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कावेरी विवाद: कर्नाटक बंद का व्यापक असर, जनजीवन प्रभावित

एयरपोर्ट और बस अड्डों पर यात्रियों की भारी भीड़ जमा है।

कावेरी विवाद: कर्नाटक बंद का व्यापक असर, जनजीवन प्रभावित
नई दिल्ली. तमिलनाडु को 15 हजार क्यूसेक पानी दिए जाने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ आज कर्नाटक बंद है। विभिन्न संगठनों के द्वारा बुलाए गए इस राजव्यापी बंद का खासा असर आम लोगों के जीवन पर पड़ रहा है। एयरपोर्ट और बस अड्डों पर यात्रियों की भारी भीड़ जमा है। सभी प्रकार के पब्लिक ट्रांसपोर्ट सड़कों से गायब हैं। स्कूल और सरकारी प्रतिष्ठानों को भी आज बंद रखा गया है। इसके अलावा व्यापारिक प्रतिष्ठान, दुकानें, होटल और रेस्टोरेंट भी बंद हैं।
किसान जगह-जगह विरोध-प्रदर्शन के लिए सड़कों पर उतर आए हैं। तमिलनाडु स्टेट ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन ने कर्नाटक जाने वाली अपनी बस सेवाएं स्थगित कर दी हैं। बेंगलुरु के सिनेमाघरों से तमिल फिल्में हटा दी गई हैं। इसके अलावा यहां रहने वाली तमिल आबादी अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित है। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए सुरक्षा के मद्देनजर बेंगलुरु में 16 हजार से ज्यादा पुलिस के जवानों तैनात की गई है।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पानी की कमी से जूझ रहे किसानों का कहना है कि जब उनकी अपनी ही सिंचाई की जरूरतें पूरी नहीं हो रहीं तो किसी और राज्य को पानी कैसे दिया जा सकता है। कावेरी जल विवाद अंग्रेजों के समय से चला आ रहा है। 1924 में इन दोनों के बीच समझौता हुआ, लेकिन बाद में विवाद में केरल और पुडुचेरी भी शामिल हो गए जिससे यह और मुश्किल हो गया।
सुप्रीम कोर्ट ने दिए निर्देश
गत दो दशकों या इससे अधिक समय से सुप्रीम कोर्ट तथा कावेरी नदी प्राधिकरण को कई मौकों पर इसमें हस्तक्षेप करना पड़ा है। ऐसा 1991 में, 2002 में तथा फिर 2012 में हुआ। ऐसा अब फिर हुआ है। आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक सरकार को 15 हजार क्यूसेक पानी 10 दिन तक तमिलनाडु को देने का निर्देश दिया है, जिसके चलते किसान काफी नाराज हैं और विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे कावेरी हरोता समिति ने बीते मंगलवार को भी मंड्या में बंद बुलाया था। कर्नाटक बंद सुरक्षा के मद्देनजर बंगलुरू में 16 हजार से ज्यादा पुलिस के जवानों तैनात की गई है।
अगली सुनवाई 16 सितंबर को होगी
दरअसल कर्नाटक ने कोर्ट से कहा था कि वो 10 हजार क्यूसिक पानी देने को तैयार है लेकिन तमिलनाडू ने कहा कि उसे 20 हजार क्यूसिक पानी चाहिए वरना फसल खराब हो जाएगी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश जारी किया है। मामले की सुनवाई 16 सितंबर को होगी।
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