह के आंकड़े उसी समय (रीयल टाइम में) समिति सचिवालय नयी दिल्ली, तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल और पुडुचेरी के बीच प्रसारित करने के प्रस्ताव पर एक करार करने पर भी सहमति जताई गई। केंद्रीय जल आयोग ऐसे उपकरणों पर काम कर रहा है जिन्हें रीयल-टाइम में आंकड़े मुहैया कराने के लिहाज से विभिन्न स्थानों पर लगाया जाएगा। कारण है कि प्रामाणिक आंकड़ों की कमी के कारण विभिन्न पक्षों के बीच आम-सहमति बनने में कठिनाई होती है।
आदेश को चुनौती देने में स्वतंत्रता
जल संसाधन सचिव शशि शेखर ने बैठक में विचार विमर्श के बावजूद वे सहमत नहीं हुए हैं। कल जब मामला उच्चतम न्यायालय में आएगा तो दोनों राज्य इस आदेश को चुनौती देने के लिए स्वतंत्र हैं या वे अदालत के समक्ष आदेश पर सहमति जता सकते हैं। गौरतलब है कि निगरानी समिति गत 12 सितंबर को अपनी पहली बैठक में पर्याप्त सूचना के अभाव में कर्नाटक द्वारा छोड़े जाने वाले पानी की मात्रा पर किसी फैसले पर नहीं पहुंच सकी थी। इसलिए समिति ने इन राज्यों से 15 सितंबर तक जल संबन्धी आंकड़ो की सूचना देने को कहा था। शेखर ने कहा कि उन्होंने कई चीजों को ध्यान में रखकर फैसला लिया, जिनमें कर्नाटक में पेयजल और सिंचाई के लिए पानी की जरूरत तथा तमिलनाडु में गर्मियों की फसलों के लिए पानी की आवश्यकता को भी ध्यान में रखा गया है।
क्या था सुप्रीम कोर्ट का आदेश
उच्चतम न्यायालय ने पांच सितंबर को कर्नाटक से तमिलनाडु के किसानों की दुर्दशा को ध्यान में रखते हुए कर्नाटक को 10 दिन तक रोजाना 15000 क्यूसेक पानी छोड़ने को कहा था। सुप्रीम कोर्ट के इन अंतरिम आदेश के बाद कर्नाटक में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गये थे।
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