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नोटबंदी से सेक्स वर्कर्स भी परेशान, इनकी गलियों में पसरा सन्नाटा

सोनागाछी में ही अकेले करीब 11,000 सेक्स वर्कर्स हैं

नोटबंदी से सेक्स वर्कर्स भी परेशान, इनकी गलियों में पसरा सन्नाटा
कोलकाता. केंद्र सरकार द्वारा काले धन पर नकेल कसने के मकसद से 500 और 1,000 रुपये के नोटों को बंद करने का फैसला कई लोगों पर भारी पड़ रहा है। एशिया के सबसे विशाल रेड लाइट इलाके कोलकाता के सोनागाछी में आर्थिक गतिविधियां ठप होने की कगार पर आ पहुंची है। सोनागाछी में सेक्स वर्कर्स को नोटबंदी के फैसले का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। इससे पहले यहां पर ऐसा सन्नाट 1992 में पसरा था, तब बाबरी मस्जिद के गिरने के बाद साम्प्रदायिक तनाव की आशंका के कारण कर्फ्यू लगा दिया गया था।
भारत में हालांकि वेश्यावृति गैरकानूनी है, लेकिन इसके बावजूद यह काफी फलता-फूलता कारोबार है। अनुमान के मुताबिक, देश में करीब 20 लाख महिला सेक्सकर्मी हैं। सोनागाछी में ही अकेले करीब 11,000 सेक्स वर्कर्स हैं। चूंकि इनके पास आने वाले ग्राहक पुराने 500 और 1,000 के नोटों में ही उन्हें पैसे देते हैं, इसी कारण इन सेक्सकर्मियों के लिए अपना गुजारा चला पाना काफी मुश्किल हो गया है। इनके लिए खाने तक का इंतजाम करना चुनौती साबित हो रहा है।
एक सेक्स वर्कर ने बताया, 'हमारा काम सही नहीं चल रहा है। हमारे पास आने वाले ग्राहक बंद हो चुके 500 और 1,000 के नोटों में ही भुगतान कर रहे हैं। हमें कई तरह की परेशानियां उठानी पड़ रही हैं। हम बैंकों के बाहर लंबी कतारों में खड़ी हो रही हैं। हमारा काम जैसे रुक गया है।' दरबार इलाके में सक्रिय 65,000 सेक्सकर्मियों में महिलाएं, पुरुष और ट्रांसजेंडर्स, सभी शामिल हैं। यहां काम करने वाली एक महिला सेक्स वर्कर ने बताया, 'हमारे बॉस ने हमसे 500 और 1,000 के पुराने नोट लेने को कहा है। हमारी आमदनी भी काफी कम हो गई है। '
राजधानी दिल्ली में भी जिस्मफरोशी के इस धंधे पर नोटबंदी का काफी असर पड़ा है। सेक्स वर्कर्स के पास आने वाले ग्राहकों की संख्या काफी कम हो गई है। दिल्ली में काम करने वाली एक यौनकर्मी ने बताया, 'हमें रोजाना की आमदनी के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। हर दिन हमारे पास 2 से 3 ग्राहक ही आ रहे हैं। हमें परेशानी तो हो रही है, लेकिन फिर भी हमें इसी आमदनी में गुजारा करना होगा।'
500 और 1,000 के नोटों को अमान्य करने के इस फैसले के पीछे मकसद अरबों की कीमत वाले काले धन को देश की मुख्य अर्थव्यवस्था में शामिल करना है। साथ ही, इसके पीछे आतंकवादियों को भी निशाना बनाने की रणनीति है। पाकिस्तान समर्थित आतंकवादी संगठन लंबे समय से अपनी फंडिंग के लिए जाली भारतीय नोट बनाकर उन्हें भारतीय अर्थव्यवस्था में खपाते हैं। इनमें सबसे ज्यादा मात्रा 500 और 1,000 के नकली नोटों की ही होती है।
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