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जानिए सैनिक से कैसे राजनीति के ''कैप्टन'' बने ''अभिमन्यु''

कैप्टन अभिमन्यु के पिता स्वर्गीय मित्रसेन आर्य थे। स्वर्गीय मित्रसेन जी का हरियाणा और पूरे देश में समाज के प्रति एक परहितकारी और गुरुकुल शिक्षा प्रणाली में हिमायती के रूप में योगदान दिया। उनका कहना था कि जिनके पास उम्मीद है वह लाख बार हारकर भी नहीं हारता।
चौ मित्रसेन हम सभी के लिए प्रेरणा हैं। देशभर में अपनी मेहनत से व्यापार जगत में ख्याति प्राप्त करने के साथ-साथ उन्होंने देश के अंदर शिक्षा को बढ़ावा देने का काम भी किया। उन्होंने ऐसी जगहों पर स्कूल बनवाए जहां पर लड़कियों के लिए स्कूल नहीं थे।
देश सेवा की भावना उनमें इस तरह भरी हुई थी कि उन्होंने अपने तीन पुत्रों को सेना में भेजा। ऐसे बहुत कम ही उदाहरण होंगे जब किसी व्यावसायी या नेता ने अपनी संतानों को सेना में भेजा है।
कैप्टन अभिमन्यु अपनी वंश परम्परा को आगे ले गये हैं और ऐसी गतिविधियों में सक्रिय रूप से लगे हुए हैं जो कि एक साक्षर एवं अखंड राष्ट्र को बढ़ाने के लिए रखी जाने वाली नींव के रूप में काम कर सके।

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